
✍️ भागीरथी यादव
पटना।
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जहां विदेश दौरे पर हैं, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर सियासी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी में इस्तीफों की झड़ी लगी हुई है और एक के बाद एक बड़े चेहरे राजद का साथ छोड़ते जा रहे हैं।
इसी कड़ी में पूर्व डीजी अशोक कुमार गुप्ता ने राजद को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने प्रदेश राजद बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। अशोक कुमार गुप्ता ने अपना त्यागपत्र प्रदेश राजद अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को भेजा है।
“राजद में कार्यकर्ताओं का कोई सम्मान नहीं”
इस्तीफे के बाद अशोक कुमार गुप्ता ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राजद में कार्यकर्ताओं का कोई मान-सम्मान नहीं है।
उन्होंने कहा,
“छोटे कार्यकर्ताओं की बात तो दूर, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी कार्यकर्ताओं की अनदेखी करता है। अन्य राजनीतिक दलों में कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलता है, लेकिन राजद में ऐसी कोई संस्कृति नहीं दिखती।”
अशोक गुप्ता ने पार्टी के ए-टू-जेड और सामाजिक न्याय के नारों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ये नारे सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं, जबकि टिकट वितरण के समय इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है।
नई राजनीतिक पारी के संकेत
अशोक कुमार गुप्ता ने संकेत दिए हैं कि वे अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत किस दल से करेंगे, इसका फैसला खरमास के बाद लिया जाएगा। उनके इस बयान से बिहार की राजनीति में अटकलों का दौर तेज हो गया है।
पहले भी झटके झेल चुकी है राजद
गौरतलब है कि इससे पहले राजद के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद विजय कृष्ण भी पार्टी छोड़ चुके हैं। बिहार सरकार में कई बार मंत्री रह चुके 74 वर्षीय विजय कृष्ण ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर दलगत और सक्रिय राजनीति से अलग होने की घोषणा की थी। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया था।

तेजस्वी विदेश में, पार्टी में संकट
एक तरफ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विदेश दौरे पर हैं, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। लगातार हो रहे इस्तीफे यह संकेत दे रहे हैं कि चुनावी हार के बाद राजद में आंतरिक संकट गहराता जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि यही सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में राजद को और भी बड़े सियासी झटकों का सामना करना पड़ सकता है।








