विकास कार्यों का उद्देश्य केवल निर्माण नहीं, जनसहमति और सामाजिक सौहार्द्र भी ज़रूरी

पाली से ज्ञान शंकर तिवारी की रिपोर्ट

 

पाली। विकास का रास्ता तभी सार्थक माना जा सकता है जब वह जनभावनाओं, सामूहिक सहमति और सामाजिक समरसता के साथ आगे बढ़े। किंतु ग्राम पंचायत नानपुलाली के आश्रित मोहल्ला नवापारा में प्रस्तावित आंगनवाड़ी भवन के निर्माण को लेकर जो विवाद सामने आ रहा है, उसने न केवल जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि गांव की सामाजिक एकता पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनवाड़ी भवन के निर्माण स्थल का चयन बिना सामूहिक सहमति के किया गया है। उनका कहना है कि यह स्थान विवादास्पद और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील है, जिससे गांव के आपसी भाईचारे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों ने सरपंच पर तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

 

ग्रामवासियों ने कहा कि चुनाव के दौरान प्रत्याशी खुद को जनसेवक बताते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद जनता की भावनाओं को दरकिनार कर एकतरफा फैसले लेते हैं। नानपुलाली में भी यही परिदृश्य देखने को मिल रहा है, जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी हो रही है।

 

ग्रामीणों ने पहले जनपद पंचायत पाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा, तत्पश्चात जिला कलेक्टर, जिला पंचायत अध्यक्ष और अंततः क्षेत्रीय विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम को भी अपनी शिकायत से अवगत कराया। चूंकि गांव और विधायक दोनों ही आदिवासी समुदाय से आते हैं, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विधायक अपने समाज के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं या फिर सत्ता की चुप्पी ओढ़ लेते हैं।

 

ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि आंगनवाड़ी भवन का निर्माण वैकल्पिक और विवादरहित स्थान पर सामूहिक सहमति से कराया जाए। साथ ही, पंचायत के एकतरफा निर्णयों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और गांव में सामाजिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए प्रशासन सक्रिय हस्तक्षेप करे।

 

ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों का अर्थ केवल ईंट-पत्थर से इमारत खड़ी करना नहीं है, बल्कि यह वह प्रक्रिया है जो समुदाय को जोड़ती है, न कि तोड़ती है। ज्ञापन सौंपने के इस शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ प्रयास में गांव की महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।

 

यह स्पष्ट संकेत है कि यह केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि जनजीवन से जुड़ा सामाजिक प्रश्न है, जिसे अनदेखा करना भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है। अब यह देखना शेष है कि विधायक तुलेश्वर मरकाम क्या इस विवाद को सुलझाकर गांव में सौहार्द्र और समाधान की राह प्रशस्त करते हैं या यह मामला भी प्रशासनिक निष्क्रियता और राजनीतिक असंवेदनशीलता की भेंट चढ़ जाता है — यह तो आने वाला समय बताएगा।

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