
रायपुर। राजधानी के कबीर नगर थाने में पदस्थ एक महिला हेड कांस्टेबल को अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। महिला प्रधान आरक्षक पर आरोप है कि उन्होंने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामले के आरोपी से हाथ मिलाकर केस को कमजोर करने की कोशिश की।
वर्दी पर लगा ‘सांठगांठ’ का दाग
पूरा मामला कबीर नगर थाने में दर्ज दुष्कर्म और पाॅक्सो एक्ट (अपराध क्रमांक 13/26) से जुड़ा है। इस केस की जांच की जिम्मेदारी महिला प्रधान आरक्षक चंद्रकला साहू (नंबर 1507) के पास थी। जांच के दौरान यह शिकायत सामने आई कि चंद्रकला ने आरोपी पक्ष से मेल-जोल बढ़ाया और केस को रफा-दफा करने या कमजोर करने के लिए अनुचित लाभ की अपेक्षा की।
पीड़िता पर बनाया बयान बदलने का दबाव
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि विवेचक (Investigator) होने के नाते न्याय दिलाने के बजाय, प्रधान आरक्षक पर ही पीड़िता को डराने-धमकाने का आरोप लगा है। सूत्रों के मुताबिक:
आरोपी को लाभ पहुँचाने के लिए पीड़िता पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया।
आरोपी पक्ष से केस कमजोर करने के एवज में रुपयों के लेन-देन की शिकायत भी सामने आई।
डीसीपी का कड़ा एक्शन
जैसे ही इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार की शिकायत पश्चिम डीसीपी संदीप पटेल तक पहुँची, उन्होंने बिना देरी किए सख्त रुख अपनाया। डीसीपी द्वारा जारी आदेश में महिला प्रधान आरक्षक के आचरण को “स्वेच्छाचारिता और संदिग्ध” मानते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) रायपुर भेज दिया गया है।
आदेश का मुख्य अंश: “प्रकरण की विवेचना में विवेचक द्वारा संदिग्ध आचरण प्रदर्शित किए जाने के फलस्वरूप तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।”






