
✍️ भागीरथी यादव
रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती के नतीजों ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। चयन सूची सामने आते ही अनियमितताओं के आरोप लगने लगे और सैकड़ों अभ्यर्थी न्याय की गुहार लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गए। युवाओं का कहना है कि कई जिलों में ज्यादा अंक लाने वाले उम्मीदवार बाहर रह गए, जबकि कम नंबर वालों को चयनित कर लिया गया। बढ़ते विवाद ने अब सरकार को सीधे मोर्चा संभालने पर मजबूर कर दिया है।

अब छिपेगा नहीं कोई नंबर
भर्ती को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गृहमंत्री विजय शर्मा ने बड़ा एलान किया है। अब पुलिस आरक्षक भर्ती के नतीजे हर जिले में QR कोड के जरिए सार्वजनिक किए जाएंगे। एक स्कैन में अभ्यर्थी अपने अंक, मेरिट रैंक, वर्गवार चयन सूची और वेटिंग लिस्ट तक पहुंच सकेंगे। सरकार का दावा है कि इससे पूरी प्रक्रिया ‘शीशे की तरह साफ’ हो जाएगी।
गृहमंत्री ने कहा कि कांस्टेबल भर्ती को पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित किया गया है। हर जिले की अलग-अलग मेरिट लिस्ट उपलब्ध है, जिसे कोई भी अभ्यर्थी देख सकता है।
जिलों में चल रही शिकायतों की खुली सुनवाई
सरकार ने अभ्यर्थियों की नाराजगी को देखते हुए जिलास्तर पर शिकायतों की सुनवाई शुरू कर दी है। गृहमंत्री के मुताबिक, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक लगातार बैठकें कर युवाओं की आपत्तियां सुन रहे हैं। यह प्रक्रिया अभी तीन दिन और जारी रहेगी।
19–20 दिसंबर को पीएचक्यू में बड़ा फैसला
एडीजी एसआरपी कल्लूरी ने बताया कि 19 और 20 दिसंबर को पुलिस मुख्यालय में भर्ती से जुड़ी शिकायतों की औपचारिक सुनवाई होगी। सभी जिलों की मेरिट सूची तैयार कर ली गई है और QR कोड के माध्यम से नंबर सार्वजनिक किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि हेल्प डेस्क, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य माध्यमों से अभ्यर्थियों की शंकाएं दूर की जा रही हैं।
21 दिसंबर को गृहमंत्री से आमने-सामने
विवाद के बीच 21 दिसंबर को गृहमंत्री विजय शर्मा खुद मोर्चा संभालेंगे। वे रायपुर स्थित अपने सिविल लाइन निवास में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जनसुनवाई करेंगे। जो अभ्यर्थी रायपुर नहीं पहुंच पाएंगे, वे अपने जिले के एसपी कार्यालय से ऑनलाइन जुड़ सकेंगे।
गृहमंत्री ने कहा कि 6 हजार पदों की इस भर्ती में पुलिस विभाग ने पूरी ईमानदारी से काम किया है। युवाओं से धैर्य रखने की अपील करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर गंभीरता से विचार होगा।
6000 पद, 7 लाख दावेदार
एडीजी कल्लूरी के मुताबिक, 6000 आरक्षक पदों के लिए करीब 7 लाख आवेदन आए थे। भर्ती प्रक्रिया को ‘टीआरपी’ यानी ट्रांसपेरेंट रिक्रूटमेंट प्रोसेस नाम दिया गया है। सरकार का कहना है कि सभी आपत्तियों के निपटारे के बाद जल्द ही अंतिम स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी।
अब देखना होगा कि QR कोड और सीधी जनसुनवाई के बाद युवाओं का भरोसा लौटता है या आरक्षक भर्ती का विवाद और तेज होता है।






