दीपका के शासकीय महाविद्यालय में अव्यवस्थाओं पर समिति का विरोध, DMF-CSR से सुधार की मांग

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दीपका/कोरबा।

कोरबा जिले के दीपका (झाबर) स्थित शासकीय महाविद्यालय में लगातार बढ़ रही अव्यवस्थाओं और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने गंभीर चिंता जताई है। शुक्रवार को समिति ने जिला कलेक्टर-सह-अध्यक्ष, जिला खनिज न्यास (DMF) प्रबंधन समिति और एसईसीएल के CMD को ज्ञापन सौंपकर कॉलेज की बदहाल स्थिति को तत्काल सुधारने की मांग की।

समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने बताया कि वर्ष 2008 में स्थापित यह महाविद्यालय आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। कॉलेज में अध्ययनरत 345 विद्यार्थियों में 280 छात्राएं हैं, लेकिन परिसर में न तो बाउंड्री वॉल है और न ही इंट्री गेट। मुख्य सड़क से कॉलेज तक का 100 मीटर का मार्ग अत्यंत संकरा और जर्जर है, जिससे छात्राओं की सुरक्षा पर सीधा खतरा बना हुआ है।

ज्ञापन में बताया गया कि कॉलेज कुल 5 स्थायी और 5 अतिथि प्राध्यापकों के सहारे संचालित हो रहा है। विषयवार व्याख्याताओं की कमी के कारण 900 स्वीकृत सीटों में से 555 सीटें हर वर्ष खाली रह जाती हैं। वहीं खेल शिक्षक, कंप्यूटर ऑपरेटर, लैब असिस्टेंट और लाइब्रेरियन सहित सभी सहायक पद रिक्त पड़े हैं।

समिति ने DMF और SECL के CSR फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाए। बताया कि दीपका, झाबर, बेलटिकरी सहित आसपास के गांव कोयला खनन और कोलवाशरी से प्रभावित क्षेत्र हैं, ऐसे में DMF और CSR का प्राथमिक उद्देश्य शिक्षा व बुनियादी ढांचे का विकास होना चाहिए। इसके बावजूद कॉलेज की छत से सीपेज, टूटी खिड़कियां और जर्जर भवन आज भी सुधार की प्रतीक्षा में हैं।

समिति ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से इन प्रमुख मांगों पर तत्काल कार्यवाही की अपील की है—

1. DMF फंड से बाउंड्री वॉल, इंट्री गेट और जर्जर मुख्य सड़क का निर्माण।

2. SECL CSR फंड से मानक खेल मैदान व भवन की व्यापक मरम्मत।

3. उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सभी रिक्त शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों पर छह माह में नियुक्ति।

समिति ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र कार्यवाही न होने पर वे क्षेत्र के छात्रों व अभिभावकों के साथ बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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