
पाली से ज्ञान शंकर तिवारी की रिपोर्ट
पॉक्सो मामले में पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल, रजक समाज में उबाल**
कोरबा जिले के पाली थाना अंतर्गत चैतमा चौकी क्षेत्र के ग्राम बनबांधा में नाबालिग बच्ची का अश्लील वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल होने का सनसनीखेज मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। घटना को पंद्रह दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन नामजद आरोपी युवक रतिराम यादव अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। न गिरफ्तारी हुई, न पूछताछ—जिससे पीड़ित परिवार और समाज में भारी आक्रोश फैलता जा रहा है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को वीडियो के स्क्रीनशॉट, इंस्टाग्राम लिंक और आरोपी द्वारा भेजे गए धमकी भरे मोबाइल संदेश जैसे महत्वपूर्ण सबूत सौंप दिए हैं। इसके बावजूद जांच की रफ्तार बेहद सुस्त है। इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा नाबालिग बच्ची भुगत रही है, जो मानसिक तनाव, भय और सामाजिक बदनामी के बीच जीने को मजबूर है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों और रजक समाज का कहना है कि पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर और संवेदनशील कानून से जुड़े मामले में पुलिस की यह ढिलाई न केवल चिंता का विषय है, बल्कि संदेह भी पैदा करती है। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र आरोपी की गिरफ्तारी कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
रजक समाज के अध्यक्ष धीरपाल निर्मलकर ने बताया कि पीड़िता को थाना पाली, व्यवहार न्यायालय पाली और कटघोरा थाना—तीनों जगह बुलाकर बयान दर्ज कराए गए। इसके बावजूद आरोपी से अब तक कोई पूछताछ नहीं की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला चैतमा चौकी और पाली थाना क्षेत्र का है, तो जांच कटघोरा थाना प्रभारी को क्यों सौंपी गई? समाज का मानना है कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है और आरोपी को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।
“जांच जारी है” तक सीमित जवाब
सूत्रों के अनुसार, पुलिस हर सवाल के जवाब में केवल “जांच जारी है” कहकर जिम्मेदारी से बचती नजर आ रही है। जमीनी स्तर पर न तो ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है और न ही पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा मिल पा रहा है।
इधर, पीड़ित परिवार ने उच्च पुलिस अधिकारियों, महिला आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के पास जाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह मामला अब सिर्फ एक नाबालिग के साथ हुए साइबर अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, संवेदनशील मामलों में तत्परता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—प्रशासन कब जागेगा और पीड़ित नाबालिग को न्याय कब मिलेगा?






