“पोटा केबिन-छात्रावास का औचक निरीक्षण, मूलभूत सुविधाओं पर प्रशासन सख्त”

 

लोकसदान।  भोजन,शयनकक्ष से लेकर मेस पंजी तक की गहन जांच,संवाद कर जानी बच्चों की समस्याएं। 

सुकमा :- कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देश पर शनिवार को कोंटा विकासखंड स्थित पोटा केबिनों एवं आरएमएसए छात्रावासों का औचक निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण का नेतृत्व डिप्टी कलेक्टर सुश्री निधि प्रधान ने किया,जिनके साथ एपीसी आशीष राम एवं बीआरसी वीरभद्र राव मौजूद रहे। प्रशासनिक दल ने पैदाकुरती,एर्राबोर,कोंटा एवं मरईगुड़ा के पोटा केबिनों का दौरा कर बच्चों की मूलभूत सुविधाओं का बारीकी से परीक्षण किया।

भोजन और रहने की व्यवस्था की गहन पड़ताल निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बच्चों के भोजन,शयनकक्ष,किचन और मेस हॉल की व्यवस्था का जायजा लिया। भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता पर विशेष ध्यान देते हुए चखना पंजी एवं मेस पंजी का भी परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि बच्चों को संतुलित एवं स्वच्छ भोजन मिले।

भवन,कक्ष और शौचालय की स्थिति पर फोकस डिप्टी कलेक्टर ने छात्रावास भवन की स्थिति का अवलोकन किया और आवश्यक मरम्मत कार्यों पर जोर दिया। निरीक्षण में अतिरिक्त कक्षों की कमी,शौचालयों की साफ-सफाई एवं बाउंड्री वॉल की आवश्यकता पर विशेष चर्चा की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बुनियादी सुविधाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।

 

शिक्षक और अनुदेशकों की उपस्थिति पर निगरानी

निरीक्षण के दौरान शिक्षक एवं अनुदेशकों की उपस्थिति पंजी का अवलोकन कर नियमितता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों की पढ़ाई और अनुशासन को प्राथमिकता दी जाए,साथ ही अनुपस्थिति पर सख्ती से कार्रवाई की जाए।

 

बच्चों और शिक्षकों से संवाद कर जानी समस्याएं

निरीक्षण दल ने बच्चों,शिक्षकों और अनुदेशकों से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों और समस्याओं की जानकारी ली। बच्चों ने साफ-सफाई, खेल सामग्री और अतिरिक्त गतिविधियों की मांग रखी। अधिकारियों ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और उचित समाधान का आश्वासन दिया।

कलेक्टर ने दी सख्त चेतावनी कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बच्चों की सुरक्षा,सुविधा और गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि “पोटा केबिन और छात्रावास हमारे नौनिहालों के भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए यहां की व्यवस्थाएं उत्कृष्ट और अनुकरणीय होनी चाहिए।”

 

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