
✍️ भागीरथी यादव
सरगुजा।
छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत जारी पदस्थापना आदेशों की अनदेखी अब महंगी पड़ने लगी है। सरगुजा जिले में स्थानांतरण के बाद भी नए स्कूलों में ज्वाइनिंग नहीं देने वाले 10 सहायक शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) डॉ. दिनेश कुमार झा ने निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रशासनिक अनुशासन को लेकर शिक्षा विभाग के सख्त रुख को दर्शाती है।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
डीईओ द्वारा जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित शिक्षकों का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन है। विभाग का कहना है कि स्थानांतरण आदेश लागू होने के बाद सेवा दायित्वों से बचना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहला मामला नहीं है। कुछ दिन पहले ही ज्वाइनिंग नहीं देने वाले पांच शिक्षकों को संयुक्त संचालक (जेडी) स्तर से निलंबित किया जा चुका है। इसके बाद डीईओ स्तर पर की गई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि विभाग अब किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
निलंबित शिक्षकों की सूची
निलंबन की कार्रवाई जिन सहायक शिक्षकों पर की गई है, उनमें—
गीता चौधरी (प्राथमिक शाला रिखीमुंडा),
अजय कुमार मिश्रा (प्राथमिक शाला बांधपारा),
सीमा सोनी (प्राथमिक शाला चठीरमा),
अल्पना गुप्ता (प्राथमिक शाला हर्राटिकरा),
मधु गुप्ता (प्राथमिक शाला बिसुनपुर),
भीष्म सिंह (प्राथमिक शाला मुड़ापारा),
अंजुला श्रीवास्तव (प्राथमिक शाला हर्राटिकरा),
निर्मला तिर्की (प्राथमिक शाला दरिमा),
बिंदु जायसवाल (प्राथमिक शाला चिटकीपारा, संकुल टपरकेला)
और गीता देवी (प्राथमिक शाला रजपुरीखुर्द) शामिल हैं।
संदेश साफ
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि युक्तियुक्तकरण और स्थानांतरण आदेशों का पालन अनिवार्य है, और आदेशों की अवहेलना करने वालों पर अब सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।






