
✍️ भागीरथी यादव
मनेंद्रगढ़।
मध्यप्रदेश से मनेंद्रगढ़ तक फैले अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस बहुचर्चित मामले में भाजपा पार्षद के पुत्र एवं युवा मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष रवि जायसवाल ने शुक्रवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
पूरा मामला 18 नवंबर 2025 का है, जब झगड़ाखांड थाना क्षेत्र में पुलिस ने मध्यप्रदेश से अवैध शराब की खेप लेकर आ रहे दो तस्करों पंकज कुमार और दीपक मौर्य को वाहन सहित रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने तस्करी के संगठित नेटवर्क में रवि जायसवाल की सक्रिय भूमिका उजागर की, जिसके बाद पुलिस ने उसके विरुद्ध संगठित अपराध का गंभीर प्रकरण दर्ज किया।
सूत्रों की मानें तो आरोपी रवि जायसवाल लंबे समय से खुद को मंत्री का करीबी बताकर राजनीतिक रसूख का हवाला देता रहा। सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें साझा कर कानून से बचने की कोशिश करता रहा। बताया जा रहा है कि उसने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से भी संरक्षण की उम्मीद की, लेकिन मंत्री ने दो टूक संदेश देते हुए साफ कहा—
“अवैध कारोबार में जो भी पकड़ा जाएगा, उस पर कानून स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करेगा।”
गौरतलब है कि गुरुवार को आरोपी द्वारा हाईकोर्ट में दायर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद शुक्रवार को उसे निचली अदालत में सरेंडर करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 281-बी, 111 तथा आबकारी अधिनियम की धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि—
क्या रवि जायसवाल इस पूरे खेल का अकेला मोहरा है, या फिर वह किसी बड़े और सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि अवैध शराब के इस धंधे में कई रसूखदार और सफेदपोश चेहरे भी शामिल हो सकते हैं। मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब, नशीले इंजेक्शन और प्रतिबंधित टैबलेट की खुलेआम बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। विनय होटल के पीछे का इलाका, पुलिस की जानकारी में होने के बावजूद, लगातार संदेह के घेरे में रहा है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह ने शहर को अपराध मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया था। पत्रकारों द्वारा भी बार-बार यह सवाल उठाया जाता रहा है कि अवैध कारोबार में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता पर कार्रवाई कब होगी। ऐसे में यह मामला अब पुलिस की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली की अग्निपरीक्षा बन चुका है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच छोटे आरोपियों तक सिमटती है या फिर अवैध शराब के इस काले कारोबार में शामिल बड़े नामों तक भी कानून का शिकंजा कसता है। मनेंद्रगढ़ की जनता जवाब और ठोस कार्रवाई दोनों की प्रतीक्षा कर रही है।






