
✍️ भागीरथी यादव
बिलासपुर – कोटा थाना क्षेत्र के घोरामार गांव में युवक धीरज साहू की हत्या के रहस्य से पुलिस ने मात्र तीन दिनों में पर्दा उठा दिया। 30 नवंबर की रात अपने पोल्ट्री फार्म में सोने गए धीरज की अचानक हुई गुमशुदगी ने परिवार को चिंता में डाल दिया था। अगले दिन उसका मोबाइल बंद मिला और कोई सुराग हाथ नहीं लगा। 1 दिसंबर को परिजनों ने कोटा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
7 दिसंबर—तालाब में मिला शव, खुला हत्या का राज
लगातार खोजबीन के बीच 7 दिसंबर को घोरामार के बांधा तालाब में एक युवक का शव संदिग्ध हालत में तैरता मिला, जिसकी पहचान धीरज साहू के रूप में हुई। पोस्टमार्टम में हत्या की पुष्टि होते ही पुलिस ने मर्ग को हत्या में बदलकर जांच तेज कर दी।
सीसीटीवी से लेकर मोबाइल डेटा तक—जांच में जुटी पुलिस
जांच दल ने क्षेत्रभर के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले, हजारों मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया और धीरज के परिजनों व परिचितों से गहन पूछताछ की। इसी दौरान दो नाम लगातार संदेह के घेरे में आए—अनिल साहू और जगन्नाथ उर्फ अंगद साहू। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया।
एक साल पुरानी रंजिश बनी मौत की वजह
पुलिस के अनुसार मृतक और आरोपी अनिल साहू के बीच करीब एक वर्ष से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश को खत्म करने के लिए दोनों आरोपियों ने धीरज की हत्या की योजना बनाई।
ऐसे रची गई वारदात की पटकथा
30 नवंबर की रात करीब 11:30 बजे आरोपी धीरज के पोल्ट्री फार्म के पास पहुंचे। मोटर पंप निकालने का बहाना बनाकर उसे बाहर बुलाया और चाकू से बेरहमी से हत्या कर दी। पहचान छुपाने के लिए शव में पत्थर बांधकर बांधा तालाब में फेंक दिया। वहीं वारदात में उपयोग किए गए चाकू, कपड़े और मोबाइल फोन को कोरी डेम में ठिकाने लगा दिया।

हत्या का खुलासा, आरोपियों के सपने सलाखों के पीछे
तकनीकी साक्ष्यों, फील्ड इन्वेस्टिगेशन और आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए पुलिस ने तीन दिनों के भीतर पूरा मामला सुलझा लिया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
इस तेज कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ठोस रणनीति, तकनीकी दक्षता और सतत मॉनिटरिंग किसी भी जघन्य अपराध को सुलझाने की कुंजी है।






