
सुशील जायसवाल
कोरबा | पोड़ी उपरोड़ा
जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में प्रस्तावित रांगटा कोल माइंस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आदिवासी समुदाय का जनआंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। बीजाडांड़ में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोगपा) के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन आज 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है, और इसका दायरा लगातार फैलता जा रहा है।
अब यह आंदोलन केवल बीजाडांड़ तक सीमित नहीं रहा। रामपुर, लोकडाढ़ा, सुखहर्रा, लेंग, सासिन सहित आसपास के कई गांवों में भी विरोध की चिंगारी भड़क चुकी है। बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण अपने हक और अस्तित्व की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे प्रशासनिक अमला भी सतर्क हो गया है।
आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जिस क्षेत्र में कोल माइंस प्रस्तावित है, वह पूरी तरह आदिवासी बहुल क्षेत्र है। खनन परियोजना को मंजूरी मिलने की स्थिति में सैकड़ों आदिवासी परिवारों के विस्थापित होने, उनकी खेती योग्य जमीन, जंगल, जलस्रोत और पारंपरिक जीवनशैली के समाप्त होने का खतरा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खनन प्रस्ताव ग्रामसभा की सहमति के बिना और आदिवासी समाज को विश्वास में लिए बिना आगे बढ़ाया गया है, जो पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम और संविधान के मूल प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।
धरना स्थल पर रोजाना नारेबाजी, जनसभाएं और रणनीतिक बैठकों का सिलसिला जारी है। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन और जंगल नहीं छोड़ेंगे। यदि प्रशासन और सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल लगातार निगरानी बनाए हुए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान या वार्ता का रास्ता नहीं निकल पाया है।
यह आंदोलन अब केवल एक खनन परियोजना के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आदिवासी अधिकार, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक सम्मान की लड़ाई बन चुका है।








