एशिया का गौरव गोंडवाना फॉसिल पार्क उपेक्षा की भेंट चढ़ा — वन विभाग की लापरवाही से उजड़ रही करोड़ों वर्ष पुरानी धरोहर
मनेंद्रगढ़। एशिया का सबसे बड़ा गोंडवाना मैरिन फॉसिल्स पार्क, जो कभी भारत की वैज्ञानिक और ऐतिहासिक शान माना जाता था, आज प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय निष्क्रियता की भेंट चढ़ चुका है। वन मंडलाधिकारी मनेंद्रगढ़ की उपेक्षा और वन विभाग की उदासीनता ने इस अनमोल धरोहर को धीरे-धीरे बर्बादी की ओर धकेल दिया है। करीब 29 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म, जो धरती के प्राचीन समुद्री जीवन के अनमोल प्रमाण हैं, आज धूल में दबे पड़े हैं। संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए बनाई गई करोड़ों की योजनाएं अब केवल कागज़ों और पोस्टरों तक सीमित रह गई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग ने योजनाओं के नाम पर भारी खर्च दिखाया, लेकिन मौके पर न तो कोई वास्तविक कार्य हुआ, न कोई संरक्षण दिखता है। लोहे की जालियां टूटी पड़ी हैं, सूचना पट्ट गायब हैं और जीवाश्म खुले आसमान के नीचे उजड़ रहे हैं। वन विभाग के दावे—“संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन को बढ़ावा”—सिर्फ प्रेस विज्ञप्तियों का हिस्सा बनकर रह गए हैं। जमीनी सच्चाई यह है कि यह एशिया का गौरवशाली पार्क अब अव्यवस्था और उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है। प्रश्न यह है — क्या वन विभाग केवल प्रचार और योजनाओं के कागज़ी आंकड़े दिखाने के लिए है? करोड़ों रुपये की योजनाओं का हिसाब कौन देगा? और सबसे अहम — वन मंडलाधिकारी मनीष कश्यप जवाबदेही से कब तक बचते रहेंगे? विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह वैज्ञानिक धरोहर सदा के लिए नष्ट हो जाएगी। अब वक्त है कि विभाग झूठे दावों और औपचारिक बैठकों से आगे बढ़कर इस पार्क के संरक्षण को वास्तविक रूप दे। वरना, गोंडवाना मैरिन फॉसिल्स पार्क आने वाली पीढ़ियों के लिए सिर्फ इतिहास की किताबों में “खोया हुआ अवसर” बनकर रह जाएगा।
भारत-बोत्सवाना वन्यजीव मित्रता का नया अध्याय: बोत्सवाना ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत भारत को सौंपे आठ चीते
✍️ भागीरथी यादव गैबोरोन/नई दिल्ली- भारत और बोत्सवाना के बीच वन्यजीव संरक्षण साझेदारी में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, बोत्सवाना ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अगले चरण के तहत औपचारिक रूप से भारत को आठ चीते सौंपे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और बोत्सवाना के राष्ट्रपति ड्यूमा गिदोन बोको ने मिलकर इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। गैबोरोन स्थित मोकोलोडी नेचर रिजर्व में आयोजित समारोह के दौरान, दोनों राष्ट्रपतियों ने बोत्सवाना के घांजी क्षेत्र से पकड़े गए चीतों को क्वारंटाइन सेंटर में छोड़े जाते देखा। यह कार्यक्रम भारत और बोत्सवाना के बीच वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में गहरी होती साझेदारी का प्रतीक बना। राष्ट्रपति मुर्मु की यह बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा गया — > “भारत-बोत्सवाना वन्यजीव संरक्षण साझेदारी में एक नया अध्याय। यह पहल दोनों देशों के पर्यावरणीय सहयोग को नई दिशा देगी।” विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह पहल भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अगले चरण की एक बड़ी उपलब्धि है, जो विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास और संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करती है। बोत्सवाना में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा — > “मुझे बताया गया है कि बोत्सवाना में करीब 10 हजार भारतीय नागरिक विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। आप सभी भारत के गौरवशाली राजदूत हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत और बोत्सवाना वर्ष 2026 में राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मनाएंगे। दोनों देश हीरा उद्योग (डायमंड सेक्टर) में लंबे समय से साझेदार हैं, और अब रक्षा, प्रौद्योगिकी और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की प्रगति पर बोलते हुए कहा — > “भारत आज एक परिवर्तनकारी दौर में है। हमारी युवा शक्ति, मजबूत अर्थव्यवस्था और इनोवेशन की भावना हमें 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे ले जा रही है। ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्वच्छ भारत’ जैसी पहल भारत के नवोन्मेषी भविष्य की पहचान बन चुकी हैं।” यह दौरा न केवल भारत-बोत्सवाना संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि अफ्रीका में भारत की वन्यजीव संरक्षण साझेदारी को भी नई दिशा देगा।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बड़ा बदलाव तय, 41 में से 36 जिलाध्यक्ष होंगे नए
✍️ भागीरथी यादव रायपुर- छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी पूरी हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 41 जिलाध्यक्षों में से 36 नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि 5 वर्तमान जिलाध्यक्षों को दोबारा जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। नई जिलाध्यक्षों की सूची, जो लंबे समय से अटकी हुई थी, अब जल्द जारी की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान ने नामों पर अंतिम मुहर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और 14 नवंबर के बाद किसी भी समय सूची जारी हो सकती है। इस बार कांग्रेस ‘परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम’ और ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति को लागू करने जा रही है। इसके साथ ही संगठन में युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को प्राथमिकता देने की भी तैयारी है। पार्टी का उद्देश्य नए चेहरों के माध्यम से संगठन को नई दिशा और ऊर्जा देना है, ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।
कथा वाचक पंडित आशुतोष चैतन्य पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज
सतनामी समाज ने किया तखतपुर थाने का घेराव, गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा समाज — धार्मिक कथा के दौरान विवादित टिप्पणी से भड़का समाज बिलासपुर/तखतपुर। तखतपुर में रविवार को आयोजित एक धार्मिक कथा के दौरान कथावाचक पंडित आशुतोष चैतन्य द्वारा कथित रूप से सतनामी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने से विवाद गहरा गया। घटना के बाद सतनामी समाज के सैकड़ों लोग आक्रोशित होकर थाने पहुंच गए और कथावाचक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। — थाने का घेराव, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन मामला सामने आते ही तखतपुर थाने के बाहर बड़ी संख्या में समाजजन जुट गए। विरोध के दौरान नारेबाजी और थाने का घेराव किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि > “धार्मिक मंच का उपयोग किसी समाज या वर्ग को नीचा दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई इस तरह का दुस्साहस न करे।” — समाज की मांग — आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी हो सतनामी समाज के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल थाना प्रभारी से मिला और एससी-एसटी (एट्रोसिटी) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। — पुलिस की तत्परता — एट्रोसिटी एक्ट में मामला दर्ज विरोध बढ़ता देख तखतपुर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कथावाचक पंडित आशुतोष चैतन्य के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की। थाना प्रभारी ने बताया कि > “मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” पुलिस ने एहतियातन थाना परिसर और आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किया है ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। — विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल थाने के बाहर हुए विरोध में बिहारी सिंह टोडर, संजीव खांडे, चोवादास खांडेकर, साधेलाल भारद्वाज, संदीप खांडे, जितेंद्र बंजारे, आदर्श बंजारे, होरीलाल माथुर, रामेश्वर रात्रे, विक्की दिनकर, नरेंद्र दिनकर, मंजू खांडे, कृष्णा जांगड़े, कोमल टोडर, राजेश खांडे, जितेंद्र जांगड़े, निलेश भार्गव, प्रदीप लहरे, अनिल और फिरोज दिवाकर सहित सैकड़ों समाजजन मौजूद रहे। — समाज का बयान — “गरिमा पर आघात बर्दाश्त नहीं” सतनामी समाज के नेताओं ने कहा — > “हम किसी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यदि कोई हमारे समाज की गरिमा पर आघात करेगा, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। यह सिर्फ हमारा नहीं, सामाजिक सम्मान का सवाल है।” — पुलिस प्रशासन की अपील — शांति बनाए रखें पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि > “कानून से बढ़कर कोई नहीं है। दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” — स्थिति फिलहाल नियंत्रण में, पर तनाव बरकरार हालांकि पुलिस की समझाइश के बाद माहौल शांत हुआ, लेकिन तखतपुर नगर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच एट्रोसिटी एक्ट के प्रावधानों के तहत कर रही है और कहा गया है कि “साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई शीघ्र की जाएगी।”
शासन से वार्ता विफल — सहकारी समिति कर्मचारियों का आंदोलन और उग्र होगा
धान खरीदी ऑपरेटर संघ और सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ की हड़ताल 12वें दिन भी जारी, कर्मचारियों में उबाल — शासन के रवैए से नाराज कर्मचारी, हड़ताल पर अडिग बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की चार सूत्रीय मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल गुरुवार को 12वें दिन भी जारी रही। प्रदेशभर के कर्मचारी शासन के उदासीन रवैए से नाराज हैं और साफ कहा है कि जब तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। — प्रेस क्लब में फूटा कर्मचारियों का आक्रोश गुरुवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन केवल आश्वासन दे रहा है, मगर जमीनी स्तर पर कोई पहल नहीं दिख रही। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों और 2739 उपार्जन केंद्रों में करीब 15 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, जो हर साल लाखों किसानों को धान खरीदी की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। फिर भी वर्षों से इन्हें नियमित वेतन, स्थायी नियुक्ति और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। — धान खरीदी ऑपरेटर संघ और सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ की हड़ताल 12वें दिन भी जारी, कर्मचारियों में उबाल — शासन के रवैए से नाराज कर्मचारी, हड़ताल पर अडिग बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की चार सूत्रीय मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल गुरुवार को 12वें दिन भी जारी रही। प्रदेशभर के कर्मचारी शासन के उदासीन रवैए से नाराज हैं और साफ कहा है कि जब तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। — प्रेस क्लब में फूटा कर्मचारियों का आक्रोश गुरुवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन केवल आश्वासन दे रहा है, मगर जमीनी स्तर पर कोई पहल नहीं दिख रही। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों और 2739 उपार्जन केंद्रों में करीब 15 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, जो हर साल लाखों किसानों को धान खरीदी की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। फिर भी वर्षों से इन्हें नियमित वेतन, स्थायी नियुक्ति और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। — चार सूत्रीय मांगें जिन पर टकराव जारी 1️⃣ वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान धान खरीदी में हुई सुखत राशि का तत्काल भुगतान। 2️⃣ परिवहन के बाद संपूर्ण सुखत राशि समितियों को दी जाए ताकि आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके। 3️⃣ आउटसोर्सिंग प्रणाली समाप्त कर ऑपरेटरों का नियमितीकरण किया जाए। 4️⃣ मध्यप्रदेश की तर्ज पर ₹3 लाख वार्षिक प्रबंधकीय अनुदान और वेतनमान प्रदान किया जाए। — “किसानों की सेवा करने वालों को ही नजरअंदाज किया जा रहा” महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन किसान हितैषी नीतियों की बात तो करता है, लेकिन जो कर्मचारी किसानों को सुविधा देते हैं, वही उपेक्षित हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव स्तर की बैठकों में आश्वासन तो मिला, पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। > “अब कर्मचारी सिर्फ लिखित आदेश चाहते हैं, खोखले वादे नहीं,” — महासंघ के नेताओं ने कहा। — धान खरीदी कार्य ठप पड़ने की चेतावनी महासंघ ने चेतावनी दी है कि अगर शासन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला, तो आगामी धान खरीदी कार्य पूरी तरह ठप हो जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि अब उनकी हड़ताल सिर्फ अधिकार की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान का आंदोलन बन चुकी है। — प्रदेशभर से मिल रहा समर्थन प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि आंदोलन को अब प्रदेशव्यापी समर्थन मिल रहा है। ग्रामीण समितियों और किसान संगठनों ने भी कर्मचारियों की मांगों को न्यायसंगत बताते हुए समर्थन का ऐलान किया है। संघ का कहना है कि यदि शासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह हड़ताल राज्यव्यापी जनआंदोलन का रूप ले लेगी। — कर्मचारियों ने दी अंतिम चेतावनी महासंघ और संघ के पदाधिकारियों — एकलव्य चंद्रा, रूद्रदत्त तिवारी, भोलाराम यादव, कमलकांत पाटनवार, विद्याशंकर यादव और मीनाक्षी यादव — ने एक स्वर में कहा कि > “हम किसानों की सेवा करते हैं, लेकिन शासन हमें केवल आश्वासन दे रहा है। अब अगर जल्द ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो हम धान खरीदी कार्य से पूरी तरह अलग होकर आंदोलन को और तेज करेंगे।” चार सूत्रीय मांगें जिन पर टकराव जारी 1️⃣ वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान धान खरीदी में हुई सुखत राशि का तत्काल भुगतान। 2️⃣ परिवहन के बाद संपूर्ण सुखत राशि समितियों को दी जाए ताकि आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके। 3️⃣ आउटसोर्सिंग प्रणाली समाप्त कर ऑपरेटरों का नियमितीकरण किया जाए। 4️⃣ मध्यप्रदेश की तर्ज पर ₹3 लाख वार्षिक प्रबंधकीय अनुदान और वेतनमान प्रदान किया जाए। — “किसानों की सेवा करने वालों…
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ₹61.20 करोड़ की संपत्ति ईडी ने कुर्क की
✍️ भागीरथी यादव धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई, ईडी ने बताया — चैतन्य बघेल थे शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर — ईडी की बड़ी कार्रवाई, राज्य की राजनीति में हलचल छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ₹61.20 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। ईडी की इस कार्रवाई से राज्य की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। — 364 प्लॉट और बैंक खातों पर लगी रोक ईडी ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों में ₹59.96 करोड़ मूल्य की 364 आवासीय और कृषि भूमि शामिल हैं। इसके अलावा, ₹1.24 करोड़ की चल संपत्तियां बैंक खातों और सावधि जमा के रूप में जब्त की गई हैं। यह कार्रवाई उन संपत्तियों पर केंद्रित है, जिन्हें ईडी ने “अपराध से अर्जित आय (POC)” बताया है। — 2500 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ी है जांच ईडी के मुताबिक, यह कुर्की छत्तीसगढ़ में चल रहे कथित 2500 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ी जांच का हिस्सा है। एजेंसी ने कहा कि अपराध की इस आय को विभिन्न माध्यमों से रियल एस्टेट और अन्य व्यावसायिक संपत्तियों में निवेश किया गया था। — ईडी का दावा — चैतन्य बघेल थे शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर ईडी की जांच में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर कार्यरत थे। पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र होने के कारण उन्हें “अंतिम नियंत्रक और निर्णयकर्ता” की भूमिका दी गई थी। एजेंसी के अनुसार, शराब कारोबार से जुटाए गए अवैध धन के संग्रह, चैनलाइजेशन और वितरण से जुड़े प्रमुख फैसले चैतन्य बघेल के निर्देश पर लिए जाते थे। — रियल एस्टेट में लगाया गया अवैध धन ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, चैतन्य बघेल ने कथित रूप से शराब घोटाले से प्राप्त अवैध धन को अपने रियल एस्टेट कारोबार “मेसर्स बघेल डेवलपर्स” के माध्यम से वैध दिखाने की कोशिश की। उन्होंने इस राशि का उपयोग “विट्ठल ग्रीन” नामक रियल एस्टेट परियोजना में किया। ईडी ने बताया कि इस तरह घोटाले से कमाई गई रकम को वैध निवेश के रूप में पेश किया गया। — 18 जुलाई 2025 को हुई गिरफ्तारी, अब न्यायिक हिरासत में ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। — पूर्व आबकारी मंत्री और अन्य अफसर भी गिरफ्तार इस घोटाले में पहले भी कई बड़े नाम सामने आ चुके हैं। ईडी ने अब तक पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी (आईटीएस) और कवासी लखमा (तत्कालीन आबकारी मंत्री और विधायक) को गिरफ्तार किया है। ईडी ने कहा कि चैतन्य बघेल की संपत्ति की यह कुर्की, पहले से कुर्क की गई ₹215 करोड़ की अचल संपत्तियों का हिस्सा है। — ईडी ने कहा — जांच जारी रहेगी ईडी ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामले में जांच अभी जारी है। एजेंसी ने कहा कि और भी संपत्तियां व व्यक्तियों की भूमिका सामने आ सकती है।
पुराना बस स्टैंड बना नशे का गढ़: अवैध चखना दुकानों का बोलबाला, पुलिस-आबकारी पर उठे गंभीर सवाल
बिलासपुर का पुराना बस स्टैंड नशे के शिकंजे में अवैध चखना दुकानों का साम्राज्य, आबकारी और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल रौनक से बर्बादी तक – एक इलाका जो पहचान खो बैठा बिलासपुर का पुराना बस स्टैंड कभी यात्रियों और दुकानदारों की रौनक से भरा इलाका था। लेकिन आज यही इलाका नशे, अवैध बिक्री और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का अड्डा बन गया है। शाम ढलते ही यहां हुड़दंगियों और नशेड़ियों का कब्जा हो जाता है। कानून की अनदेखी, खुलेआम चल रहा धंधा आबकारी अधिनियम के मुताबिक, किसी भी शराब दुकान से 50 मीटर की दूरी में चखना दुकान या शराब सेवन स्थल चलाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद पुराने बस स्टैंड में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सड़क किनारे अवैध चखना दुकाने दिन-रात खुली रहती हैं और शराबियों को खुली छूट मिली हुई है। — नशे का कारोबार बेखौफ, पुलिस-आबकारी पर सवाल स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत के बिना यह कारोबार चल ही नहीं सकता। शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, जिससे लोगों में नाराजगी है। एक नागरिक ने कहा — > “यहां हर शाम कानून का मखौल उड़ता है, और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।”
कोरबा में रफ्तार बनी खतरा: डॉक्टर की कार ने मचाई तबाही, बड़ा हादसा टला
✍️ भागीरथी यादव कोरबा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रजगामार रोड पर शुक्रवार शाम रफ्तार ने फिर कहर बरपाया। चावल गोदाम तिराहे के पास एक तेज रफ्तार कार ने पहले एक इलेक्ट्रिक ऑटो को टक्कर मारी और फिर सामने खड़ी कार से जा भिड़ी। हादसा इतना जोरदार था कि आसपास मौजूद राहगीर बाल-बाल बच गए, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सीजी 12 बीजी 3303 नंबर की कार को एक डॉक्टर चला रहा था। बताया गया कि डॉक्टर ने दो बाइक सवारों को टक्कर से बचाने की कोशिश में अचानक दिशा बदली, जिससे वाहन का नियंत्रण खो बैठा और लगातार दो टक्करों के बाद कार सड़क किनारे जा रुकी। स्थानीय होटल संचालक लूतन वर्मा ने बताया कि यह तिराहा अब दुर्घटनाओं का गढ़ बन गया है। हाल ही में इसी जगह बस की टक्कर से एक युवक की मौत हो चुकी है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि चावल गोदाम तिराहे पर स्पीड ब्रेकर, सिग्नल और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
गुरुग्राम में 11वीं के छात्र ने क्लासमेट को मारी गोली, दो महीने पुरानी रंजिश बनी वजह
✍️ भागीरथी यादव गुरुग्राम – सेक्टर-48 में एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। यहां 11वीं कक्षा के एक छात्र ने अपने क्लासमेट को घर बुलाकर गोली मार दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने पिता की लाइसेंसी पिस्तौल से वारदात को अंजाम दिया। घटना शनिवार रात करीब 9:30 बजे हुई, जब तीनों सहपाठी आरोपी के किराए के फ्लैट में मौजूद थे। किसी बात पर कहासुनी के बाद आरोपी ने गोली चला दी, जो छात्र की गर्दन में लगी। घायल को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मौके से एक पिस्तौल, दो मैगजीन और 70 कारतूस बरामद किए हैं तथा दो नाबालिग छात्रों को हिरासत में लिया है। पूछताछ में पता चला कि दोनों के बीच करीब दो महीने पहले झगड़ा हुआ था, जिससे आरोपी नाराज़ था और बदला लेना चाहता था। आरोपी के पिता प्रॉपर्टी डीलर हैं और हथियार उन्हीं का लाइसेंसी पिस्तौल बताया जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घायल छात्र की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
दिल्ली ब्लास्ट के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा: एनएएसी का कारण बताओ नोटिस, ईडी करेगी फॉरेंसिक ऑडिट
✍️ भागीरथी यादव नई दिल्ली | 13 नवंबर 2025: लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट मामले की जांच अब शिक्षा संस्थानों तक पहुँच गई है। फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी पर अब दोहरी कार्रवाई की तलवार लटक रही है — 👉नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) ने यूनिवर्सिटी को फर्जी मान्यता दावे पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है, और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसके वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट शुरू कर दिया है। NAAC ने लगाया “जनता को गुमराह करने” का आरोप एनएएसी के निदेशक गणेशन कन्नाबिरण ने 12 नवंबर को जारी नोटिस में कहा कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर गलत जानकारी देकर एनएएसी मान्यता का झूठा दावा किया है। यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर यह उल्लेख किया गया था कि उसके तीन कॉलेज — अल फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1997 से, A ग्रेड) ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (2008 से) अल फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (2006 से, A ग्रेड) — एनएएसी से मान्यता प्राप्त हैं। लेकिन एनएएसी ने स्पष्ट किया कि इंजीनियरिंग स्कूल को 2013–2018 तक (CGPA 3.08) और एजुकेशन स्कूल को 2011–2016 तक (CGPA 3.16) ही ‘A’ ग्रेड दिया गया था, जो अब समाप्त हो चुका है। नोटिस में कहा गया है कि यह दावा छात्रों, अभिभावकों और जनता को गुमराह करने वाला है। एनएएसी ने यूनिवर्सिटी से 7 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है और तब तक वेबसाइट से एनएएसी का उल्लेख हटाने का आदेश दिया है। नोटिस जारी होते ही यूनिवर्सिटी की वेबसाइट डाउन हो गई। ईडी करेगी फॉरेंसिक ऑडिट, तीन डॉक्टरों के लेन-देन पर नजर ब्लास्ट केस में आरोपी डॉ. उमर नबी, डॉ. मुजम्मिल गनाई और डॉ. शाहीन सईद के वित्तीय ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इन तीनों ने मिलकर लगभग 20 लाख रुपये इकट्ठा किए और 26 क्विंटल एनपीके फर्टिलाइज़र खरीदा, जिसका उपयोग IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने में किया गया। ईडी अब यूनिवर्सिटी की फंडिंग, विदेशी लेन-देन और ट्रस्ट अकाउंट्स का फॉरेंसिक ऑडिट करेगी। यूनिवर्सिटी का जवाब — “हमारा ब्लास्ट से कोई लेना-देना नहीं” बढ़ते विवाद पर अल फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि “हमारा दिल्ली ब्लास्ट से कोई संबंध नहीं है। जिस तरह से हमारी यूनिवर्सिटी का नाम जोड़ा जा रहा है, उससे संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।” यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि “कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमारे खिलाफ झूठी व मनगढ़ंत बातें फैलाई जा रही हैं, जिनमें कोई सत्यता नहीं है।” ट्रस्ट ने विदेशी फंडिंग से किया इनकार अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने ईडी को दिए अपने प्रारंभिक जवाब में विदेशी फंडिंग से इनकार किया है, हालांकि उसने जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। दिल्ली ब्लास्ट और फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल खुलासे के बाद से यूनिवर्सिटी की गतिविधियों की गहन पड़ताल जारी है।
















