
✍️ भागीरथी यादव
25 वर्षों में कोरबा जिले में चार से बढ़कर हुईं 12 तहसीलें, प्रशासनिक दक्षता में आई उल्लेखनीय वृद्धि
कोरबा, 1 नवम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन वर्ष 2000 में कोरबा जिले में केवल चार तहसीलें — कोरबा, करतला, कटघोरा और पाली — कार्यरत थीं। सीमित प्रशासनिक ढांचे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपने राजस्व प्रकरणों के समाधान के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। संसाधनों की कमी और प्रकरणों की अधिकता के चलते न्याय में विलंब आम बात थी।
पिछले 25 वर्षों की विकास यात्रा में कोरबा जिले ने प्रशासनिक विस्तार और जनसुविधा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। बढ़ती जनसंख्या और ग्रामीण अंचलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने लगातार नई तहसीलों का गठन किया। आज कोरबा जिला प्रशासनिक रूप से सशक्त हो चुका है, जहां अब कुल 12 तहसीलें कार्यरत हैं — कोरबा, करतला, कटघोरा, पाली, पोड़ी-उपरोड़ा, अजगरबहार, भैसमा, बरपाली, दर्री, दीपका, हरदीबाजार और पसान।
नई तहसीलों के गठन वर्ष इस प्रकार हैं —
पोड़ी-उपरोड़ा (2008), हरदीबाजार (2020), दर्री (2020), अजगरबहार (2022), भैसमा (2022), बरपाली (2022), दीपका (2022) और पसान (2022)।
इन तहसीलों के गठन से न केवल ग्रामीणों की प्रशासनिक पहुंच आसान हुई है, बल्कि राजस्व मामलों के निपटारे में पारदर्शिता और गति भी आई है।
कलेक्टर श्री अजीत वसंत के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण को प्राथमिकता में रखा है। वे हर 15 दिनों में राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हैं, ताकि समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित हो सके।
📊 राजस्व प्रकरणों के निराकरण में उल्लेखनीय सुधार
राजस्व वर्ष 2023-24 में कुल 12,578 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 5,828 प्रकरणों का निराकरण किया गया। वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 16,565 प्रकरणों तक पहुंची, जिनमें से 12,642 प्रकरणों का सफल निराकरण किया गया — जो कि 76.31 प्रतिशत की उत्कृष्ट सफलता दर है।
यह उपलब्धि बताती है कि कोरबा जिले में प्रशासनिक दक्षता और सेवा गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ है।
🏠 स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिला आत्मनिर्भरता का अधिकार
स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक 9,114 अधिकार अभिलेखों का वितरण किया जा चुका है, जबकि 1 नवम्बर 2025 को 5,500 नए अधिकार अभिलेखों का वितरण किया जाएगा। यह पहल ग्रामीणों को उनके भूमि स्वामित्व का प्रमाणपत्र देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
🌾 जनता तक पहुंचा शासन, शासन तक पहुंची जनता की आवाज
यह 25 वर्षों की कहानी है बदलते कोरबा की — जहां शासन की पहुँच अब गांव-गांव तक है और जनता की आवाज सीधे शासन तक पहुंच रही है।
राजस्व प्रशासन के इस सुदृढ़ीकरण ने कोरबा को विकास और सुशासन की नई पहचान दी है।
आज आम नागरिकों को न केवल त्वरित सेवाएं मिल रही हैं, बल्कि प्रशासन पर विश्वास और पारदर्शिता की भावना भी मजबूत हुई है।






