
✍️ भागीरथी यादव
रायपुर, 12 नवंबर 2025
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में मछलीपालन ने पिछले 25 वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। राज्य निर्माण के समय जहां मत्स्य उत्पादन 574 मीट्रिक टन था, वहीं अब यह बढ़कर 16 हजार मीट्रिक टन से अधिक हो गया है। इसी तरह मत्स्य बीज उत्पादन भी 149 लाख से बढ़कर 728 लाख फिंगरलिंग्स तक पहुंच गया है।
राज्य सरकार की नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं से जिले के 10 हजार से ज्यादा मत्स्यपालक लाभान्वित हुए हैं। मत्स्यपालन को कृषि का दर्जा मिलने से किसानों को क्रेडिट कार्ड सुविधा, ब्याजमुक्त ऋण और बिजली-बिल में छूट का लाभ मिल रहा है।

जिले में तालाबों की संख्या 757 से बढ़कर 4852 और कुल जलक्षेत्र 3888 हेक्टेयर हो गया है, जिनमें 97 प्रतिशत क्षेत्र में सक्रिय मछली पालन हो रहा है। बस्तर अब मत्स्य बीज में आत्मनिर्भर होकर आसपास के जिलों और ओडिशा को भी आपूर्ति कर रहा है।
बायोफ्लॉक तकनीक और झींगा पालन जैसी आधुनिक पद्धतियों से मछुआरों की आमदनी में बढ़ोतरी हुई है। मत्स्यपालन विभाग के उप संचालक मोहन राणा ने कहा कि किसानों के परिश्रम और सरकारी योजनाओं के समन्वय से बस्तर में “नीली क्रांति” का नया दौर शुरू हो गया है।






