
✍️ भागीरथी यादव
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लापरवाही पर शिव सेना का तीखा हमला, जनदर्शन में सौंपा ज्ञापन
मुंगेली | छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री के संभावित आगमन से पहले मुंगेली जिले में पेयजल व्यवस्था को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के कई गांवों में करोड़ों रुपये की लागत से बनी उच्च स्तरीय पानी टंकियां आज भी शोपीस बनकर खड़ी हैं, जबकि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
आने वाली भीषण गर्मी को देखते हुए जब पेयजल की उपलब्धता सबसे बड़ा सवाल बन जाती है, ऐसे समय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की लापरवाही ग्रामीणों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद कई गांवों में पानी टंकियां आज तक चालू नहीं की गई हैं, वहीं अनेक स्थानों पर पाइपलाइन और अन्य जरूरी कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं।

शिव सेना ने जनदर्शन में उठाई आवाज
इस गंभीर मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ शिव सेना ने मंगलवार, 16 दिसंबर को कलेक्टर जनदर्शन, मुंगेली में जोरदार तरीके से शिकायत दर्ज कराई। शिव सेना जिला प्रभारी रमेश सिंह राजपूत ने जिलाधीश को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि शासन ने ग्रामीण जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पानी टंकियों का निर्माण कराया, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण जनता को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ज्ञापन में साफ तौर पर उल्लेख किया गया कि यदि समय रहते इन टंकियों को चालू नहीं किया गया, तो आने वाले गर्मी के महीनों में गांव-गांव भयावह जल संकट से जूझने को मजबूर होंगे। यह स्थिति लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
तत्काल कार्रवाई की मांग
शिव सेना ने मांग की है कि जिन पानी टंकियों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, उन्हें अविलंब चालू कराया जाए और जहां पाइपलाइन अथवा अन्य कार्य अधूरे हैं, उन्हें जल्द से जल्द पूरा कराकर नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
इस संबंध में ज्ञापन की प्रतिलिपि
कार्यपालन अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मुंगेली
अनुविभागीय अधिकारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मुंगेली
कार्यपालन अभियंता, लोरमी
कार्यपालन अभियंता, पथरिया को भी प्रेषित किए जाने का उल्लेख किया गया है।
ग्रामीणों में जगी उम्मीद, प्रशासन की परीक्षा
कलेक्टर जनदर्शन में मामला उठने के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि प्रशासन अब इस गंभीर समस्या को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाएगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग कब नींद से जागता है और कब गांवों तक वास्तव में पानी पहुंच पाता है।
यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर करता है, बल्कि जवाबदेही तय करने की भी सख्त जरूरत को सामने लाता है।






