
✍️ भागीरथी यादव
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व।
अवैध शिकार के फंदे में फंसा एक गंभीर रूप से घायल तेंदुआ यदि समय पर पकड़ा नहीं जाता, तो ग्रामीण क्षेत्र में बड़ा हादसा हो सकता था। यह घटना 25 दिसंबर 2025 की है, जब तौरेंगा बफर क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी में तेंदुआ आबादी के बेहद नजदीक देखा गया।
दोपहर करीब 2 बजे मिली सूचना के बाद वन विभाग हरकत में आया। सहायक संचालक गोपाल कश्यप के नेतृत्व में एंटी-पोचिंग टीम मौके पर पहुंची। ड्रोन से निगरानी की गई, लेकिन घनी झाड़ियों के कारण तेंदुए की सटीक लोकेशन और मूवमेंट पर नजर रखना मुश्किल हो गया। ड्रोन फुटेज में तेंदुए के गले पर गहरे जख्म के संकेत मिले, जिससे उसकी आक्रामकता का खतरा और बढ़ गया।
ग्रामीणों और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए एसडीओ गोपाल कश्यप ने बिना देर किए स्वयं मोर्चा संभाला। उन्होंने रस्सी का जाल लेकर घायल तेंदुए को काबू में किया। इस दौरान तेंदुए ने उन पर हमला करने की कोशिश भी की, लेकिन सतर्कता और साहस से स्थिति नियंत्रित कर ली गई।
रेस्क्यू के बाद तेंदुए को पिंजरे में रखकर आबादी से दूर तौरेंगा रेस्ट हाउस लाया गया। शाम 8 बजे जंगल सफारी से पहुंचे डॉक्टर जय किशोर जड़िया और उनकी टीम ने उसे बेहोश कर उपचार शुरू किया। जांच में पता चला कि तेंदुए के गले में दो स्टील वायर के फंदे फंसे थे, जो लगभग एक सप्ताह से लगे थे।
लंबे समय से घायल रहने के कारण तेंदुआ आसान शिकार की तलाश में गांव की ओर बढ़ रहा था और पहले ही एक कुत्ते का शिकार कर चुका था। उपचार के बाद तेंदुए की हालत में सुधार हुआ और उसे तड़के सुबह 4 बजे जंगल सफारी अस्पताल में शिफ्ट किया गया।
वन विभाग के अनुसार अवैध शिकार की गतिविधियों के कारण वन्यजीवों और मानव के बीच टकराव बढ़ रहा है। बीते एक सप्ताह में 19 शिकारियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। सांभर के शिकार, मोर को कैद में रखने, जंगल में आग लगाने जैसे मामलों में लगातार कार्रवाई हो रही है।
कम संसाधनों के बावजूद टाइगर रिजर्व की टीम पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। विभाग ने साफ किया है कि अवैध शिकार से जुड़े इलाकों में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी






