
✍️ भागीरथी यादव
मेरठ। सरधना क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पैसों की लालच और पड़ोसी से रंजिश के चलते एक महिला ने अपने ही 10 वर्षीय बेटे के अपहरण का नाटकीय षड्यंत्र रच डाला। पुलिस और सर्विलांस टीम की सघन जांच के बाद घटना का पर्दाफाश हुआ और आरोपी मां सोनिया तथा उसके सहयोगी संजय को गिरफ्तार कर लिया गया। बच्चा नोएडा से सकुशल बरामद कर पुलिस ने राहत की सांस ली।
शिकायत भी खुद दर्ज कराई, कहानी भी खुद गढ़ी
दबथुआ गांव निवासी सोनिया ने गुरुवार को पुलिस के पास बेटे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। उसने पड़ोसी मोहित, रोहित, सतेंद्र उर्फ सहेन्द्री और सुभाष पर बच्चे के अपहरण का गंभीर आरोप लगाया। मामला गंभीर था, इसलिए पुलिस ने तुरंत तीन टीमों का गठन किया और सर्विलांस की मदद से जांच शुरू कर दी।
संदेह की सूई सोनिया पर घूमी, CCTV बंद और संदिग्ध कॉल्स से मिला सुराग
जांच आगे बढ़ी तो कई तथ्य संदिग्ध मिलते गए।
सोनिया के घर के CCTV कैमरे घटना से ठीक पहले बंद पाए गए।
उसके मोबाइल पर लगातार संदिग्ध नंबरों से बातचीत के प्रमाण मिले।
फोन सर्विलांस से खुलासा हुआ कि घटना के समय बच्चा गांव में नहीं, बल्कि नोएडा में था।
पुलिस टीमें तुरंत नोएडा रवाना हुईं और वहां से बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया।
पड़ोसी पर दबाव बनाने का नया हथकंडा
पुलिस जांच में सामने आया कि सोनिया की अपने पहले पति से अनबन थी और वह वर्षों मायके में रह रही थी। गांव लौटने के बाद वह अपने पड़ोसी मोहित से शादी के लिए दबाव बना रही थी। मोहित के इनकार करने पर महिला ने उससे 1 लाख रुपये मांगे और भुगतान न होने पर उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज करा दिया।
पुलिस के अनुसार, बाद में पैसे मिलने पर महिला ने अदालत में बयान बदल दिया।
बदला और पैसे: एक और साजिश
जब मोहित और उसके परिवार ने फिर पैसे देने से इनकार किया, तो सोनिया ने अपने सहयोगी संजय के साथ मिलकर बेटे को नोएडा भेज दिया और चार युवकों को फंसाने के लिए नया अपहरण ड्रामा खड़ा कर दिया।
योजना थी कि आरोप लगाकर फिर परिवारों पर पैसे के लिए दबाव बनाया जाए।
दोनों आरोपी गिरफ्तार, रंगदारी व षड्यंत्र की धाराओं में केस दर्ज
सोनिया और संजय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
मोहित की मां की तहरीर पर दोनों के खिलाफ रंगदारी, षड्यंत्र और फर्जी मामला दर्ज कराने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस की सतर्कता ने बचाई मासूम की जिंदगी
पुलिस और सर्विलांस टीम की सूझबूझ ने न सिर्फ एक बड़ा षड्यंत्र उजागर किया, बल्कि एक मासूम बच्चे को वक्त रहते बचा लिया।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि झूठी शिकायतें न केवल कानून का दुरुपयोग हैं, बल्कि समाज में निर्दोषों के जीवन को भी गहरा नुकसान पहुंचाती हैं।








