विद्यालय बना ‘मदिरालय’! नशे में चूर शिक्षक दादूराम बैगा पर गंभीर आरोप, बच्चों का भविष्य संकट में

एमसीबी/ भरतपुर।

शिक्षा के मंदिर को कुछ लोग मंदिर नहीं, मदिरालय बना रहे हैं—और इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है भरतपुर ब्लॉक के दूरस्थ वनांचल ग्राम ठोरगी की प्राथमिक शाला। महज 14–15 घरों और लगभग 100 की आबादी वाले इस छोटे से गांव की यह शाला आज गंभीर शिक्षा संकट का केंद्र बन चुकी है। स्कूल में पदस्थ प्रधानपाठक दादूराम बैगा पर ग्रामीणों ने ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्हें सुनकर हर अभिभावक का मन झकझोर उठे।

 

स्कूल में ही पीते, सोते और खाना बनाते… शिक्षा कहाँ?

ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक दादूराम बैगा का अधिकतर समय शराब के नशे में स्कूल परिसर में ही बितता है। वे स्कूल को अपना निजी आवास बनाकर वहीं सोते, खाना बनाते और नशा करते हैं। नतीजतन बच्चों की पढ़ाई बिल्कुल ठप्प पड़ गई है।

ग्रामवासी हुबलाल सिंह ने बताया—

“हमने कहा था कि 5वीं तक बच्चों को मन लगाकर पढ़ा दो, आगे हम संभाल लेंगे। पर गुरुजी दारू पीते हैं और कहते हैं—‘अपने आप पढ़ लो।’ बच्चे बताते हैं कि गुरुजी रोज स्कूल में ही दारू पीकर बैठे रहते हैं। ऐसे में पढ़ाई कैसे होगी?”

शराब की बदबू में पढ़ते मासूम बच्चे
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रामकली की पुष्टि और भी गंभीर तस्वीर पेश करती है—
“शाम को भी पी लेते हैं, रात को भी। कहीं और कमरा नहीं लिया है, स्कूल ही ठिकाना बना लिया है।”
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे रोज शिक्षक के नशे की बदबू और व्यवहार को देख रहे हैं, जिससे उन पर गलत असर पड़ रहा है।
मिड-डे मील में भी अनियमितता—बच्चों को परोसा जा रहा खराब चावल
शिक्षक पर केवल शराबखोरी ही नहीं, मिड-डे मील में खराब चावल देने के भी आरोप लगे हैं।
जब प्रधानपाठक बैगा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा—
“चावल खराब नहीं है, बस पानी गिर गया था। धोकर दे रहे हैं।”
पर बच्चों ने उनके दावे की पोल खोल दी।
छात्र बी.एल. सिंह ने बताया—
“हम वही चावल खाते हैं जो गंदा है। बस साफ कर देते हैं।”
छात्र अजीत कुमार सिंह ने कहा—
“गुरुजी रोज शाम को दारू पीकर कुर्सी में पलथी मारकर बैठ जाते हैं। चावल खराब ही मिलता है।”
विद्यालय की हालत दयनीय—बच्चे बुनियादी ज्ञान से भी वंचित
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक की लापरवाही ने बच्चों की पढ़ाई का पूरा ढांचा चौपट कर दिया है।
कक्षा के अनुरूप बच्चों को बुनियादी जानकारी तक नहीं है।
गुस्से में उपसरपंच—“गुरुजी पढ़ाने के लिए हैं, शराब पीने के लिए नहीं”
उपसरपंच चंद्र प्रताप सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा—
“बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। ऐसे शिक्षक को तुरंत हटाया जाए और स्कूल की व्यवस्था सुधारी जाए।”
प्रशासन की अनदेखी पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से शिकायत कर रहे हैं, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
“यदि अधिकारी एक बार भी मौके पर आ जाएं, तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। स्कूल में पढ़ाई नहीं, सिर्फ शराब की बदबू मिलती है,” ग्रामीणों ने कहा।
BEO का बयान—शिकायत मिली, जांच के निर्देश
विकासखंड शिक्षा अधिकारी सच्चिदानंद साहू ने कहा—
“शिकायत मिली है। जांच के निर्देश दिए गए हैं। आरोप सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।”
अब ग्रामीणों को कार्रवाई की उम्मीद

गांव के लोग अब प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इस बार भी सिर्फ जांच का आश्वासन मिला और वास्तविक कार्रवाई नहीं हुई, तो बच्चों का भविष्य अंधकार में डूबता रहेगा।

गांव की आवाज साफ है—“शिक्षक चाहिए, मदिराधारी नहीं। शिक्षा चाहिए, नशा नहीं। बच्चों का भविष्य बचाओ।”

 

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