
✍️ भागीरथी यादव
रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राजधानी रायपुर में मानवता और सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। सेना के चीफ ऑफ स्टाफ आर्मी वाइव्स एसोसिएशन (COSA) द्वारा एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की सशक्त भागीदारी को रेखांकित करना रहा।
कार्यक्रम का संचालन COSA के परिवार कल्याण संगठन (FWO) की वरिष्ठ निदेशक श्रीमती कुकी बावा के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर में भारतीय सेना के जवानों, उनकी वीर पत्नियों और एनसीसी (NCC) कैडेटों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। समाज के प्रति उनकी सेवा भावना और जिम्मेदारी इस आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
शिविर का आयोजन श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल के तकनीकी सहयोग से किया गया, जहां सुबह से ही रक्तदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एम्स (AIIMS) रायपुर के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) उपस्थित रहे। उन्होंने रक्तदान को सबसे बड़ा मानवीय दान बताते हुए कहा कि रक्तदान न केवल किसी का जीवन बचाता है, बल्कि समाज में एकजुटता और मानवता का संदेश भी देता है। उन्होंने सेना की इस पहल को नागरिक समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
इस अवसर पर विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले 50 रक्तदाताओं को श्रीमती कुकी बावा और लेफ्टिनेंट जनरल जिंदल द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का भावुक क्षण तब आया जब जन्मजात हृदय रोग (CHD) से जूझ रहे बच्चों को “गिफ्ट ऑफ लाइफ” प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। यह प्रमाण पत्र उनके सफल उपचार और उज्ज्वल भविष्य की आशा का प्रतीक बना।
यह आयोजन केवल रक्तदान शिविर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय सेना की सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भावना का भी प्रतीक बना। सैन्य अधिकारियों के अनुसार ऐसे कार्यक्रमों से सेना और नागरिक समाज के बीच समन्वय मजबूत होता है और युवाओं में परोपकार की भावना को बढ़ावा मिलता है।
इस सफल आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश सेवा के हर क्षेत्र में नारी शक्ति और सैन्य परिवार अग्रिम पंक्ति में खड़े रहते हैं।






