मनेंद्रगढ़ गांधी चौक पर अवैध अतिक्रमण का बोलबाला, प्रशासनिक दावों की सरेआम हो रही पोल-खोल

✍️ भागीरथी यादव 

 

एमसीबी/मनेंद्रगढ़।

जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ का हृदय कहे जाने वाला गांधी चौक से स्टेशन रोड तक का इलाका इन दिनों अवैध अतिक्रमण का पर्याय बन चुका है। चौक-चौराहों और मुख्य सड़कों पर बेलगाम सब्जी ठेलों का कब्ज़ा नगर प्रशासन की निष्क्रियता की गवाही दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका द्वारा सब्जी मंडी एवं स्थायी दुकानों की समुचित व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद नियमों को ठेंगा दिखाकर खुलेआम सड़कों पर व्यवसाय किया जा रहा है।

इस गंभीर समस्या को लेकर कुछ दिन पूर्व नगर पालिका परिषद के अधिकारियों एवं सीएमओ को प्रत्यक्ष रूप से अवगत कराया गया था, लेकिन नतीजा सिफ़र रहा। स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। सुबह से शाम तक गांधी चौक और स्टेशन रोड ठेलों से पटे रहते हैं, जिससे न केवल स्थायी दुकानदारों का व्यवसाय चौपट हो रहा है, बल्कि पहले से संकरी सड़कों पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

विडंबना यह है कि जिला मुख्यालय होने के बावजूद मनेंद्रगढ़ आज भी चौड़ी और सुगम सड़कों से वंचित है। ऐसे में अवैध अतिक्रमण शहर की समस्याओं को और भयावह बना रहा है। एम्बुलेंस, स्कूल वाहन और आम नागरिकों का आवागमन आए दिन बाधित हो रहा है।

गौरतलब है कि 27 दिसंबर 2025 को कई समाचार पत्रों में प्रशासन द्वारा शहर के प्रमुख मार्गों, बाजार क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों से अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त अभियान चलाने के दावे किए गए थे। नगर पालिका सीएमओ ने भी ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और नागरिकों को राहत देने की बात कही थी तथा व्यापारियों से निर्धारित सीमा में व्यवसाय करने की अपील की थी।

लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों के ठीक उलट नजर आ रही है।

10 जनवरी 2026 को इस संबंध में सिटी कोतवाली थाना प्रभारी दीपेश सैनी से मुलाकात की गई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नगर पालिका को पहले ही स्थिति से अवगत कराया जा चुका है और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस बल पूर्ण सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन जब संबंधित अधिकारी ही गंभीरता नहीं दिखा रहे, तो पुलिस अकेले क्या कर सकती है।

अब सवाल सीधे और तीखे हैं—

क्या अधिकारी सिर्फ फाइलों में ही सक्रिय हैं?

क्या कार्रवाई केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित है?

अगर नगरीय प्रशासन वास्तव में सक्रिय होता, तो गांधी चौक और शहर के अन्य प्रमुख चौराहों से अतिक्रमण अब तक हट चुका होता।

अब जनता जवाब चाहती है—

दावे कब ज़मीन पर उतरेंगे?

या फिर अवैध अतिक्रमण यूँ ही शहर की रफ्तार रोकता रहेगा?