
कटघोरा/कोरबा, 18 सितंबर 2025:
बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित मिड-डे मील एवं नाश्ता योजना की लापरवाहियां एक बार फिर सामने आई हैं। कटघोरा क्षेत्र से मिली शिकायतों और तस्वीरों ने इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शासकीय माध्यमिक शाला मोहलाइनभाटा में लापरवाही
वार्ड क्रमांक 8 की शासकीय माध्यमिक शाला मोहलाइनभाटा में एकता महिला स्व-सहायता समूह (अध्यक्ष मोनेश साहू, सचिव आरती राज) योजना का संचालन कर रहा है। आरोप है कि बच्चों को नाश्ता और दोपहर का भोजन निर्धारित मेन्यू और गुणवत्ता के अनुसार नहीं दिया जा रहा।

📌 तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि बच्चों को दी जा रही दाल में दाल की मात्रा बेहद कम और पानी अधिक है।
📌 नाश्ते में शासन द्वारा तय मेन्यू का पालन नहीं किया जाता।
📌 जबकि शासन ने नाश्ते के लिए 7 रुपये और मध्यान्ह भोजन के लिए 10.17 रुपये प्रति बच्चे का प्रावधान रखा है, साथ ही आवश्यक राशन भी उपलब्ध कराया जाता है।
इसके बावजूद बच्चों को कमज़ोर और घटिया भोजन परोसना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।

स्थानीय स्तर की अनदेखी, जिला स्तर से कार्य संचालन
नियमों के अनुसार, भोजन संचालन का अधिकार स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को बीईओ कार्यालय की अनुशंसा से मिलना चाहिए। लेकिन मोहलाइनभाटा स्कूल में समूह ने बीईओ कार्यालय को दरकिनार कर सीधे जिला शिक्षा विभाग से सहमति प्राप्त कर ली। इससे अनियमितता और पक्षपात की आशंका गहराती जा रही है।
स्कूल प्रबंधन भी मौन

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल प्रबंधन समिति भी इस लापरवाही पर चुप्पी साधे हुए है। न तो गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित किया जा रहा और न ही बच्चों के हितों की रक्षा की जा रही।
योजना की गरिमा पर प्रश्नचिह्न
छत्तीसगढ़ सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उनकी शिक्षा में सहयोग करना है। लेकिन कटघोरा के इस मामले ने साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर गंभीरता की कमी है। घटिया भोजन परोसना बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और शासन की मंशा के विपरीत है।






