
✍️ भागीरथी यादव
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
एमसीबी जिले में यातायात नियमों की सरेआम उड़ती धज्जियां अब आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ने लगी हैं। विशेष रूप से दो पहिया, चार पहिया और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों द्वारा किए जा रहे मोटरयान अधिनियम के उल्लंघन ने सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर अब यह मांग तेज हो गई है कि पुलिस प्रशासन इन वाहनों पर सख्ती बढ़ाए और चालानी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
इन नियमों की हो रही है अनदेखी
सड़कों पर दौड़ते वाहनों में कई ऐसी खामियां पाई जा रही हैं, जो सीधे तौर पर दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं:
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मनमानी: बिना लाइट और रिफ्लेक्टर के रात में सड़कों पर खड़े या चलते ट्रैक्टर बड़े हादसों का कारण बन रहे हैं।
दस्तावेजों का अभाव: बिना नंबर प्लेट, बीमा और वैध दस्तावेजों के बड़ी संख्या में वाहन सड़कों पर सक्रिय हैं।
नाबालिग चालक: शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक नाबालिगों द्वारा वाहन संचालन एक गंभीर समस्या बन चुका है।
ओवरलोडिंग: क्षमता से अधिक माल और सवारी ढोना अब आम हो गया है।
“कानून का भय ही अनुशासन की नींव”
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि जब तक पुलिस द्वारा प्रभावी चालानी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक सुधार की गुंजाइश कम है। मोटरयान अधिनियम, 1988 के तहत त्वरित कार्रवाई न केवल राजस्व की दृष्टि से, बल्कि लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।
यातायात पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण
जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए यातायात पुलिस छत्तीसगढ़ को सूचना संज्ञान लेकर विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है। कानून का कड़ाई से पालन होने पर ही सड़कें सुरक्षित हो सकेंगी और अव्यवस्थित यातायात को व्यवस्थित किया जा सकेगा।
मुख्य मांग: प्रशासन बिना रिफ्लेक्टर वाले ट्रैक्टरों और ओवरलोड वाहनों पर विशेष नजर रखे, ताकि रात के समय होने वाली जानलेवा भिड़ंत को रोका जा सके।






