भारतीय हॉकी के 100 वर्ष पूरे – देशभर में भव्य शताब्दी समारोह 7 नवंबर को
✍️ भागीरथी यादव नई दिल्ली। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भारतीय हॉकी के 100 वर्ष (1925–2025) पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य शताब्दी समारोह आयोजित किए जाने की घोषणा की है। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम 7 नवंबर को नई दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में आयोजित होगा। समारोह का शुभारंभ सुबह 8:30 बजे होगा। कार्यक्रम का आयोजन खेल मंत्रालय और हॉकी इंडिया के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। इस अवसर पर देश के 550 से अधिक जिलों में भी एक साथ उत्सव कार्यक्रम होंगे, जिनमें 1,400 से अधिक हॉकी मैच खेले जाएंगे। प्रत्येक जिले में एक पुरुष और एक महिला मैच आयोजित होगा — जो समानता और समावेशिता का प्रतीक होगा। डॉ. मांडविया ने कहा, > “भारत हॉकी के 100 गौरवशाली वर्षों का उत्सव मना रहा है। यह हमारे राष्ट्रीय गौरव, परिश्रम और दृढ़ता की शताब्दी है। यह हमारे उन नायकों को याद करने का अवसर है जिन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाया। हॉकी सिर्फ़ खेल नहीं, यह हमारी पहचान और सामूहिक भावना का प्रतीक है।” मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में हॉकी की शताब्दी यात्रा को दर्शाने वाली विशेष फोटो प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर आधुनिक दौर की हॉकी तक की दुर्लभ तस्वीरें, स्मृति चिह्न और अभिलेख प्रदर्शित किए जाएंगे। इस अवसर पर “भारतीय हॉकी के 100 वर्ष” नामक आधिकारिक स्मारक संस्करण का भी विमोचन किया जाएगा। यह प्रकाशन भारतीय हॉकी की विजयों, चुनौतियों और पुनरुत्थान की गाथा को दर्ज करेगा और उन खिलाड़ियों को श्रद्धांजलि देगा जिन्होंने इस खेल को गौरव के शिखर पर पहुंचाया। देशभर में आयोजित हो रहे ये कार्यक्रम न केवल हॉकी की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाएंगे, बल्कि युवा खिलाड़ियों को हॉकी से जुड़ने की नई प्रेरणा भी देंगे।
इसरो ने रचा इतिहास, भारतीय नौसेना का सबसे उन्नत संचार उपग्रह जीसैट-7आर सफलतापूर्वक लॉन्च
✍️ भागीरथी यादव श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-7आर (सीएमएस-03) को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर देश की अंतरिक्ष तकनीक में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। यह उपग्रह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे उन्नत और शक्तिशाली संचार प्लेटफॉर्म है, जो नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार प्रणाली और समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यह उपग्रह पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है तथा इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया। लगभग 4,400 किलोग्राम भार वाला यह भारत का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है। इसमें कई उन्नत तकनीकी घटक शामिल हैं, जिन्हें विशेष रूप से भारतीय नौसेना की परिचालन और सामरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। हिंद महासागर क्षेत्र में मिलेगा व्यापक संचार कवरेज जीसैट-7आर उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापक और बेहतर दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा। इसके पेलोड में लगाए गए उन्नत ट्रांसपोंडर विभिन्न संचार बैंडों पर ध्वनि, डेटा और वीडियो लिंक को सपोर्ट करने में सक्षम हैं। उच्च क्षमता वाली बैंडविड्थ के साथ यह उपग्रह भारतीय नौसेना के जहाजों, विमानों, पनडुब्बियों और संचालन केंद्रों के बीच सुरक्षित, निर्बाध और वास्तविक समय संचार सुनिश्चित करेगा। इसके परिणामस्वरूप नौसेना की सैन्य और सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम इसरो ने मिशन की सफलता की जानकारी देते हुए कहा, > “सीएमएस-03 सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ।” जटिल वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच जीसैट-7आर को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह मिशन इस बात का प्रतीक है कि भारत अपनी उन्नत तकनीक का उपयोग कर राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा करने में सक्षम है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी बधाई केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसरो की टीम को बधाई देते हुए कहा, > “भारत का ‘बाहुबली’ रॉकेट एलवीएम3-एम5, सीएमएस-03 उपग्रह के साथ आसमान में उड़ान भर रहा है। यह अब तक का सबसे भारी उपग्रह है जिसे भारतीय धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में भेजा गया है। इसरो एक के बाद एक सफलता के नए अध्याय लिख रहा है।” उन्होंने इस मिशन की सफलता का श्रेय इसरो की मेहनती टीम को देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन के लिए भी धन्यवाद दिया। इसरो का यह सफल प्रक्षेपण न केवल भारत की अंतरिक्ष शक्ति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश की सामरिक और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रचा इतिहास, दक्षिण अफ्रीका को हराकर जीता विश्व कप
✍️ भागीरथी यादव मुंबई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने डी. वाई. पाटिल स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर इतिहास रच दिया। इस शानदार जीत के साथ टीम इंडिया ने पहली बार आईसीसी महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने न केवल टीम को चैंपियन बनाया, बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। वह महिला विश्व कप जीतने वाली सबसे अधिक उम्र की कप्तान बन गई हैं। हरमनप्रीत ने यह उपलब्धि 36 वर्ष 239 दिन की उम्र में हासिल की। टूर्नामेंट के दौरान हरमनप्रीत का बल्ला भी जमकर चला। उन्होंने 9 मैचों की 8 पारियों में 32.50 की औसत से 260 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 89.04 रहा। साथ ही, उन्होंने आईसीसी महिला वनडे वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैचों में सबसे अधिक रन बनाने के मामले में ऑस्ट्रेलिया की दिग्गज खिलाड़ी बेलिंडा क्लार्क को भी पीछे छोड़ दिया। फाइनल मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 298 रन बनाए। शेफाली वर्मा ने 87, दीप्ति शर्मा ने 58 और स्मृति मंधाना ने 45 रनों की शानदार पारी खेली। भारत की सलामी जोड़ी ने 100 रन की साझेदारी कर टीम को मजबूत शुरुआत दी। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 246 रन पर ऑलआउट हो गई। दीप्ति शर्मा ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए 5 विकेट चटकाए, जबकि शेफाली वर्मा ने 2 विकेट लिए। दक्षिण अफ्रीका की ओर से लौरा वोल्वार्ड्ट ने सर्वाधिक 101 रन बनाए, लेकिन वह अपनी टीम को जीत नहीं दिला सकीं। फाइनल के बाद हरमनप्रीत कौर ने कहा, > “यह जीत पूरे टीम प्रयास का नतीजा है। बीसीसीआई और सहयोगी स्टाफ ने हम पर भरोसा बनाए रखा। यह अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। हम हर दिन बेहतर बनने की कोशिश जारी रखेंगे।” वहीं, आईपीएल अध्यक्ष अरुण धूमल ने इस ऐतिहासिक जीत की तुलना 1983 में भारतीय पुरुष टीम की विश्व कप जीत से की। उन्होंने कहा, > “भारतीय महिला क्रिकेट के लिए यह एक यादगार दिन है। 1983 में पुरुष टीम ने जो किया था, उसे आज महिलाओं ने दोहराया है। यह जीत देश में महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगी।” भारत की यह ऐतिहासिक जीत न केवल क्रिकेट इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगी, बल्कि देशभर में महिला क्रिकेट को नई पहचान और प्रेरणा भी देगी।
आधार कार्ड नियमों में बड़ा बदलाव, अब ऑनलाइन ही कर सकेंगे अपडेट
✍️ भागीरथी यादव नई दिल्ली। नए महीने की शुरुआत के साथ ही भारतीय नागरिकों की पहचान से जुड़े अहम दस्तावेज आधार कार्ड को लेकर नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब आधार कार्ड में किसी भी तरह का बदलाव कराने के लिए आधार केंद्र जाने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने प्रक्रिया को और आसान बनाते हुए कहा है कि अब कार्डधारक अपनी डेमोग्राफिक जानकारी — जैसे नाम, पता, जन्म तिथि और मोबाइल नंबर — को ऑनलाइन ही अपडेट कर सकेंगे। यूआईडीएआई के मुताबिक, फिंगरप्रिंट और फोटो जैसे बायोमैट्रिक अपडेट के लिए 125 रुपये फीस देनी होगी। हालांकि, 5 से 7 वर्ष के बच्चों के लिए पहली बार यह प्रक्रिया मुफ्त रहेगी, जबकि 15 से 17 वर्ष के कार्डधारकों को दो बार तक निशुल्क अपडेट की सुविधा दी जाएगी। यदि कार्डधारक एनरोलमेंट नंबर, जेंडर, जन्म तिथि, पता, मोबाइल या ईमेल एड्रेस जैसी जानकारी में बदलाव करना चाहता है, तो बायोमैट्रिक अपडेट के साथ यह मुफ्त होगा। अलग से करवाने पर 75 रुपये शुल्क देना होगा। यूआईडीएआई ने बताया कि पहचान और पते से जुड़े डॉक्यूमेंट ऑनलाइन 14 जून 2026 तक बिना शुल्क के सबमिट किए जा सकेंगे। इसके बाद इस सेवा पर शुल्क लागू हो जाएगा। आधार रिप्रिंट कराने के लिए अब 40 रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं, होम एनरोलमेंट सर्विस के तहत घर पर जाकर आधार बनवाने की सुविधा के लिए पहले व्यक्ति से 700 रुपये, जबकि उसी पते पर अन्य व्यक्तियों से 350 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जाएगा। इसके साथ ही यूआईडीएआई ने दोहराया है कि 31 दिसंबर 2025 से पहले पैन कार्ड को आधार से लिंक कराना अनिवार्य है, अन्यथा पैन निष्क्रिय माना जाएगा।
मोकामा मर्डर केस: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का बड़ा हमला — “अपराधियों के सरंक्षण में चल रहा चुनाव, डर है सूरजभान और लल्लू मुखिया की भी हत्या हो सकती है”
✍️ भागीरथी यादव मोकामा विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को सियासी हिंसा ने चुनावी माहौल को गर्मा दिया। घोसवरी थाना क्षेत्र के बासवान चक में जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के बीच पथराव और झड़प के बाद राजद के वरिष्ठ कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। देर रात पूर्णिया सांसद पप्पू यादव मृतक दुलारचंद के परिजनों से मिलने पहुंचे और वहां उन्होंने सरकार, प्रशासन और चुनाव आयोग पर तीखे सवाल उठाए। — 🔴 “दुलारचंद को जानवर की मौत मारी गई” – पप्पू यादव पप्पू यादव ने कहा कि मोकामा और बाढ़ क्षेत्र आज भी अपराध के गढ़ बने हुए हैं। “16 साल में बिहार को अपराध का राज्य बना दिया गया है। जदयू ने बक्सर से लेकर मोकामा तक अपराधी छवि वाले लोगों को टिकट दिया है,” उन्होंने कहा। उन्होंने आगे जोड़ा — “दुलारचंद को जिस तरह मारा गया, वह किसी इंसान की नहीं, जानवर की मौत थी। अपराधी खुलेआम पुलिस के संरक्षण में घूम रहे हैं, और प्रशासन विपक्षी दलों को ही फंसाने में जुटा है।” — ⚠️ “सूरजभान सिंह और लल्लू मुखिया की हत्या की आशंका” पप्पू यादव ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि बाढ़ के उम्मीदवार लल्लू मुखिया और विपक्ष के प्रत्याशी सूरजभान सिंह की जान को भी खतरा है। “हमें डर है कि इनकी भी हत्या कर दी जाएगी, हालात बहुत गंभीर हैं,” उन्होंने कहा। — ⚖️ “चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं, करेंगे हाईकोर्ट में याचिका” पप्पू यादव ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “दिल्ली से लेकर भागलपुर तक एक ‘सुपर सीएम’ का राज चलता है। ऐसे माहौल में निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद नहीं की जा सकती।” उन्होंने चेतावनी दी कि वे हाईकोर्ट में जाकर अधिकारियों की कॉल डिटेल्स की जांच की मांग करेंगे। — 🔥 अनंत सिंह पर सीधा वार – “पहले ही मिलनी चाहिए थी फांसी” अनंत सिंह पर हमला बोलते हुए पप्पू यादव ने कहा, “पुटुस हत्याकांड में ही उसे फांसी हो जानी चाहिए थी, लेकिन कुछ लोग पैसा लेकर पलट गए। अब इस मामले में स्पीड ट्रायल होना चाहिए और दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।” — 🗳️ “बीजेपी माहौल को और डरावना बना रही है” सांसद ने कहा कि बीजेपी अब पूरे जोर से “आतंक के माहौल” को बढ़ाकर विपक्ष की सीटें कमजोर करने की कोशिश में है। उन्होंने कहा — “बिहार में अब फेयर चुनाव की उम्मीद नहीं बची। हर जाति को टारगेट किया जा रहा है, प्रशासन मूकदर्शक बना है।” — 🕯️ मोकामा में दुलारचंद यादव की मौत ने बिहार की राजनीति को हिला दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि चुनाव आयोग और प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं, क्योंकि हालात सामान्य कहने लायक नहीं हैं।
सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट — सोना 1.18 लाख के नीचे, निवेशकों की चिंता बढ़ी
✍️ भागीरथी यादव नई दिल्ली। सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और निवेशकों के बदलते रुझान के बीच भारत में भी सोने-चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोना 3,034 रुपए सस्ता होकर 1,18,043 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इससे पहले यह कीमत 1,21,077 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 22 कैरेट सोने के दाम में भी गिरावट देखी गई है — अब इसकी कीमत 1,08,127 रुपए प्रति 10 ग्राम रह गई है, जबकि पहले यह 1,10,907 रुपए थी। वहीं 18 कैरेट सोना घटकर 88,532 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जो पहले 90,809 रुपए था। सोने के साथ-साथ चांदी भी सस्ती हुई है। चांदी की कीमत 3,135 रुपए गिरकर 1,41,896 रुपए प्रति किलो रह गई, जबकि पहले इसका भाव 1,45,031 रुपए प्रति किलो था। आईबीजेए रोजाना दो बार — दोपहर 12 बजे और शाम 5 बजे — ताजा दरें जारी करती है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी गिरावट का रुख जारी है। सोना (5 दिसंबर 2025 कॉन्ट्रैक्ट): 1.87% घटकर 1,18,700 रुपए प्रति 10 ग्राम चांदी (5 दिसंबर 2025 कॉन्ट्रैक्ट): 0.74% घटकर 1,42,301 रुपए प्रति किलो एलकेपी सिक्योरिटीज के विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील पर बातचीत फिर से शुरू होने से सोने में निवेश का रुझान कमजोर पड़ा है। निवेशकों का ध्यान अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के फैसले पर केंद्रित है। उन्होंने आगे कहा कि, “सोने पर दबाव बना हुआ है। इसका सपोर्ट स्तर 1,16,500 से 1,18,000 रुपए के बीच है, जबकि रुकावट का स्तर 1,21,000 से 1,22,000 रुपए के बीच देखा जा रहा है।” अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट का माहौल है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स (COMEX) पर सोना 1.98% गिरकर 3,939 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.52% घटकर 46.53 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगर वैश्विक स्तर पर आर्थिक स्थिरता और ब्याज दरों में सख्ती का रुख जारी रहा, तो आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
श्रेयस अय्यर सिडनी वनडे में घायल — बीसीसीआई ने दी हेल्थ अपडेट, हालत स्थिर
✍️ भागीरथी यादव सिडनी/नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में खेले गए वनडे सीरीज के तीसरे मैच के दौरान एक कैच लपकने के प्रयास में गंभीर रूप से घायल हो गए। चोट की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कुछ समय तक उन्हें आईसीयू में रखा गया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंगलवार को जारी बयान में बताया कि अय्यर के पेट में गंभीर चोट लगी थी, जिसके कारण आंतरिक रक्तस्राव (internal bleeding) हुआ था। बोर्ड ने कहा, “चोट की पहचान समय रहते कर ली गई और तुरंत इलाज शुरू किया गया। इलाज के बाद रक्तस्राव पर नियंत्रण पा लिया गया है। श्रेयस अय्यर की हालत अब स्थिर है और वे चिकित्सकीय निगरानी में हैं।” बीसीसीआई के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह माना जा रहा था कि चोट पसलियों में है, लेकिन बाद में स्कैन में पता चला कि तिल्ली (spleen) में चोट लगी है। इसी वजह से अय्यर को सिडनी के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया था। अब उन्हें आईसीयू से बाहर लाया जा चुका है और उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है। बोर्ड की मेडिकल टीम सिडनी और भारत, दोनों जगहों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के संपर्क में है और उनकी रिकवरी पर लगातार नजर रखी जा रही है। गौरतलब है कि श्रेयस अय्यर पहले भी चोटों के कारण लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रह चुके हैं। हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी के बाद वे ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज के लिए टीम में लौटे थे। सीरीज के पहले मैच में वे रन नहीं बना सके, लेकिन दूसरे वनडे में उन्होंने शानदार 61 रन की पारी खेली और रोहित शर्मा के साथ 118 रन की साझेदारी कर भारत की पारी को संभाला। क्रिकेट जगत उम्मीद कर रहा है कि श्रेयस अय्यर जल्द स्वस्थ होकर एक बार फिर टीम इंडिया के लिए मैदान पर वापसी करेंगे।
भारत की पहली डिजिटल जनगणना की तैयारी तेज — उत्तर प्रदेश बना देश की सबसे बड़ी फील्ड प्रयोगशाला
✍️ भागीरथी यादव लखनऊ। भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी फील्ड प्रयोगशाला घोषित किया गया है। जनगणना 2027 की तैयारी के तहत राज्य के तीन क्षेत्रों — अनूपशहर (जनपद बुलंदशहर), मिहीपुरवा (जनपद बहराइच) और प्रयागराज नगर निगम के सात वार्डों में 10 से 30 नवंबर तक ‘प्री टेस्ट’ आयोजित किया जाएगा। यह प्रायोगिक अभ्यास देश की अब तक की सबसे व्यापक और तकनीकी रूप से उन्नत डेटा संग्रह प्रक्रिया का हिस्सा होगा। मुख्य सचिव एस. पी. गोयल की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की पहली बैठक में डिजिटलीकरण की रूपरेखा और कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे जनगणना कार्य में पूर्ण समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि, “जनगणना देश की जनसांख्यिकी और विकास योजनाओं की रीढ़ है, इसलिए सटीकता, पारदर्शिता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।” जनगणना निदेशक शीतल वर्मा ने बताया कि इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। सभी डेटा संग्रह, प्रविष्टि, सत्यापन और मॉनिटरिंग कार्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जाएंगे। राज्य में लगभग छह लाख कार्मिकों को इस कार्य में लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी नए जनपद, तहसील, नगर निकाय या ग्राम पंचायत के गठन पर रोक रहेगी। इसके साथ ही पहली बार नागरिकों को ‘स्व-गणना (Self Enumeration)’ की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे वे स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। राज्य में एक स्टेट नोडल ऑफिस की स्थापना भी की जाएगी, जो डेटा समन्वय, निगरानी और प्रगति रिपोर्टिंग का कार्य संभालेगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, सचिव नगर विकास अनुज कुमार झा, विशेष सचिव सामान्य प्रशासन जुहैर बिन सगीर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। डिजिटल जनगणना के माध्यम से हर नागरिक का डेटा सुरक्षित, केंद्रीकृत और तुरंत उपलब्ध रहेगा। इससे नीतियों व विकास योजनाओं के निर्माण में वास्तविक समय के आंकड़ों का उपयोग संभव होगा और भारत को वैश्विक डेटा गवर्नेंस मॉडल की दिशा में अग्रसर करेगा।
अर्जन के बाद जन्मे पुत्र को मिली न्याय की रोशनी — सुप्रीम कोर्ट ने एसईसीएल की याचिका की खारिज, खुले रोजगार के द्वार
✍️ भागीरथी यादव कोरबा। वर्षों से न्याय और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे खातेदार परिवारों के चेहरों पर आखिरकार उम्मीद की किरण झलक उठी है। सुप्रीम कोर्ट ने एसईसीएल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें अर्जन के बाद जन्मे पुत्र को रोजगार देने के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस निर्णय के साथ अब यह साफ हो गया है कि अर्जन के बाद जन्मा व्यक्ति भी अपने पिता के खातेदारी अधिकारों के आधार पर रोजगार पाने का हकदार है। — राहुल जायसवाल के संघर्ष ने बदली व्यवस्था की सोच कुसमुंडा परियोजना के खातेदार के पुत्र राहुल जायसवाल ने वर्ष 2019 में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका (WPS 6186/2019) दायर की थी। हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में राहुल को तीन माह के भीतर रोजगार देने का आदेश दिया। लेकिन एसईसीएल ने इस फैसले के खिलाफ डबल बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट तक अपील की — दोनों ही स्तरों पर एसईसीएल की याचिका खारिज कर दी गई। यह फैसला केवल राहुल जायसवाल के लिए ही नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के लिए भी राहत लेकर आया है जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे। — तीन वर्षों से धरना, संघर्ष और उम्मीदों की यात्रा माटी अधिकार मंच के नेतृत्व में खातेदार परिवारों ने तीन वर्षों तक अनवरत आंदोलन किया। बिलासपुर मुख्यालय से लेकर कुसमुंडा, गेवरा और दीपका परियोजना तक — हर जगह धरना, गेट जाम और प्रदर्शन हुए। 13–14 अगस्त को एसईसीएल मुख्यालय में अनिश्चितकालीन आंदोलन हुआ और 9 सितंबर को कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय के सामने विशाल विरोध प्रदर्शन। इसके बाद 14 अगस्त, 13 अक्टूबर और 14 अक्टूबर को त्रिपक्षीय वार्ताएं हुईं — जिसमें प्रशासन ने आश्वासन दिया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद नीति बनाकर सभी पात्रों को रोजगार प्रदान किया जाएगा। — “अब लड़ाई अंतिम दौर में है” – ब्रजेश कुमार श्रीवास माटी अधिकार मंच के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार श्रीवास ने कहा — > “एसईसीएल के अधिकारी लगातार लोगों को गुमराह कर रहे थे कि कोर्ट का आदेश केवल एक व्यक्ति पर लागू होगा। लेकिन यह निर्णय सार्वभौम सिद्धांत पर आधारित है — अब हर अर्जन के बाद जन्मा खातेदार पुत्र रोजगार पाने का हकदार है।” उन्होंने आगे कहा — > “जब तक हर पात्र परिवार को उसका अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक संगठन का संघर्ष जारी रहेगा।” — आगामी रणनीति 2 नवंबर को तय होगी माटी अधिकार मंच की अगली बैठक 2 नवंबर को आयोजित की जाएगी। इसमें रोजगार की प्रक्रिया, खाता संयोजन और अन्य लंबित मुद्दों पर चर्चा कर आंदोलन की नई रणनीति तय की जाएगी। यदि एसईसीएल ने आदेश लागू करने में देरी या आनाकानी की, तो संगठन मुख्यालय और एरिया स्तर पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दे चुका है। — एक उम्मीद, जो अब हकीकत बनी यह निर्णय उन परिवारों के लिए एक नई सुबह लेकर आया है, जिनकी पीढ़ियाँ अपनी मिट्टी के बदले न्याय की आस में खड़ी थीं। अब माटी अधिकार मंच के संघर्ष और न्यायपालिका के फैसले ने यह साबित कर दि या है — > “जिस धरती ने दिया, उसका हक कोई नहीं छीन सकता।”
अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण पूर्ण, तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दी श्रद्धालुओं को जानकारी
✍️ भागीरथी यादव अयोध्या। लंबे इंतज़ार के बाद अब भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर निर्माण से जुड़े सभी कार्य अब पूर्ण हो चुके हैं। ट्रस्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि मुख्य मंदिर के साथ-साथ परकोटा क्षेत्र के छह मंदिर — भगवान शिव, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, सूर्यदेव, देवी भगवती, देवी अन्नपूर्णा और शेषावतार मंदिर — का भी निर्माण कार्य संपन्न हो गया है। सभी मंदिरों पर ध्वजदंड एवं कलश स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही सप्त मण्डप के अंतर्गत आने वाले महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषिपत्नी अहिल्या मंदिर भी पूरी तरह बनकर तैयार हैं। संत तुलसीदास मंदिर का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो गया है, जबकि परिसर में जटायु और गिलहरी की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी हैं। ट्रस्ट ने बताया कि दर्शनार्थियों की सुविधा से जुड़े सभी कार्य पूर्ण हो चुके हैं। एलएंडटी द्वारा सड़कों और फ्लोरिंग पर पत्थर लगाने का कार्य तथा जीएमआर द्वारा भूमि सौंदर्य, हरियाली और लैंडस्केपिंग का कार्य तेजी से जारी है। वहीं 3.4 किलोमीटर लंबी चारदीवारी, ट्रस्ट कार्यालय, अतिथि गृह और सभागार जैसे कार्य प्रगति पर हैं, जिनका सीधा संबंध जनता से नहीं है। गौरतलब है कि अयोध्या में 15 जनवरी 2021 से मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था। इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन किया था। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 मार्च 2020 को रामलला को वैकल्पिक गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया था। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई थी। 📍अब अयोध्या का श्रीराम मंदिर अपने पूर्ण भव्य रूप में श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु तैयार है।
















