
✍️ भागीरथी यादव
मुख्यधारा में वापसी की अपील से गूंजा पुनर्वास कार्यक्रम
रायपुर, 15 नवंबर 2025।
बीजापुर जेल परिसर शुक्रवार को एक ऐसे दृश्य का साक्षी बना, जिसने कठोर जेल दीवारों के बीच भी मानवीय संवेदनाओं को जीवंत कर दिया। छत्तीसगढ़ शासन की मानवीय और संवेदनशील पहल के तहत आयोजित विशेष मुलाक़ात कार्यक्रम में वर्षों से बिछड़े परिवार एक बार फिर आमने-सामने आए। यह केवल मुलाक़ात नहीं थी, बल्कि टूटे रिश्तों का जुड़ना, विश्वास का लौटना और हिंसा से दूर नई जिंदगी की ओर बढ़ने का संकल्प था।
जेल में निरूद्ध नक्सली प्रकरण के आरोपितों से उनके पुनर्वासित परिजन मिले। आंखों में आंसू लिए, वर्षों की दूरी और दर्द भूलकर परिवारजन एक-दूसरे से गले मिले। किसी ने भाई को पहचाना, किसी ने भतीजे का चेहरा छुआ तो किसी ने वर्षों बाद बहन के आंसू पोंछे—हर पल भावनाओं से भरा और परिवर्तन की उम्मीदों से रोशन था।
“अब बहुत हुआ… हिंसा नहीं, घर लौट चलो” – परिजनों की भावुक अपील
पुनर्वासित माओवादी कैडर्स संतू वेक्को, मारो वेक्को, रामलाल वेक्को, संतोष कुंजाम, बदरू ओयाम, मासा तामो, लखन ओयाम, लक्ष्मण ताती, मैनु आरकी, राजेश वेट्टी और कुमारी आरकी ने जेल में बंद अपने परिजनों अर्जुन वेक्को, मनी ओयाम, भीमसेन ओयाम, भीमा मुचाकी, सायको माड़वी, सोमारू मड़कम, बुधरू आरकी और शंकर कोरसा से मुलाक़ात की।
भावुक क्षणों के बीच सभी ने एक ही बात दोहराई—
“हम बदले तो जिंदगी बदली… तुम भी हथियार छोड़ो, घर लौट आओ। समाज तुम्हें अपनाने के लिए तैयार है।”
उन्होंने यह भी बताया कि उनके स्थानीय नेतृत्वकर्ता भूपति ने हथियार छोड़ने की अपील की है और खुद भी मुख्यधारा में लौट आए हैं।
शासन की पहल: केवल मुलाक़ात नहीं, दिलों को जोड़ने का प्रयास
कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ परिवारजन को मिलाना नहीं, बल्कि माओवादी विचारधारा से प्रभावित युवाओं का भावनात्मक पुनर्वास कर उन्हें सम्मानजनक जीवन की राह दिखाना है। इस पहल ने जेल बंदियों के मन में भी बदलाव और वापस लौटने की इच्छा को गहरा किया।
“कभी बहकावे में हिंसा अपनाई थी, अब लौटने का समय”— उपमुख्यमंत्री शर्मा
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति, विश्वास और विकास स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा—
“भटके हुए युवाओं को पुनर्वास का विकल्प दिया जा रहा है। जो कभी बहकावे में हिंसा की राह पर चल पड़े थे, उनके लिए अब सम्मानजनक जीवन और समाज में पुनः जगह पाने के द्वार खोले जा रहे हैं।”






