
✍️ भागीरथी यादव
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि किसी भी पद पर नियुक्ति या पदोन्नति के लिए आयु सीमा तय करना राज्य सरकार का अधिकार है। अदालत ने कहा कि यह नियम न तो मनमाना है और न ही संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है।
यह फैसला जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। मामला लीगल मेट्रोलॉजी विभाग से जुड़ा है, जहां राज्य सरकार ने इंस्पेक्टर के पद पर सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से पदोन्नति के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष (सामान्य वर्ग के लिए) और 50 वर्ष (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए) निर्धारित की थी।
रायपुर निवासी खोमिन नायक ने इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा कि वे सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थीं, परंतु आयु सीमा पार होने के कारण उन्हें परीक्षा से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों ने तर्क दिया कि भर्ती में आयु सीमा निर्धारित करना नियोक्ता का विशेषाधिकार है और यह नीति-निर्माण का विषय है। साथ ही बताया गया कि यह नियम सीधी भर्ती से संबंधित है, न कि सामान्य पदोन्नति से।
हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा —
> “पदोन्नति कोई निहित अधिकार नहीं है। सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी विशेष पद के लिए पात्रता एवं आयु सीमा तय करे। यह नियम उचित और तर्कसंगत है।”
इस फैसले के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, और राज्य सरकार की नीति को वैधानिक और संवैधानिक रूप से सही ठहराया।






