
✍️ भागीरथी यादव
नई दिल्ली।
देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर केंद्रीय और राज्य औषधि नियामक संस्थान सख्त रुख अपनाए हुए हैं। इसी क्रम में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने अक्टूबर 2025 की गुणवत्ता रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 63 दवा नमूनों को मानक के अनुरूप न पाने की पुष्टि की है। वहीं राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 148 नमूनों को NSQ (Not of Standard Quality) श्रेणी में रखा है। यानी कुल 211 दवा नमूने गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए।
CDSCO ने स्पष्ट किया है कि किसी दवा का NSQ पाया जाना केवल उसके एक विशेष बैच तक सीमित होता है। इससे उसी दवा के अन्य बैचों या ब्रांडों की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। नियामक संस्थान नियमित रूप से बैच-वार सैंपल लेकर जांच करता है, ताकि बाजार में सुरक्षित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बिहार से तीन और दिल्ली से दो दवा नमूने स्प्यूरियस (नकली/संदिग्ध) पाए गए हैं। जांच में सामने आया कि ये दवाएं अनधिकृत निर्माताओं द्वारा तैयार की गई थीं, जिन्होंने नामी कंपनियों के ब्रांड नाम का दुरुपयोग किया। मामला गंभीर होने के कारण इसे उच्च-स्तरीय जांच के लिए भेज दिया गया है तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
नियामकों ने कहा कि देशभर में औषधि निरीक्षण को और कठोर किया जा रहा है, ताकि बाजार से निम्न गुणवत्ता और नकली दवाओं को तुरंत हटाया जा सके। यह कदम जनता के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने और दवा आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
CDSCO और राज्यों की सक्रियता यह संकेत देती है कि देश की औषधि नियामक प्रणाली लगातार मजबूत हो रही है और सरकार गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करने के लिए प्रतिबद्ध है।








