
मनेंद्रगढ़ में 9 दिसंबर को कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन जिला राजनीति में हलचल मचा गया। डीएफओ मनीष कश्यप पर अवैध कटाई–तस्करी, बैगा परिवारों पर अत्याचार और जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार के आरोपों को लेकर हज़ारों कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प, बैरिकेड्स टूटने और घंटों जाम से शहर थम गया।
सबसे बड़ा खुलासा यह रहा कि भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिमा यादव और उपाध्यक्ष धर्मेंद्र पटवा ने भी स्वीकार किया कि कुछ माह पहले शिकायत लेकर पहुंचने पर डीएफओ ने उनके साथ अभद्रता की थी और मामला विधायक के दखल से शांत हुआ था। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा नेतृत्व के संरक्षण के कारण कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते आज जनता को सड़क पर उतरना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की तैयारी पर भी सवाल उठे—पूर्व में रूट डाइवर्ट जारी न होने से स्कूल के बच्चे, एंबुलेंस और आमजन घंटों जाम में फंसे रहे।
डीएफओ कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आक्रोश चरम पर पहुंचा। “डीएफओ हटाओ”, “जंगल माफिया पर कार्रवाई करो” जैसे नारे गूंजते रहे। पुलिस-कार्यकर्ता झड़प के बाद अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। नेताओं ने चेतावनी दी—यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो अगला घेराव कलेक्टर कार्यालय का होगा।
पूर्व विधायक गुलाब कमरों, जिला अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव, एनएसयूआई प्रदेशाध्यक्ष नीरज पांडे सहित कई नेताओं ने आरोप लगाया कि वन विभाग में करोड़ों की अनियमितताएं चल रही हैं और बैगा जनजाति के साथ अन्याय हुआ है।
कांग्रेस ने स्पष्ट कहा—“यह शुरुआत है, कार्रवाई न हुई तो निर्णायक आंदोलन होगा।”
मनेंद्रगढ़ के इस अभूतपूर्व प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि जनता अब वन विभाग की कथित मनमानी के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी।






