अरपाँचल लोकमंच का रावण दहन विवाद: शासन-प्रशासन का ग्रहण, राजनीतिक दबाव पर उठे सवाल

 

Loksadan।  सिद्धांशु मिश्रा बोले – क्यों रोका जा रहा परंपरागत सांस्कृतिक आयोजन, जनता की इच्छाओं के खिलाफ प्रशासन ने थमाया रोकथाम का पहरा

 

बिलासपुर, 08 अगस्त 2025 – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अरपाँचल लोकमंच समिति द्वारा साइनस कॉलेज मैदान में आयोजित होने वाला भव्य रावण दहन कार्यक्रम इस वर्ष अनचाही विवादों में घिर गया। परंपरागत दशहरा पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित यह सांस्कृतिक आयोजन पिछले चार वर्षों से सर्व समाज का प्रतीक बन चुका है। लेकिन इस बार, अरपापार सरकंडा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम को साइनस कॉलेज प्रबंधन ने बिना किसी स्पष्ट वजह के अनुमति देने से इनकार कर दिया और प्रशासन को जिम्मेदारी सौंप दी।

 

समिति के अध्यक्ष पं. सिद्धांशु मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गम्भीर आरोप लगाते हुए बताया कि यह निर्णय किसी राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित प्रतीत होता है। मिश्रा ने कहा, “साइनस कॉलेज प्रशासन बार-बार ‘ऊपर वाले’ का नाम बताने से कतरा रहा है, जबकि हर कोई जानना चाहता है कि कौन-सा शक्तिशाली व्यक्ति इस रामकाज को रोकने के लिए प्रशासन के पीछे खड़ा है।”

 

समिति के पदाधिकारी यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह आयोजन क्षेत्र के ग्रामीण अंचल के हजारों रामभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। वे पैदल चलकर साइनस कॉलेज मैदान आते हैं ताकि रावण दहन के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन सकें। परंतु इस बार कॉलेज प्रशासन द्वारा अनुमति ना देने के निर्णय से आयोजकों और समाज के विभिन्न वर्गों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

 

सिद्धांशु मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अगर शासन-प्रशासन सत्ता पक्ष के दबाव में आकर परंपरागत रावण दहन कार्यक्रम में विघ्न डालते हैं तो हम हर हाल में साइनस कॉलेज मैदान पर ही इसे संपन्न कराएंगे, चाहे जेल की हवा क्यों न खानी पड़े।”

 

उन्होंने यह भी बताया कि हर वर्ष समिति यह निर्णय लेती है कि आयोजन में सभी राजनीतिक दलों के नेता एक मंच पर सामूहिक रूप से उपस्थित होकर समाज में सौहार्द का संदेश दें। पिछले वर्षों की कांग्रेस, भाजपा, और अन्य दलों के विधायकों-सांसदों की संयुक्त तस्वीरें प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शित करते हुए मिश्रा ने सवाल उठाया, “अब बताइए इसमें दलगत राजनीति की कितनी गुंजाइश बचती है?”

 

समिति अडिग है कि यह आयोजन उसी स्थान पर होगा। अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष के दबाव में प्रशासन अपने आप को इस नैतिक एवं सामाजिक महापाप से कैसे बचाएगा। दशहरा पर्व तक साइनस कॉलेज मैदान प्रदेश की चर्चा का मुख्य बिंदु बना रहेगा, जहाँ अच्छाई और बुराई की परस्पर टक्कर स्पष्ट होगी।

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