
सुशील जायसवाल
कोरबा (कोरबी–सिरमिना):
छत्तीसगढ़ शासन की केंद्रीकृत और तकनीक आधारित नीतियों के चलते इस वर्ष धान खरीदी व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान हितैषी साबित हो रही है। कोरबी–सिरमिना उपार्जन केंद्र में ‘टोकन तुंहर हाथ’ मोबाइल एप एवं ऑनलाइन प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को बड़ी राहत मिली है। अब किसानों को घर बैठे टोकन प्राप्त हो रहा है, जिससे खरीदी केंद्रों में भीड़ कम हुई है और तौल, भंडारण तथा भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध व सरल हो गई है।

किसानों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों से तौल तेज और सटीक हो रही है। वहीं समिति द्वारा छाया, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, हमालों की उपलब्धता, बोरा, पलटाई, सिलाई एवं मंडी में छल्ली लगाने जैसी सुविधाएं सुव्यवस्थित रूप से प्रदान की जा रही हैं। पर्याप्त भंडारण व्यवस्था के कारण किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

जगह की कमी को देखते हुए सिरमिना उपार्जन केंद्र के अंतर्गत कई किसानों के खेतों में ही धान खरीदी की जा रही है। किसानों की सुविधा और मांग को ध्यान में रखते हुए आगामी वर्षों में ग्राम पंचायत सि. नवापारा में उप-धान खरीदी केंद्र तथा कोरबी सेवा सहकारी समिति के अंतर्गत ग्राम पंचायत चोटिया (परला) में उपार्जन केंद्र खोलने का प्रस्ताव भी सामने आया है, जिससे क्षेत्र के किसानों को और अधिक राहत मिलने की संभावना है।
प्रशासन द्वारा अवैध धान बिक्री पर रोक लगाने के लिए भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। किसानों ने शासन और जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्पष्ट नीतियों और बेहतर प्रबंधन के कारण खरीदी प्रक्रिया अब अधिक विश्वसनीय बन गई है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा इस वर्ष धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा निर्धारित की गई है। धान खरीदी का कार्य 31 जनवरी 2026 तक जारी रहेगा। समय पर खरीदी और उचित मूल्य मिलने से पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में पंजीकृत किसानों के बीच सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
एग्रीस्टेक पोर्टल और सीमित टोकन से छोटे किसान परेशान
हालांकि, तकनीकी व्यवस्था के बावजूद छोटे किसानों की समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। एग्रीस्टेक पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों और सीमित टोकन जारी होने के कारण कई छोटे किसान खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि टोकन खुलते ही कुछ ही समय में सीमा समाप्त हो जाती है, जिससे तकनीकी रूप से सक्षम किसान तो टोकन ले लेते हैं, लेकिन छोटे और साधनविहीन किसान वंचित रह जाते हैं।
धान मिंजाई के बाद भी बिक्री न हो पाने के कारण कई किसानों को अपनी उपज घरों और कोठारों में रखना पड़ रहा है। चोरी के डर से कुछ किसान ठंड भरी रातों में खुले में फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं। अधिया पर खेती करने वाले किसानों की स्थिति और भी कठिन है, जिन्होंने ब्याज पर ऋण लेकर फसल बोई थी और समय पर भुगतान न होने से उन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
किसानों की बढ़ती परेशानी और मांगों को देखते हुए शासन द्वारा धान खरीदी की सीमा बढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में छोटे किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।






