
✍️ भागीरथी यादव
लखनऊ। भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी फील्ड प्रयोगशाला घोषित किया गया है। जनगणना 2027 की तैयारी के तहत राज्य के तीन क्षेत्रों — अनूपशहर (जनपद बुलंदशहर), मिहीपुरवा (जनपद बहराइच) और प्रयागराज नगर निगम के सात वार्डों में 10 से 30 नवंबर तक ‘प्री टेस्ट’ आयोजित किया जाएगा।
यह प्रायोगिक अभ्यास देश की अब तक की सबसे व्यापक और तकनीकी रूप से उन्नत डेटा संग्रह प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
मुख्य सचिव एस. पी. गोयल की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की पहली बैठक में डिजिटलीकरण की रूपरेखा और कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे जनगणना कार्य में पूर्ण समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि, “जनगणना देश की जनसांख्यिकी और विकास योजनाओं की रीढ़ है, इसलिए सटीकता, पारदर्शिता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।”
जनगणना निदेशक शीतल वर्मा ने बताया कि इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। सभी डेटा संग्रह, प्रविष्टि, सत्यापन और मॉनिटरिंग कार्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जाएंगे। राज्य में लगभग छह लाख कार्मिकों को इस कार्य में लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी नए जनपद, तहसील, नगर निकाय या ग्राम पंचायत के गठन पर रोक रहेगी। इसके साथ ही पहली बार नागरिकों को ‘स्व-गणना (Self Enumeration)’ की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे वे स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
राज्य में एक स्टेट नोडल ऑफिस की स्थापना भी की जाएगी, जो डेटा समन्वय, निगरानी और प्रगति रिपोर्टिंग का कार्य संभालेगा।
बैठक में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, सचिव नगर विकास अनुज कुमार झा, विशेष सचिव सामान्य प्रशासन जुहैर बिन सगीर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
डिजिटल जनगणना के माध्यम से हर नागरिक का डेटा सुरक्षित, केंद्रीकृत और तुरंत उपलब्ध रहेगा। इससे नीतियों व विकास योजनाओं के निर्माण में वास्तविक समय के आंकड़ों का उपयोग संभव होगा और भारत को वैश्विक डेटा गवर्नेंस मॉडल की दिशा में अग्रसर करेगा।





