सुशील जायसवाल
बीजा डांड/पोड़ी उपरोड़ा (28 फरवरी, 2026): पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक और पसान तहसील के अंतर्गत ग्राम बीजा डांड में रुंगटा माइंस के खिलाफ पिछले डेढ़ माह से चल रहा धरना आज एक नया मोड़ ले लिया। शनिवार को एसईसीएल (SECL) रानी अटारी के सब एरिया मैनेजर जादू मनी साहू और महिला मंडल की टीम ग्रामीणों को मनाने और लुभाने के लिए उपहारों के साथ पहुंची थी, जिसे प्रदर्शनकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया।
लोकलुभावन उपहारों का विरोध
‘तिरिया जंगल बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले जारी इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच एसईसीएल प्रबंधन और चिरमिरी की ‘श्रद्धा एवं संपदा महिला मंडल’ की टीम वहां पहुंची। होली मिलन समारोह के नाम पर ग्रामीणों को आकर्षित करने के लिए साड़ियां, पेटीकोट, बच्चों के लिए फ्रॉक, रंग-गुलाल और स्वल्पाहार वितरण करने का प्रयास किया गया।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सामग्री लेने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि:
एसईसीएल द्वारा गोद लिए गए गांवों में सालों से न सड़क है, न बिजली और न ही स्वच्छ पानी।
ग्रामीण आज भी खदानों का ‘काला पानी’ पीने को मजबूर हैं।
रोजगार और विकास के नाम पर प्रबंधन ने हमेशा उपेक्षा की है।
जब ग्रामीणों ने दबाव के बावजूद सामग्री स्वीकार नहीं की, तो सब एरिया मैनेजर और महिला मंडल की टीम को अपना सामान समेटकर वापस लौटना पड़ा।
अब आर-पार की लड़ाई: उग्र आंदोलन का ऐलान
इस घटनाक्रम के बाद गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोगपा) के जिला अध्यक्ष और क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य विद्वान सिंह मरकाम तत्काल धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के संकल्प का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि अब यह लड़ाई और तेज होगी।
“प्रबंधन उपहारों के जरिए जन भावनाओं को दबाना चाहता है। अब रुंगटा कोल माइंस को निरस्त कराने और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए हम पीछे नहीं हटेंगे। रणनीति तैयार है, अब उग्र आंदोलन होगा।”
— विद्वान सिंह मरकाम, जिला अध्यक्ष (गोगपा)
बैठक में उपस्थित प्रमुख चेहरा
धरना स्थल पर आयोजित बैठक में आंदोलन की अगली रूपरेखा तैयार की गई। इस दौरान मुख्य रूप से उपस्थित थे:
संतोष मरावी (जनपद सदस्य)
दिनू आयम (जनपद सदस्य एवं गोगपा ब्लॉक अध्यक्ष, पसान)
मनोज मरावी, दिनेश केराम, सुरेंद्र कुमार पावले सहित भारी संख्या में ग्रामवासी और पार्टी पदाधिकारी।
निष्कर्ष: डेढ़ महीने से जारी यह शांतिपूर्ण हड़ताल अब प्रशासन और प्रबंधन की बेरुखी के चलते बड़े जन-आंदोलन की ओर बढ़ रही है। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि दिखावटी विकास के बजाय उनकी जमीन और जंगल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।






