बिलासपुर में छत्तीसगढ़ी संस्कृति का विराट उत्सव—48वाँ रावत नाचा महोत्सव

✍️ भागीरथी यादव

 

बिलासपुर। लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान आज परंपरा, संस्कृति और मान्यता का अद्भुत संगम बन गया। अवसर था—यदुवंशी समाज की अनूठी पहचान रावत नाचा के 48वें भव्य महोत्सव का, जहाँ हजारों दर्शकों की मौजूदगी ने पूरे प्रांगण को उत्सवमय कर दिया।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय पारंपरिक रावत नाचा वेशभूषा में जब मंच पर पहुंचे, तो मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। महोत्सव स्थल पर पहुंचने पर संरक्षक श्री कालीचरण यादव और समिति पदाधिकारियों ने पुष्पहार पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री तथा विशिष्ट अतिथियों ने भगवान श्रीकृष्ण के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर विधिवत कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

 

सत्ता और समाज का अनोखा संगम—बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

 

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, तखतपुर विधायक श्री धर्मजीत सिंह, बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक, बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला, चंद्रपुर विधायक श्री रामकुमार यादव, कोटा विधायक श्री अटल श्रीवास्तव, मस्तूरी विधायक श्री दिलीप लहरिया और महापौर सुश्री पूजा विधानी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

 

मुख्यमंत्री साय का भावपूर्ण संबोधन—‘तेल फूल में लइका बाढ़े…’ गाकर जीता दिल

 

राउत नाचा दलों के मध्य पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की इस अनूठी परंपरा को सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने दोहा “तेल फूल में लइका बाढ़े…” गाकर यदुवंशी समाज को आशीर्वचन दिया और कहा—

 

“रावत नाचा जैसी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों को मार्ग दिखाती है और हमारी पहचान को जीवित रखती है।”

 

इसके बाद मुख्यमंत्री ढोल–नगाड़ों की धुन पर कलाकारों के साथ झूमते भी नज़र आए, जिससे पूरा मैदान उत्साह से भर उठा।

 

मंच से गूँजी संस्कृति और समाज को समर्पित बातें

 

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने रावत नाचा को यदुवंशी समाज के पराक्रम, कला और सामूहिक चेतना का अप्रतिम प्रतीक बताया।

 

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने 48 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को समाज की एकजुटता और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण कहा।

 

पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री अमर अग्रवाल ने रावत नाचा को बिलासपुर की “गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर” बताया।

 

शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि यदुवंशी समाज घर–घर जाकर सर्व समाज की मंगलकामना करने की पावन परंपरा निभाता है।

 

 

रावत नाचा—47 वर्षों की परंपरा से 48वें अध्याय तक

 

महोत्सव के संरक्षक डॉ. कालीचरण यादव ने स्वागत उद्बोधन में रावत नाचा की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता को वर्षों से मजबूत आधार प्रदान करता आ रहा है।

 

मुख्यमंत्री कलाकारों के बीच—लोकनृत्य की ऊर्जा से सराबोर मैदान

 

मुख्यमंत्री जब पारंपरिक परिधान में नर्तक दलों के बीच पहुंचे और ढोल–मृदंग की थाप पर उनके साथ झूमकर नाचा, तब माहौल चरम आनंद और गर्व से भर गया। नृत्य दलों की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

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    ✍️ भागीरथी यादव     छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। पांडुका वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम टोनहीडबरी में एक तेंदुए की लाश मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को कुएं से बाहर निकाला। जानकारी के अनुसार, गांव से लगे खेत में बने एक खुले कुएं में ग्रामीणों ने तेंदुए को पड़ा देखा। पास जाकर देखने पर उसकी मौत की पुष्टि हुई। आशंका जताई जा रही है कि तेंदुआ रात के समय शिकार की तलाश में आबादी की ओर आया होगा और अंधेरे में संतुलन बिगड़ने या शिकार का पीछा करते हुए खुले कुएं में गिर गया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत सक्रिय हो गए। गरियाबंद के वन मंडलाधिकारी (DFO) शासिगानंदन स्वयं अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और पूरी स्थिति का जायजा लिया। उनकी निगरानी में ही तेंदुए के शव को सुरक्षित तरीके से कुएं से बाहर निकाला गया। वन विभाग ने तेंदुए की मौत के वास्तविक कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल प्राथमिक तौर पर इसे दुर्घटना माना जा रहा है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इलाके में शिकारियों द्वारा कोई जाल तो नहीं बिछाया गया था। इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में खुले कुओं से होने वाले खतरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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