
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा (छत्तीसगढ़):
कोरबा जिले के पासरखेत गांव में शुक्रवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ग्रामीणों ने करीब 13 फीट लंबे विशालकाय किंग कोबरा को देखा। अचानक इतने बड़े विषधर सांप के दिखाई देने से लोगों में दहशत फैल गई और मौके पर भारी भीड़ एकत्रित हो गई।
घटना की सूचना तत्काल वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की टीम को दी गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यूअर जितेंद्र सारथी ने मामले की जानकारी डीएफओ श्रीमती प्रेमलता यादव को दी। उनके निर्देश और एसडीओ श्री आशीष खेलवार एवं एसडीओ श्री सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में जितेंद्र सारथी अपनी टीम — एम. सूरज, सिद्धांत जैन और बबलू मारवा के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे।
गांव पहुंचने के बाद टीम ने पहले ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर किया और तय प्रोटोकॉल के अनुसार रेस्क्यू अभियान शुरू किया। लगभग डेढ़ घंटे तक चले इस अभियान में किंग कोबरा बार-बार फुफकारता रहा और अपना रौद्र रूप दिखाता रहा, लेकिन रेस्क्यू टीम ने धैर्यपूर्वक और सावधानी से कार्य करते हुए अंततः उसे सुरक्षित थैले में पकड़ने में सफलता प्राप्त की।
रेस्क्यू के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी देवदत्त खांडे की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किया गया और किंग कोबरा को उसके प्राकृतिक आवास के घने जंगल में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
इस मौके पर नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष एम. सूरज, सिद्धांत जैन, बबलू मारवा, संतोष कुमार यादव, चनेश राठिया, खगेश यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
डीएफओ श्रीमती प्रेमलता यादव ने आमजनों से अपील की है कि किंग कोबरा, जिसे स्थानीय भाषा में “पहाड़ चित्ती” कहा जाता है, वन्यप्राणी (संरक्षण) अधिनियम-1972 के तहत वर्ग-1 संरक्षित प्रजाति में शामिल है। इसे मारना या नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है। यदि किसी क्षेत्र में सांप दिखाई दे तो लोग तत्काल वन विभाग को या टोल फ्री नंबर 8817534455 पर सूचना दें।
किंग कोबरा दुनिया का सबसे लंबा विषधर सांप है, जिसकी लंबाई 20 फीट तक हो सकती है। यह अन्य सांपों को खाकर पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखता है। उल्लेखनीय है कि यह एकमात्र सांप है जिसकी मादा अपने अंडों के लिए पत्तों से घोंसला बनाती है और तीन माह तक उसकी रक्षा करती है — यह इसकी मातृत्व प्रवृत्ति की अनूठी मिसाल है।
विशेषज्ञों के अनुसार किंग कोबरा सामान्यतः मनुष्य पर हमला नहीं करता, केवल खतरा महसूस होने पर ही आक्रामक होता है। इसलिए ऐसी स्थिति में सांप को मारने के बजाय वन विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
कोरबा वन मंडल और नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी लगातार जनजागरूकता और रेस्क्यू अभियानों के माध्यम से यह संदेश दे रही हैं कि —
👉 “इंसान और सांप का सह-अस्तित्व ही संरक्षण की दिशा में सबसे बड़ी पहल है।”





