
सुशील जायसवाल
कोरबी/चोटिया। पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत घुंचापुर के आश्रित मोहल्ला सखोदा में आखिरकार 25 दिनों बाद बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। लंबे इंतजार के बाद बिजली लौटने से ग्रामीणों में खुशी की लहर है और लोगों ने राहत की सांस ली है।
दरअसल, बीते 26 मार्च को 11 केवी बिजली लाइन में करंट प्रवाहित होने से एक मादा भालू और उसके दो शावकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी, जिससे सखोदा गांव अंधेरे में डूब गया था। लगभग एक दर्जन घरों वाले इस आदिवासी बहुल मोहल्ले में पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत भी गंभीर संकट में आ गई थी और ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा था।
ग्रामीणों के अनुसार, यह इलाका हसदेव नदी डुबान क्षेत्र के किनारे घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहां बिंझवार जनजाति के लोग निवास करते हैं और खेती-किसानी पर निर्भर हैं। गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए करीब 25 किलोमीटर दूर से 11 केवी लाइन खींची गई है। आरोप है कि लाइन बिछाने के दौरान वन विभाग से आवश्यक अनुमति (NOC) नहीं ली गई थी, जिसका खामियाजा अब ग्रामीणों और वन्यजीवों दोनों को भुगतना पड़ा।
बिजली बंद रहने के दौरान ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। अंधेरे में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता था, वहीं यह क्षेत्र हाथी प्रभावित होने के कारण भय का माहौल भी बना रहा।
लगातार मांग और समस्या की गंभीरता को देखते हुए आखिरकार प्रशासन ने पहल की और बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। अब गांव के सभी घरों में लगे विद्युत मीटर फिर से चालू हो गए हैं और जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है।
ग्रामीणों ने इस पहल के लिए शासन-प्रशासन और मीडिया का आभार व्यक्त किया है।
