
छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिज़र्व से वन्यजीव संरक्षण को लेकर उत्साहजनक खबर मिली है। राज्य में पहली बार स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव (Lutrogale perspicillata) की फोटोग्राफिक पुष्टि हुई है। यह जानकारी हाल ही में IUCN Otter Specialist Group Bulletin में प्रकाशित शोध पत्र में सामने आई।
नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी की शोधकर्ता टीम — म. सुरज, मोइज़ अहमद, आलोक कुमार साहू, कृष्णेंदु बसाक और मयंक बागची — ने डिप्टी डायरेक्टर श्री संदीप बल्गा के मार्गदर्शन में इंद्रावती नदी के 15 किलोमीटर क्षेत्र में तीन महीने सर्वे कर यह सफलता हासिल की। स्थानीय ग्रामीणों की जानकारी ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव एशिया की एक संकटग्रस्त प्रजाति है, जिसे भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची–I में शामिल किया गया है। यह नदी-पर्यावरण के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
इस खोज के साथ छत्तीसगढ़ अब उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जहां ऊदबिलाव की तीनों भारतीय प्रजातियाँ — स्मूथ-कोटेड, एशियाई स्मॉल-क्लॉड और यूरेशियन — पाई जाती हैं।
वन विभाग ने कहा है कि इस दुर्लभ प्रजाति की उपस्थिति के बाद संरक्षण प्रयास और मजबूत किए जाएंगे। शोधकर्ताओं ने भी इंद्रावती–गोदावरी नदी तंत्र में बड़े स्तर पर सर्वे और जागरूकता अभियान की आवश्यकता पर बल दिया है।






