
प्रशासन ने दिया लिखित आश्वासन— “ग्राम सभा की अनुमति के बिना नहीं होगी एक इंच जमीन अधिग्रहित”
कोरबा। वनांचल क्षेत्र तौलीपाली में प्रस्तावित कोल ब्लॉक नीलामी के विरोध में गुरुवार, 27 फरवरी को ग्रामीणों का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर सड़कों पर फूट पड़ा। हज़ारों की संख्या में जुटे ग्रामीणों ने उरगा–हाटी मुख्य मार्ग के चचिया चौक पर ऐतिहासिक चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि “ग्राम सभा से ऊपर कोई फैसला नहीं होगा।”
अस्तित्व की लड़ाई: जल, जंगल और जमीन बचाने की हुंकार
सुबह से ही चचिया, तौलीपाली, लुडूकेत, धीरामाठा, कुदमुरा, कलगामार, कटकोना और कोलगा सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीण पारंपरिक नारों के साथ जुटने लगे थे। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि कोल ब्लॉक के नाम पर उनके जल स्रोतों, घने जंगलों और पुश्तैनी जमीनों को उजाड़ने की साजिश रची जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, यह केवल खनन का विरोध नहीं बल्कि उनकी संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व को बचाने का संघर्ष है।
प्रशासनिक अमले के फूले हाथ-पांव, मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
आंदोलन की उग्रता और वाहनों की मीलों लंबी कतारों को देखते हुए प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति को संभालने के लिए अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और जनपद सीईओ भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच घंटों तीखी बहस चली। ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे कि जब तक लिखित में आश्वासन नहीं मिलता, सड़क खाली नहीं की जाएगी।
बड़ी जीत: लिखित भरोसे के बाद खुला जाम
देर शाम प्रशासन को ग्रामीणों की एकजुटता के आगे झुकना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों ने लिखित आश्वासन दिया कि:
ग्राम सभा के प्रस्ताव और सहमति के बिना क्षेत्र में किसी भी प्रकार का खनन कार्य नहीं किया जाएगा।
बिना ग्रामीणों की मर्जी के कोई विस्थापन प्रक्रिया शुरू नहीं होगी।
इस लिखित दस्तावेज़ के मिलते ही ग्रामीणों ने अपनी जीत का जयघोष किया और देर शाम चक्काजाम समाप्त किया। हालांकि, ग्रामीणों ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि भविष्य में ग्राम सभा की अनदेखी की गई, तो आंदोलन इससे भी बड़ा रूप लेगा।
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