
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा। छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों के पोस्ट ग्रेजुएट (PG) कोटा को 50% से घटाकर 25% किए जाने के राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ चिकित्सक समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को कोरबा में डॉक्टरों और जनप्रतिनिधियों ने जिलाधीश एवं कार्यपालक दंडाधिकारी के माध्यम से स्वास्थ्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर कोटा बहाली की मांग उठाई।
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया कि PG कोटा में कटौती प्रदेश में सेवा दे रहे डॉक्टरों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है, विशेषकर वे डॉक्टर जो पहाड़ी, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बीच निरंतर सेवाएं दे रहे हैं।
महामारी के दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा करने वाले इन चिकित्सकों के लिए यह फैसला अन्यायपूर्ण बताया गया।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि
PG कोटा में कटौती से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि इससे युवा डॉक्टरों का मनोबल टूटेगा और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने की प्रेरणा भी कम होगी।
प्रदर्शनकारियों ने शासन से मांग की कि डॉक्टरों का PG कोटा तत्काल प्रभाव से पुनः 50% बहाल किया जाए, ताकि उनकी भविष्य सुरक्षा, कार्य संतुष्टि और अधिकार संरक्षित रह सकें।
इस दौरान राकेश पंकज, युवा नेता पवन विश्वकर्मा, कमलेश गर्ग, महामंत्री विवेक श्रीवास, ब्लॉक अध्यक्ष रविश यादव और संगठन महामंत्री अमित सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। सभी ने इस निर्णय को प्रदेश के चिकित्सा तंत्र के लिए हानिकारक बताते हुए सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।






