सक्रिय पत्रकार हजरत खान को जान से मारने का कोशिश,सिर पर रॉड से किया प्राण घातक हमला,आई गंभीर चोंट,वारकर भागे आरोपी।

रिपोर्टर प्रदीप राव

 

Loksadan. बिलासपुर कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र मोरगा के सक्रिय पत्रकार हजरत खान पर जानलेवा हमला हो गया। यह घटना रविवार को रात्रि 3:00 बजे का बताया जा रहा है। आपको बता दे,कि बिलासपुर में सक्रिय पत्रकार हजरत खान के ऊपर अचानक प्राणघातक हमला कर दिया गया। जिस हमले से पत्रकार हजरत खान के सिर में गंभीर चोंट आ गया है,जानकारी के अनुसार पूरा मामला इस प्रकार का है,कि मोरगा चौंकी के ग्राम मोरगा थाना बांगो जिला कोरबा का रहने वाला हजरत खान पत्रकार दिनांक 24 अगस्त 2025 को अपनी भतीजी सबाना खान ने फोन कर बताई कि मेरी बेटी आलिया खान थाना में मेरे खिलाफ रिपोर्ट लिखाई है,जिसके सबंध में मेरी बेटी को समझाना है, पढाई- लिखाई नही करती है, मोबाइल में खेलती रहती है। और पढाई- लिखाई के लिये बोली हूं तो थाना में जाकर बोली की मेरे को मां डाटती है, बोलकर रिपोर्ट की है। बहन के कहने पर मैं गांव के स्वेता तंवर के साथ आकर मेरे भतीजी सबाना के घर जाकर आलिया खान को पढाई लिखाई में ध्यान दो कहकर समझाया और उसके बाद मेरी भतीजी सबाना खान बोली की चाचा-खाना खा लेना,और रात में यही रूक जाना कहने पर मैं और स्वेता तंवर आलिया खान के साथ मेरी भतीजी की किराये की मकान में रुक गए,और सो गए थे। तभी रात्रि लगभग 03:10 बजे संत कुमार तिवारी अपने लगभग 5 साथियों के साथ घर के अंदर घुसकर बोले की जिस घर में तुम हों उस घर का किराया मैं पटाता हूं,और पढाई लिखाई का खर्चा मैं करता हूं। तुम कौन होते हो यहां आकर सोने वाले कहकर मुझे मां बहन की गंदी- गंदी गाली गलौच किया,और जान से मारने की धमकी देते हुए धक्का मुक्का करते हुएँ डंडा और रॉड से सिर पे जानलेवा हमला किया है, जिससे पत्रकार हजरत खान के सिर,एवं हाथ पैर में चोट आ गया है। घटना के सबंध में अपनी पत्नी रेश्मा, मेरा साला शेख अकिल को बताया है। आपको बता दे,कि तत्काल थाना जाकर मारपीट करने वाले बदमाशों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफ.आई.आर दर्ज कराया गया। जिस पर BNS 296, 115(2) 351(2) 333, 3(5) धाराओं पर अपराध दर्ज कर दिया गया है।

पत्रकारों पर हमला करना व घटना को अंजाम देना हुआ आम बात :-

आपको बता दे,कि लगातार हों रहा पत्रकारों पर हमले की घटनाएं पुर देश में आम बात हो गई हैं। कई मामलों में पत्रकारों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा या गंभीर चोटें आई हैं। इन घटनाओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक प्रमुख कारण है पत्रकारों का सच उजागर करने के कारण लगातार हमला किया जा रहा है।

” क्या पत्रकारों के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून लागु नही किया जा सकता?

” क्या पत्रकारों के जीवन का कोई मोल नही है?

” क्या पत्रकारों के ऊपर हों रहे हमले से शासन – प्रशासन को कोई मतलब नहीं?

” पत्रकारों पर हमला करने वालों अभी तक पुलिस के गिरफ्त में क्यों नही आए,आखिर उनको कौन दे रहा संरक्षण?

” क्या पत्रकारों पर हमला करने वालों के ऊपर ठोस कार्यवाही होगी,या नाकाम रहेगा प्रशासन ?

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