1 करोड़ का इनामी अनल दा ढेर

      झारखंड। नक्सल नेटवर्क को करारा झटका देते हुए सुरक्षाबलों ने गुरुवार तड़के सारंडा के घने जंगलों में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। नक्सल विरोधी अभियान के दौरान हुई भीषण मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) का शीर्ष कमांडर और एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली अनल दा उर्फ तूफान समेत 11 से अधिक नक्सली मारे गए हैं। हालांकि, अंतिम आंकड़ों और पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभियान के पूर्ण होने के बाद की जाएगी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई नक्सल संगठन की कमर तोड़ने वाली साबित हुई है।  जंगल में अचानक हमला, जवानों ने की निर्णायक घेराबंदी झारखंड पुलिस, कोबरा बटालियन और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की संयुक्त टीम सारंडा के दुर्गम वन क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इसी दौरान जंगल में छिपे नक्सलियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने तत्परता दिखाते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी की और जवाबी कार्रवाई शुरू की। कई घंटों तक चली भीषण मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को चारों ओर से घेर लिया।  अनल दा के दस्ते का हुआ सफाया सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ कुख्यात नक्सली अनल दा उर्फ तूफान के दस्ते से हुई, जिसमें 14 से अधिक हार्डकोर नक्सली शामिल थे। कार्रवाई में 11 से ज्यादा नक्सली ढेर किए गए, जिनमें अनल दा के मारे जाने की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा 50 लाख रुपये के इनामी एक अन्य बड़े नक्सली कमांडर के भी मारे जाने की खबर है।  DIG ने की पुष्टि, ऑपरेशन अब भी जारी कोल्हान रेंज के DIG अनुरंजन किस्पोट्टा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है। पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। नक्सलियों का गढ़ रहा है सारंडा दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। यही कारण है कि सुरक्षाबल यहां लगातार बड़े स्तर पर नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं। ताजा मुठभेड़ के बाद इलाके में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। कौन था अनल दा उर्फ तूफान? अनल दा का असली नाम पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश बताया जाता है। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र का निवासी था और भाकपा (माओवादी) संगठन का सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) था। 1987 से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय अनल दा हत्या, आईईडी ब्लास्ट, हथियार लूट जैसे दर्जनों संगीन मामलों में वांछित था और संगठन का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। नक्सल नेटवर्क को सबसे बड़ा झटका पिछले कुछ महीनों में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है— पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस की गिरफ्तारी सेंट्रल कमेटी सदस्य सुधाकर का सरेंडर और अब यह बड़ी मुठभेड़ इन घटनाओं ने नक्सल नेटवर्क को गहरे संकट में डाल दिया है। सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई झारखंड समेत पूरे मध्य भारत में नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

एमसीबी में पुलिस की अभिनव पहल: बच्चों को बनाया गया ट्रैफिक वॉलिंटियर, सड़क सुरक्षा का दिया मजबूत संदेश

✍️ भागीरथी यादव   एमसीबी | जिले में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह ने एक संवेदनशील और प्रेरक पहल की है। इस अनोखे अभियान के तहत बच्चों को स्पेशल ट्रैफिक वॉलिंटियर बनाकर सड़क सुरक्षा जागरूकता का दायित्व सौंपा गया है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बच्चों की मासूम अपील और परिवार के प्रति उनका स्नेह, ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए सबसे सशक्त माध्यम साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक दर्दनाक सड़क हादसे देखे हैं, जिनका मुख्य कारण हेलमेट न पहनना, शराब पीकर वाहन चलाना, तेज रफ्तार और बिना लाइसेंस वाहन चलाना रहा है। नियम नहीं मानेंगे तो नुकसान अपनों का होगा एसपी रत्ना सिंह ने कहा कि लोग अक्सर यह सोचकर नियमों की अनदेखी कर देते हैं कि “कुछ नहीं होगा”, जबकि यही लापरवाही कई परिवारों की खुशियां छीन लेती है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे अपने घर के बड़ों को— दोपहिया वाहन चलाते समय आईएसआई प्रमाणित हेलमेट पहनने नशे की हालत में वाहन न चलाने वैध ड्राइविंग लाइसेंस और नंबर प्लेट के साथ ही वाहन चलाने तेज रफ्तार और स्टंट से दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित करें। ‘हेलमेट डर से नहीं, परिवार की सलामती के लिए’ पुलिस अधीक्षक ने भावुक संदेश देते हुए कहा— “हेलमेट पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पहनना चाहिए। जब बच्चे अपने माता-पिता से उनकी सलामती की बात करते हैं, तो यह संदेश सीधे दिल तक पहुंचता है और नियम बोझ नहीं, आदत बन जाते हैं।” ‘राह-वीर योजना’: मानवता को सम्मान एसपी रत्ना सिंह ने जानकारी दी कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले नागरिकों को पुलिस द्वारा परेशान नहीं किया जाता। केंद्र सरकार की ‘राह-वीर योजना’ के तहत घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये नकद पुरस्कार और सम्मान प्रदान किया जाता है, जिससे समाज में सहयोग और मानवता की भावना को बढ़ावा मिलता है। नन्हे वॉलिंटियर बनेंगे बदलाव के वाहक अंत में पुलिस अधीक्षक ने विश्वास जताया कि जिले के ये नन्हे सिपाही अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगे और सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन का रूप देंगे, जिससे आने वाले समय में जिले की सड़कों पर दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।  

सारंगढ़–बिलाईगढ़ में अवैध धान भंडारण पर बड़ा प्रहार, 14 गोदाम सील, 2467 क्विंटल धान जब्त

✍️ भागीरथी यादव   सारंगढ़–बिलाईगढ़ | 22 जनवरी 2026 जिले में अवैध धान भंडारण और गैरकानूनी व्यापार पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 व्यापारियों के गोदामों को सील कर 2467 क्विंटल धान जब्त किया है। यह कार्रवाई मंडी अधिनियम के तहत की गई है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे के निर्देश पर कृषि उपज मंडी, मार्कफेड, राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त जांच टीम ने बुधवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम दिया। संयुक्त जांच दल की सख्त कार्रवाई प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक किसानों का ही धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। इसी क्रम में जिले में अब तक 4622 किसानों का 326 हेक्टेयर रकबा समर्पित कराया जा चुका है। जिला प्रशासन द्वारा सभी धान उपार्जन केंद्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सारंगढ़ विकासखंड में जब्ती संयुक्त दल द्वारा विकासखंड सारंगढ़ में की गई जांच के दौरान— राज ट्रेडर्स से 162.80 क्विंटल लक्ष्मी भास्कर ट्रेडर्स, भंवरपुर से 60 क्विंटल राधाकृष्णन ट्रेडर्स से 110 क्विंटल धान जब्त कर संबंधित गोदामों को सील किया गया। बरमकेला क्षेत्र में सबसे अधिक कार्रवाई विकासखंड बरमकेला में कई व्यापारियों के गोदामों में अवैध भंडारण पाया गया, जहां— श्री राधेश्याम ट्रेडर्स – 112 क्विंटल रिद्धि सिद्धि ट्रेडिंग – 116 क्विंटल महेंद्र अग्रवाल, रिसोरा – 112 क्विंटल रमेश अग्रवाल, दर्राभाठा – 88 क्विंटल नरेश सिदार, सोनबला – 100 क्विंटल अमर विलास पटेल, कालाखूंटा – 88 क्विंटल चंदन ट्रेडिंग – 400 क्विंटल महिमा ट्रेडर्स, भठली – 70 क्विंटल श्री श्याम ट्रेडर्स, भिखमपुरा – 22.40 क्विंटल जय भिक्षु ट्रेडर्स, सरिया – 32 क्विंटल धान जब्त कर सभी गोदामों को सील किया गया। बिलाईगढ़ विकासखंड में भी बड़ी जब्ती विकासखंड बिलाईगढ़ में भी अवैध भंडारण पर कार्रवाई करते हुए— मेसर्स रोहित देवांगन के प्रतिष्ठान से 511 क्विंटल गोविंदवन स्थित श्याम ट्रेडर्स से 50 बोरा (20 क्विंटल) आशीष अग्रवाल से 50 बोरा (20 क्विंटल) जय ट्रेडर्स, पंड्रीपानी से 120 क्विंटल धान जब्त किया गया। प्रशासन की चेतावनी जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध धान भंडारण और बिचौलियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बुलडोजर नहीं, कानून चले: कांग्रेस प्रवक्ता पूनम सिंह का भाजपा सरकार पर तीखा हमला

✍️ भागीरथी यादव   एमसीबी | नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पूनम सिंह ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इस कार्रवाई को सरकार की कानून-व्यवस्था में विफलता छिपाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि भाजपा शासन अब “न्याय” नहीं बल्कि “विध्वंस का तमाशा” दिखाकर जनता को गुमराह कर रहा है। पूनम सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ में अपराध बेलगाम हो चुके हैं, महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, और प्रशासन अपराध रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। ऐसे में बुलडोजर चलाकर सरकार अपनी असफलता पर पर्दा डालना चाहती है। प्रदेश में बढ़ते अपराध, प्रशासन बेबस कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रदेश के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्रतिदिन औसतन 8 बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही हैं। लूट, हत्या, चाकूबाजी और संगठित अपराध आम हो चुके हैं, लेकिन गृह विभाग और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कभी कमिश्नरी सिस्टम जैसे प्रयोगों की बात करती है, तो कभी बुलडोजर कार्रवाई कर असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाती है। अपराधी को फांसी मिले, लेकिन फैसला अदालत करे पूनम सिंह ने यह भी साफ किया कि नाबालिग से दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा –  “दुष्कर्म करने वाले अपराधी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर तत्काल फांसी की सजा दी जानी चाहिए, ताकि समाज में कानून का डर बने। लेकिन सजा देने का अधिकार अदालत का है, प्रशासन का नहीं।” सरकार से सीधे सवाल कांग्रेस प्रवक्ता ने बुलडोजर कार्रवाई की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा— यदि मकान अवैध था, तो प्रशासन अब तक क्यों सोया रहा? क्या आरोपी को पहले राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था? सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद क्या 15 दिन का नोटिस और पक्ष रखने का अवसर दिया गया? एक व्यक्ति के अपराध की सजा पूरे परिवार को क्यों? क्या निर्दोष परिजनों को बेघर करना ही भाजपा का “सुशासन” है? ‘विध्वंस न्याय नहीं’ पूनम सिंह ने कहा कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई और दुष्कर्म की सजा—दोनों अलग विषय हैं। इन्हें जोड़कर “मैसेज” देने की कोशिश करना केवल सरकारी अक्षमता और असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा— “भाजपा सरकार बुलडोजर की राजनीति छोड़कर बेटियों की वास्तविक सुरक्षा, मजबूत पुलिस व्यवस्था और त्वरित न्याय प्रणाली पर ध्यान दे। विध्वंस न्याय नहीं है, न्याय केवल कानून से होता है।”

रायपुर में पुलिसिंग का नया युग: 23 जनवरी से लागू होगा कमिश्नरी सिस्टम, अपराध पर कसेगा शिकंजा

✍️ भागीरथी यादव   रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को और अधिक सशक्त, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने शहर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है, जो 23 जनवरी से प्रभावशील होगी। इसके साथ ही रायपुर उन चुनिंदा शहरों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां आधुनिक और अधिकार-संपन्न पुलिस व्यवस्था लागू है। 21 थाने सीधे कमिश्नरी सिस्टम के अधीन नई व्यवस्था के तहत रायपुर शहर के 21 प्रमुख थाने अब सीधे पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के अंतर्गत काम करेंगे। इसका दायरा सिविल लाइन से लेकर खम्हारडीह थाना क्षेत्र तक रहेगा। शहर के संवेदनशील और व्यस्त इलाकों को इस सिस्टम में शामिल किए जाने से अपराध नियंत्रण में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। 37 वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई कमान कमिश्नरी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 37 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इससे पुलिस प्रशासनिक ढांचे में स्पष्टता आएगी और आदेश-निर्देशों के पालन में देरी नहीं होगी। क्या है पुलिस कमिश्नरी सिस्टम? पुलिस कमिश्नरी प्रणाली में पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेटी अधिकार प्राप्त होते हैं। यानी कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अहम फैसलों के लिए पुलिस को जिला प्रशासन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। धारा 144 लागू करना जुलूस, धरना-प्रदर्शन की अनुमति त्वरित प्रतिबंधात्मक कार्रवाई जैसे फैसले पुलिस कमिश्नर सीधे ले सकते हैं। आम जनता को क्या होगा फायदा? त्वरित कार्रवाई: अपराध या विवाद की स्थिति में पुलिस तुरंत निर्णय ले सकेगी। बेहतर कानून-व्यवस्था: संवेदनशील मामलों में देरी कम होगी। जवाबदेही तय: एकीकृत कमान होने से जिम्मेदारी स्पष्ट रहेगी। अपराध पर नियंत्रण: अपराधियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई संभव होगी। शहर की सुरक्षा को मिलेगी नई धार सरकार और पुलिस प्रशासन का मानना है कि कमिश्नरी सिस्टम से रायपुर में पुलिसिंग ज्यादा प्रोफेशनल, आधुनिक और जनता-केंद्रित होगी। बढ़ते शहरीकरण और आबादी के बीच यह व्यवस्था राजधानी की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस सिर्फ कानून की रक्षक नहीं, बल्कि त्वरित निर्णय लेने वाली मजबूत व्यवस्था के रूप में नजर आएगी।

नाबालिग से दुष्कर्म और वादाखिलाफी: कोर्ट ने दरिंदे को सुनाई 20 साल की कड़ी कैद

✍️ भागीरथी यादव   रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आई है। शादी का झांसा देकर 16 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती कर बीच मझधार में छोड़ने वाले आरोपी कार्तिक जायसवाल (25 वर्ष) को अदालत ने सख्त सजा सुनाई है। FTSC (पॉक्सो) के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेन्द्र साहू की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। शादी का झांसा देकर लूटी अस्मत अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला खरसिया थाना क्षेत्र का है। आरोपी कार्तिक जायसवाल पिछले दो साल से नाबालिग को पसंद करने और शादी करने का झांसा दे रहा था। जुलाई 2024 की एक रात उसने बहला-फुसलाकर पीड़िता को अपने पुराने घर बुलाया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। कोरबा तक किया पीछा, पीड़िता हुई 5 माह की गर्भवती घटना के बाद पीड़िता अपने परिजनों के साथ कोरबा शिफ्ट हो गई थी, लेकिन आरोपी ने वहां भी उसका पीछा नहीं छोड़ा। जब पीड़िता के माता-पिता काम पर बाहर जाते, तब कार्तिक वहां पहुंचकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इसी दौरान नाबालिग 5 माह की गर्भवती हो गई। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी ने साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद परिजनों ने 7 दिसंबर 2024 को खरसिया थाने में मामला दर्ज कराया। न्यायालय का कड़ा फैसला मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया। अपर लोक अभियोजक मोहन सिंह ठाकुर की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को कड़ी सजा से दंडित किया: सजा: 20 वर्ष का कठोर कारावास। अर्थदंड: 5 हजार रुपये का जुर्माना। अतिरिक्त सजा: जुर्माना न भरने पर 4 माह की अतिरिक्त जेल

छत्तीसगढ़ में इस्पात संयंत्र में भीषण विस्फोट, छह मजदूरों की दर्दनाक मौत, चार गंभीर

✍️ भागीरथी यादव   छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में गुरुवार को एक इस्पात संयंत्र में हुए भीषण हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। क्लिनिकल फर्नेस के दौरान हुए जोरदार ब्लास्ट में छह मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद संयंत्र परिसर में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। यह दर्दनाक घटना भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के ग्राम बकुलाही स्थित इस्पात प्लांट में हुई। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि आसपास काम कर रहे मजदूर भी दहशत में आ गए। घटना की सूचना मिलते ही बलौदाबाजार कलेक्टर दीपक सोनी, एसपी भावना गुप्ता, भाटापारा ग्रामीण पुलिस और बलौदाबाजार से अतिरिक्त पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रशासन और पुलिस की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को पहले भाटापारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए बिलासपुर रेफर कर दिया गया है। कलेक्टर दीपक सोनी और एसपी भावना गुप्ता ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि इस घटना में छह लोगों की मौत हुई है और चार घायल हैं। फिलहाल हादसे के कारणों की गहन जांच की जा रही है। साथ ही संयंत्र प्रबंधन से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं सुरक्षा मानकों में लापरवाही तो नहीं हुई। हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। 📹 देखें वीडियो –

रायपुर | आबकारी विभाग में नियुक्तियों पर ब्रेक, आदेश रद्द

  छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में नव नियुक्त उप निरीक्षकों को महज 24 घंटे के भीतर बड़ा झटका लगा है। विभाग द्वारा जारी नियुक्ति आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। इस संबंध में कार्यालय आबकारी आयुक्त ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि तकनीकी कारणों के चलते नियुक्ति प्रक्रिया को फिलहाल रद्द किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा–2024 की चयन सूची के आधार पर 85 अभ्यर्थियों को आबकारी उप निरीक्षक पद पर नियुक्ति दी गई थी। यह आदेश 21 जनवरी 2026 को जारी किया गया था, लेकिन अगले ही दिन आबकारी आयुक्त के निर्देश पर इसे वापस ले लिया गया। अचानक लिए गए इस फैसले से चयनित अभ्यर्थियों में असमंजस और निराशा का माहौल है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति निरस्तीकरण का कारण प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रकृति का है। हालांकि, आगे की प्रक्रिया को लेकर कोई विस्तृत जानकारी फिलहाल साझा नहीं की गई है।  

दुर्ग पुलिस की सख्त कार्रवाई, व्हाट्सऐप से चल रहे जुआ-सट्टा रैकेट पर शिकंजा

✍️ भागीरथी यादव     दुर्ग जिले में जुआ-सट्टा के खिलाफ पुलिस ने बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई करते हुए मोबाइल व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए अवैध सट्टा खिलाने व खेलने वालों पर करारा प्रहार किया है। पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 7 मोबाइल फोन और 23 हजार रुपए नगद सट्टा राशि जब्त की है। सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मुखबिर की सूचना पर त्वरित कार्रवाई पुलिस को 20 जनवरी 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि थाना भिलाई नगर क्षेत्र के सिविक सेंटर स्थित मुन्ना जूस कार्नर के पास कुछ लोग मोबाइल व्हाट्सऐप के जरिए जुआ-सट्टा खेल रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी और घेराबंदी कर संदेहियों को पकड़ा। मौके से रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नरेश देवांगन को पकड़ा, जिसके पास से एक मोबाइल फोन और 3,000 रुपए नगद सट्टा राशि बरामद की गई। वहीं उसके साथ मौजूद चिण्टू कुमार के पास से भी एक मोबाइल फोन और 5,000 रुपए नगद बरामद हुए। इस प्रकार मौके से कुल 8,000 रुपए नगद और 2 मोबाइल फोन जब्त किए गए। पुलिस ने दोनों के खिलाफ थाना भिलाई नगर में अपराध पंजीबद्ध कर तत्काल गिरफ्तार किया। जुआ-सट्टा माफियाओं में हड़कंप पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से जुआ-सट्टा कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। दुर्ग पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि ऑनलाइन माध्यम से हो रहे अवैध जुआ-सट्टा पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है और किसी भी सूरत में ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कहीं इस तरह की अवैध गतिविधियों की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

बिलासपुर से बड़ी खबर: मिड-डे मील में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, बच्चों की सेहत सर्वोपरि — वहीं बर्खास्त शिक्षक को अंतरिम राहत

✍️ भागीरथी यादव   बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अहम मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए एक ओर जहां बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है, वहीं दूसरी ओर एक शिक्षक के अधिकारों की रक्षा करते हुए न्यायिक संतुलन का स्पष्ट संदेश दिया है। मिड-डे मील मामला: दूषित भोजन पर हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान बिलासपुर में मिड-डे मील खाने से 25 बच्चों के बीमार पड़ने के गंभीर मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस घटना को बेहद संवेदनशील मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत जवाब तलब किया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बच्चों को दूषित भोजन परोसा गया था। इस लापरवाही के चलते तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। कोर्ट के निर्देश पर प्रभावित 25 बच्चों के परिजनों को प्रति बच्चा 5,000 रुपये मुआवजा दिया गया, जिसका वितरण 19 जनवरी 2026 को किया गया। इतना ही नहीं, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हाईकोर्ट ने सेंट्रल किचन सिस्टम लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी आदेश दिया गया कि मिड-डे मील वितरण स्थल को बच्चों के अनुकूल, स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता और प्रशासन की जवाबदेही तय की जाएगी। फर्जी दस्तावेज मामला: बर्खास्त शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत दूसरी ओर, बिलासपुर में ही फर्जी दस्तावेज पेश करने के आरोप में बर्खास्त किए गए शिक्षक ईश्वरी निर्मलकर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ईश्वरी निर्मलकर सहित छह याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने बर्खास्तगी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। ईश्वरी निर्मलकर की नियुक्ति वर्ष 2007 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के रूप में हुई थी। 2009 में सेवा नियमित 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में एब्जॉर्प्शन 2023 में प्राइमरी स्कूल हेडमास्टर के पद पर पदोन्नति हालांकि, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है, लेकिन उसका ट्रायल अभी लंबित है। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी, धमतरी द्वारा 6 जनवरी 2026 को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए यह संकेत दिया कि जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक कर्मचारी के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। न्यायालय का स्पष्ट संदेश इन दोनों मामलों में हाईकोर्ट का रुख यह दर्शाता है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है वहीं शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है किसी भी निर्णय में उचित प्रक्रिया और संवैधानिक संतुलन अनिवार्य है हाईकोर्ट की यह सक्रियता न केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि प्रशासन के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि लापरवाही और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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