आरक्षक भर्ती पर घमासान, सरकार ने खोले पत्ते QR कोड से दिखेंगे नंबर, जनसुनवाई से मिलेगा इंसाफ का भरोसा
✍️ भागीरथी यादव रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती के नतीजों ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। चयन सूची सामने आते ही अनियमितताओं के आरोप लगने लगे और सैकड़ों अभ्यर्थी न्याय की गुहार लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गए। युवाओं का कहना है कि कई जिलों में ज्यादा अंक लाने वाले उम्मीदवार बाहर रह गए, जबकि कम नंबर वालों को चयनित कर लिया गया। बढ़ते विवाद ने अब सरकार को सीधे मोर्चा संभालने पर मजबूर कर दिया है। अब छिपेगा नहीं कोई नंबर भर्ती को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गृहमंत्री विजय शर्मा ने बड़ा एलान किया है। अब पुलिस आरक्षक भर्ती के नतीजे हर जिले में QR कोड के जरिए सार्वजनिक किए जाएंगे। एक स्कैन में अभ्यर्थी अपने अंक, मेरिट रैंक, वर्गवार चयन सूची और वेटिंग लिस्ट तक पहुंच सकेंगे। सरकार का दावा है कि इससे पूरी प्रक्रिया ‘शीशे की तरह साफ’ हो जाएगी। गृहमंत्री ने कहा कि कांस्टेबल भर्ती को पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित किया गया है। हर जिले की अलग-अलग मेरिट लिस्ट उपलब्ध है, जिसे कोई भी अभ्यर्थी देख सकता है। जिलों में चल रही शिकायतों की खुली सुनवाई सरकार ने अभ्यर्थियों की नाराजगी को देखते हुए जिलास्तर पर शिकायतों की सुनवाई शुरू कर दी है। गृहमंत्री के मुताबिक, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक लगातार बैठकें कर युवाओं की आपत्तियां सुन रहे हैं। यह प्रक्रिया अभी तीन दिन और जारी रहेगी। 19–20 दिसंबर को पीएचक्यू में बड़ा फैसला एडीजी एसआरपी कल्लूरी ने बताया कि 19 और 20 दिसंबर को पुलिस मुख्यालय में भर्ती से जुड़ी शिकायतों की औपचारिक सुनवाई होगी। सभी जिलों की मेरिट सूची तैयार कर ली गई है और QR कोड के माध्यम से नंबर सार्वजनिक किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हेल्प डेस्क, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य माध्यमों से अभ्यर्थियों की शंकाएं दूर की जा रही हैं। 21 दिसंबर को गृहमंत्री से आमने-सामने विवाद के बीच 21 दिसंबर को गृहमंत्री विजय शर्मा खुद मोर्चा संभालेंगे। वे रायपुर स्थित अपने सिविल लाइन निवास में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जनसुनवाई करेंगे। जो अभ्यर्थी रायपुर नहीं पहुंच पाएंगे, वे अपने जिले के एसपी कार्यालय से ऑनलाइन जुड़ सकेंगे। गृहमंत्री ने कहा कि 6 हजार पदों की इस भर्ती में पुलिस विभाग ने पूरी ईमानदारी से काम किया है। युवाओं से धैर्य रखने की अपील करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर गंभीरता से विचार होगा। 6000 पद, 7 लाख दावेदार एडीजी कल्लूरी के मुताबिक, 6000 आरक्षक पदों के लिए करीब 7 लाख आवेदन आए थे। भर्ती प्रक्रिया को ‘टीआरपी’ यानी ट्रांसपेरेंट रिक्रूटमेंट प्रोसेस नाम दिया गया है। सरकार का कहना है कि सभी आपत्तियों के निपटारे के बाद जल्द ही अंतिम स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी। अब देखना होगा कि QR कोड और सीधी जनसुनवाई के बाद युवाओं का भरोसा लौटता है या आरक्षक भर्ती का विवाद और तेज होता है।
रामानुजगंज में संदिग्ध हालात में बैगा की मौत, घर के बाहर मिला शव
✍️ भागीरथी यादव सिर-पीठ पर चोट के निशान, नाक से बह रहा था खून; समाज ने जताई हत्या की आशंका रामानुजगंज। सनावाल थाना क्षेत्र के ग्राम त्रिशूली में मंगलवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक बैगा समाज के व्यक्ति का शव उसके ही घर के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। मृतक की पहचान लल्लू पंडो (52) के रूप में हुई है, जो गांव में अकेले रहकर जीवन यापन कर रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, सुबह जब उन्होंने लल्लू पंडो के घर का दरवाजा अंदर से बंद देखा, तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। पास जाकर देखने पर घर के बाहर औंधे मुंह पड़े शव को देखकर गांव में हड़कंप मच गया। शव के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे, नाक से खून बह रहा था, वहीं कमर और पीठ पर भी चोटें पाई गईं, जिससे मामला संदिग्ध हो गया। सूचना मिलते ही सनावाल पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। घटनास्थल पर पंडो समाज के ब्लॉक सचिव हीरालाल पंडो भी पहुंचे। उन्होंने इस घटना को हत्या करार देते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। समाज के लोगों में घटना को लेकर आक्रोश और भय का माहौल है। थाना प्रभारी बृजलाल भारद्वाज ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। साक्ष्य जुटाने के लिए फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी बुलाया गया है। फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि लल्लू पंडो की मौत हादसा है, आत्महत्या या फिर सुनियोजित हत्या। गांव में पसरे सन्नाटे के बीच सभी की निगाहें अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हैं।
दर्री रोड पर सनसनीखेज आगजनी, खड़ी कार को पेट्रोल डालकर जलाया
व्यापारी की गाड़ी को बनाया निशाना, दो आरोपी हिरासत में, एक फरार कोरबा। कोतवाली थाना क्षेत्र के दर्री रोड पर बीती रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब तीन युवकों ने एक खड़ी कार में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। चश्मदीदों के मुताबिक, तीनों युवक करीब 10 मिनट तक कार के आसपास मंडराते रहे। इसके बाद एक युवक ने कार पर पेट्रोल छिड़का, जबकि दूसरे ने माचिस जलाकर आग लगा दी। आगजनी की वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपी मौके से फरार हो गए। कुछ ही देर में कार से लपटें उठने लगीं। आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास के लोग और कार मालिक मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गनीमत रही कि समय रहते आग बुझा ली गई, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। मिली जानकारी के अनुसार, आगजनी का शिकार बनी कार एक स्थानीय व्यापारी की बताई जा रही है। इस घटना से इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। मामले की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो युवकों को हिरासत में ले लिया है, जबकि तीसरा आरोपी फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस आगजनी के पीछे के कारणों और आरोपियों के इरादों की गहन जांच कर रही है। घटना के बाद दर्री रोड क्षेत्र में तनाव का माहौल है और लोग आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कोरबा में कोयला माफिया पर बड़ा प्रहार: दीपका पुलिस ने अदानी पावर का 335 टन कोयला किया जब्त, 5 आरोपी गिरफ्तार
✍️ भागीरथी यादव कोरबा। दीपका पुलिस ने कोयला अफरा-तफरी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। अदानी पावर प्लांट के लिए गेवरा खदान से जयरामनगर रेलवे साइडिंग ले जाए जा रहे कोयले को बीच रास्ते में अवैध रूप से खपाने की साजिश रच रहे गिरोह के पांच सदस्यों को पुलिस ने धर दबोचा है। कार्रवाई के दौरान करीब 5 लाख 76 हजार रुपये मूल्य का 335 टन कोयला और 6 ट्रेलर जब्त किए गए हैं, जबकि कई आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के अवैध कारोबार पर सख्त अंकुश लगाने के निर्देशों के तहत, एएसपी नीतिश ठाकुर एवं सीएसपी दर्री विमल कुमार पाठक के मार्गदर्शन में दीपका पुलिस लगातार निगरानी कर रही थी। इसी क्रम में थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू को मुखबिर से सूचना मिली कि एसईसीएल गेवरा खदान से लोड ट्रेलर निर्धारित गंतव्य के बजाय कहीं और ले जाए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और घेराबंदी कर तीन कोयला लोड ट्रेलरों को पकड़ा गया। जांच में खुलासा हुआ कि यह कोयला अदानी पावर प्लांट के लिए जयरामनगर रेलवे साइडिंग पहुंचाया जाना था, लेकिन उसे अवैध रूप से दूसरे ठिकानों पर खपाने की तैयारी थी। पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। मामले में पुलिस ने लक्ष्मण कुमार (25) निवासी मस्तुरी बिलासपुर, तुषार खांडे (24) निवासी परसदा सकरी, गोपी किशन सोनझरी (22) निवासी खमरिया बिलासपुर, दुर्गेश कुमार साहू (22) निवासी कोरबी हरदीबाजार और अतीक मेमन (26) निवासी हरदीबाजार को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर भारी मात्रा में कोयला बरामद किया गया। इसके साथ ही अवैध परिवहन में प्रयुक्त ट्रेलर क्रमांक CG 12 BG 5024, CG 12 BQ 9913, CG 12 BJ 4253, CG 15 EH 2713, CG 10 BP 5301 एवं CG 10 BU 9401 को भी जब्त कर लिया गया है। सभी आरोपियों को वैधानिक कार्रवाई के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। फिलहाल दीपका पुलिस कोयला तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कोयले के अवैध कारोबार पर आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
“खाकी शर्मसार! DSP कल्पना वर्मा पर करोड़ों की अवैध वसूली और ब्लैकमेलिंग का आरोप”
✍️ भागीरथी यादव डीजीपी अरुण देव गौतम से मिलकर टंडन ने की शिकायत लोकसदन के सूत्रो के अनुसार – डीएसपी का विवादों से पुराना नाता रहा अपने ही जिले में पदस्थ डीएफओ से भी कुछ इस तरह का मामला सामने आया जिसमे डीएफओ ने चक्कर में पड़कर अपनी पत्नी को दिया था तलाक साथ ही २०१६ बैच के डीएसपी परीक्षा में भी नकल करते पकड़ी गई डीएसपी परंतु आईबीसी में समाचार आने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं राजधानी रायपुर के व्यवसायी दीपक टंडन ने अपनी शिकायत में छत्तीसगढ़ पुलिस की DSP कल्पना वर्मा पर पद और प्रभाव के दुरुपयोग, अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की वरिष्ठ व स्वतंत्र अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। दीपक टंडन का कहना है – कि वे पिछले कई वर्षों से होटल व्यवसाय से जुड़े हैं और इस दौरान उनके DSP कल्पना वर्मा व उनके परिजनों से पारिवारिक व व्यावसायिक संबंध रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संबंधों का दुरुपयोग करते हुए DSP कल्पना वर्मा ने दबाव बनाकर उनसे लाखों रुपये बैंक व नकद माध्यम से वसूल किए। 30 लाख से अधिक के लेन-देन का दावा शिकायत में उल्लेख है कि होटल व्यवसाय से जुड़े कार्यों में दीपक टंडन द्वारा RTGS के माध्यम से लगभग 30 लाख रुपये DSP कल्पना वर्मा के पिता के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा समय-समय पर अन्य खातों में भी बड़ी रकम भेजी गई। दीपक टंडन का आरोप है कि यह भुगतान दबाव और भय के माहौल में कराया गया। ब्लैकमेलिंग और पारिवारिक जीवन में दखल दीपक टंडन ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने आगे पैसे देने से इनकार किया तो DSP कल्पना वर्मा द्वारा मोबाइल चैट्स के आधार पर ब्लैकमेलिंग शुरू की गई और यहां तक कि उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करते हुए तलाक का दबाव बनाया गया। वाहन जब्ती को बताया गैर-कानूनी शिकायत के अनुसार, उनकी पत्नी के नाम से पंजीकृत वाहन CG-04-PA-0486 को बिना विधिसम्मत प्रक्रिया के जब्त किया गया, जबकि शिकायतकर्ता या वाहन स्वामिनी को जांच के दौरान उपस्थित होने की कोई सूचना नहीं दी गई। दीपक टंडन ने इसे स्पष्ट रूप से अधिकारों का हनन बताया है। निष्पक्ष जांच की मांग दीपक टंडन का कहना है कि चूंकि आरोपी एक DSP स्तर की अधिकारी हैं और उनके वरिष्ठ अधिकारियों से संबंध हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर हुई कार्रवाई निष्पक्ष नहीं कही जा सकती। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की जांच किसी सक्षम वरिष्ठ IPS अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। परिवार की सुरक्षा पर खतरे का आरोप शिकायत में यह भी कहा गया है कि उन्हें और उनके परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे वे मानसिक तनाव और असुरक्षा में जीने को मजबूर हैं। दीपक टंडन ने DGP से आग्रह किया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए DSP कल्पना वर्मा के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए, ताकि कानून और न्याय व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास बना रहे।
**नाबालिग का अश्लील वीडियो वायरल, 15 दिन बाद भी आरोपी बेखौफ
पाली से ज्ञान शंकर तिवारी की रिपोर्ट पॉक्सो मामले में पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल, रजक समाज में उबाल** कोरबा जिले के पाली थाना अंतर्गत चैतमा चौकी क्षेत्र के ग्राम बनबांधा में नाबालिग बच्ची का अश्लील वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल होने का सनसनीखेज मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। घटना को पंद्रह दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन नामजद आरोपी युवक रतिराम यादव अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। न गिरफ्तारी हुई, न पूछताछ—जिससे पीड़ित परिवार और समाज में भारी आक्रोश फैलता जा रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को वीडियो के स्क्रीनशॉट, इंस्टाग्राम लिंक और आरोपी द्वारा भेजे गए धमकी भरे मोबाइल संदेश जैसे महत्वपूर्ण सबूत सौंप दिए हैं। इसके बावजूद जांच की रफ्तार बेहद सुस्त है। इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा नाबालिग बच्ची भुगत रही है, जो मानसिक तनाव, भय और सामाजिक बदनामी के बीच जीने को मजबूर है। पुलिस की भूमिका पर सवाल स्थानीय लोगों और रजक समाज का कहना है कि पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर और संवेदनशील कानून से जुड़े मामले में पुलिस की यह ढिलाई न केवल चिंता का विषय है, बल्कि संदेह भी पैदा करती है। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र आरोपी की गिरफ्तारी कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। रजक समाज के अध्यक्ष धीरपाल निर्मलकर ने बताया कि पीड़िता को थाना पाली, व्यवहार न्यायालय पाली और कटघोरा थाना—तीनों जगह बुलाकर बयान दर्ज कराए गए। इसके बावजूद आरोपी से अब तक कोई पूछताछ नहीं की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला चैतमा चौकी और पाली थाना क्षेत्र का है, तो जांच कटघोरा थाना प्रभारी को क्यों सौंपी गई? समाज का मानना है कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है और आरोपी को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। “जांच जारी है” तक सीमित जवाब सूत्रों के अनुसार, पुलिस हर सवाल के जवाब में केवल “जांच जारी है” कहकर जिम्मेदारी से बचती नजर आ रही है। जमीनी स्तर पर न तो ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है और न ही पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा मिल पा रहा है। इधर, पीड़ित परिवार ने उच्च पुलिस अधिकारियों, महिला आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के पास जाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह मामला अब सिर्फ एक नाबालिग के साथ हुए साइबर अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, संवेदनशील मामलों में तत्परता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—प्रशासन कब जागेगा और पीड़ित नाबालिग को न्याय कब मिलेगा?
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले मुंगेली में बड़ा खुलासा: करोड़ों की पानी टंकियां बंद, ग्रामीण बूंद-बूंद को मजबूर
✍️ भागीरथी यादव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की लापरवाही पर शिव सेना का तीखा हमला, जनदर्शन में सौंपा ज्ञापन मुंगेली | छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री के संभावित आगमन से पहले मुंगेली जिले में पेयजल व्यवस्था को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के कई गांवों में करोड़ों रुपये की लागत से बनी उच्च स्तरीय पानी टंकियां आज भी शोपीस बनकर खड़ी हैं, जबकि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। आने वाली भीषण गर्मी को देखते हुए जब पेयजल की उपलब्धता सबसे बड़ा सवाल बन जाती है, ऐसे समय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की लापरवाही ग्रामीणों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद कई गांवों में पानी टंकियां आज तक चालू नहीं की गई हैं, वहीं अनेक स्थानों पर पाइपलाइन और अन्य जरूरी कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं। शिव सेना ने जनदर्शन में उठाई आवाज इस गंभीर मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ शिव सेना ने मंगलवार, 16 दिसंबर को कलेक्टर जनदर्शन, मुंगेली में जोरदार तरीके से शिकायत दर्ज कराई। शिव सेना जिला प्रभारी रमेश सिंह राजपूत ने जिलाधीश को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि शासन ने ग्रामीण जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पानी टंकियों का निर्माण कराया, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण जनता को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ज्ञापन में साफ तौर पर उल्लेख किया गया कि यदि समय रहते इन टंकियों को चालू नहीं किया गया, तो आने वाले गर्मी के महीनों में गांव-गांव भयावह जल संकट से जूझने को मजबूर होंगे। यह स्थिति लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। तत्काल कार्रवाई की मांग शिव सेना ने मांग की है कि जिन पानी टंकियों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, उन्हें अविलंब चालू कराया जाए और जहां पाइपलाइन अथवा अन्य कार्य अधूरे हैं, उन्हें जल्द से जल्द पूरा कराकर नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में ज्ञापन की प्रतिलिपि कार्यपालन अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मुंगेली अनुविभागीय अधिकारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मुंगेली कार्यपालन अभियंता, लोरमी कार्यपालन अभियंता, पथरिया को भी प्रेषित किए जाने का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों में जगी उम्मीद, प्रशासन की परीक्षा कलेक्टर जनदर्शन में मामला उठने के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि प्रशासन अब इस गंभीर समस्या को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाएगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग कब नींद से जागता है और कब गांवों तक वास्तव में पानी पहुंच पाता है। यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर करता है, बल्कि जवाबदेही तय करने की भी सख्त जरूरत को सामने लाता है।
अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 32 लाख की ठगी, दो अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार
✍️ भागीरथी यादव कोरिया/बैकुंठपुर अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले गिरोह पर बैकुंठपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक युवक को अश्लील वीडियो कॉल में फंसाकर डराया-धमकाया और अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से करीब 32 लाख रुपए की ठगी को अंजाम दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रार्थी विजसेंद्र कुमार यादव, निवासी जूना पारा, बैकुंठपुर ने थाना बैकुंठपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 21 मई 2023 को उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा वीडियो कॉल किया गया। कॉल रिसीव करते ही स्क्रीन पर एक युवती नग्न अवस्था में दिखाई दी, जिससे घबराकर उन्होंने तुरंत कॉल काट दी। इसके बाद आरोपी ने वीडियो कॉल का स्क्रीनशॉट लेकर अश्लील फोटो प्रार्थी को भेजे और उन्हें वायरल करने की धमकी देते हुए 50 हजार रुपए की मांग करने लगा। बदनामी के डर से प्रार्थी लगातार दबाव में आ गया और आरोपी के बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 32 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। मामले में दर्ज हुआ अपराध प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना बैकुंठपुर में अपराध क्रमांक 168/23 के तहत धारा 388, 420, 120-बी IPC एवं 66(घ) आईटी एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। हरियाणा–राजस्थान से दबोचे गए आरोपी पुलिस अधीक्षक कोरिया रवि कुमार कुर्रे के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के मार्गदर्शन एवं एसडीओपी राजेश साहू के नेतृत्व में थाना बैकुंठपुर और साइबर सेल की संयुक्त टीम गठित की गई। बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मकसूद उर्फ मक्कू, पिता आजाद, उम्र 28 वर्ष, निवासी पेमा खेड़ा, थाना पुन्हाना, मेवात (हरियाणा) प्रदीप, पिता जगराम चौधरी, उम्र 20 वर्ष, निवासी तातरपुर, मेवात (हरियाणा) को मेवात (हरियाणा) एवं अलवर (राजस्थान) से गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को 15 दिसंबर 2025 को न्यायालय में पेश किया गया। इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक विपिन लकड़ा, साइबर प्रभारी निरीक्षक विनोद पासवान, प्रधान आरक्षक दीपक पांडे, साइबर आरक्षक अमरेशा नंद एवं आरक्षक दिनेश उके का विशेष योगदान रहा। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि इस तरह के वीडियो कॉल या साइबर ब्लैकमेलिंग की स्थिति में घबराएं नहीं, तत्काल पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।
कटघोरा का सांस्कृतिक भवन बना कूड़े का ढेर, नगर पालिका की लापरवाही से आस्था और स्वास्थ्य दोनों खतरे में
कोरबा/कटघोरा | 16 दिसंबर 2025 कटघोरा नगर पालिका की घोर लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। वार्ड क्रमांक 4 में स्थित नगर का सांस्कृतिक भवन, जो कभी सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों की पहचान हुआ करता था, आज बदहाली, गंदगी और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि यह भवन अब “सांस्कृतिक केंद्र” नहीं, बल्कि खुले कूड़े का अड्डा नजर आ रहा है। नगर पालिका परिषद के अधीन होने के बावजूद भवन की देखरेख पूरी तरह से उपेक्षित है। भीतर का नजारा और भी चिंताजनक है—टूटे हुए शौचालय, क्षतिग्रस्त सभागार, जर्जर कमरे और चारों ओर फैली गंदगी नगर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में भवन की उपयोगिता लगभग समाप्त हो चुकी है। किराया वसूली, जिम्मेदारी शून्य! सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी बदहाल भवन को नगर पालिका विवाह समारोह और अन्य आयोजनों के लिए किराए पर देती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मामलों में भवन बिना किराया लिए भी दे दिया जाता है, वहीं तय किराया भी नाममात्र का है। इसके बावजूद आयोजनों के बाद सफाई और कचरा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की जाती। परिणामस्वरूप समारोहों के बाद बचा हुआ भोजन, डिस्पोजेबल सामग्री और मांसाहार से जुड़ा कचरा खुले में फेंक दिया जाता है। इससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है और मवेशी इस जहरीले कचरे को खाते हुए नजर आ रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। आस्था पर भी चोट स्थिति यहीं नहीं रुकती। मांस की हड्डियां और अवशेष कुत्तों द्वारा उठाकर बाजार मोहल्ला स्थित राधा-कृष्ण मंदिर तक पहुंचा दिए जा रहे हैं। इससे न केवल स्वच्छता भंग हो रही है, बल्कि स्थानीय नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंच रही है। शिकायतें हुईं, कार्रवाई नहीं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पालिका और प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न स्थायी सफाई व्यवस्था बनाई गई, न आयोजनों के बाद कचरा निस्तारण को लेकर कोई सख्त नियम लागू किए गए। आक्रोश बढ़ा, आंदोलन की चेतावनी नगर पालिका और प्रशासन की इस उदासीनता से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि सांस्कृतिक भवन की तत्काल सफाई, मरम्मत और नियमित रखरखाव कराया जाए, साथ ही आयोजनों के बाद कचरा निस्तारण की जिम्मेदारी तय की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थानीय नागरिक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। कटघोरा का यह सांस्कृतिक भवन आज प्रशासन की अनदेखी का जीवंत उदाहरण बन चुका है—जहां संस्कृति की जगह गंदगी और जिम्मेदारी की जगह लापरवाही साफ नजर आ रही है।
छत्तीसगढ़ प्रशासन में बड़ा भूचाल, कोरबा को मिला नया कलेक्टर
✍️ भागीरथी यादव रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने एक साथ कई जिलों की प्रशासनिक कमान बदलते हुए बड़ा और निर्णायक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी तबादला आदेशों ने राज्य की नौकरशाही में हलचल मचा दी है। इस बदलाव में कोरबा जिले के कलेक्टर का परिवर्तन सबसे अहम माना जा रहा है। शासन के आदेश के अनुसार कुणाल दुदावत (भा.प्र.से. 2017) को दंतेवाड़ा कलेक्टर पद से हटाकर कोरबा का नया कलेक्टर बनाया गया है। वहीं अब तक कोरबा की कमान संभाल रहे अजीत वसंत (भा.प्र.से. 2013) को हटाकर सरगुजा जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया है। यह बदलाव प्रशासनिक संतुलन और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर किया गया माना जा रहा है। कई जिलों में बदली प्रशासनिक कमान इस व्यापक फेरबदल में सिर्फ कोरबा ही नहीं, बल्कि कई अन्य जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं— गौरव विलास सोनी (भा.प्र.से. 2011) को सरगुजा कलेक्टर के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। राघव शर्मा (भा.प्र.से. 2012) को बेमेतरा कलेक्टर पद से हटाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध संचालक के रूप में अस्थायी पदस्थापना दी गई है। संजीव कुमार झा (भा.प्र.से. 2011) से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है। दिनेश कुमार दाश (भा.प्र.से. 2018) अब सुकमा से स्थानांतरित होकर दंतेवाड़ा के नए कलेक्टर होंगे। सुश्री प्रतिभा ममगाईं (भा.प्र.से. 2018) को नारायणपुर से हटाकर बेमेतरा जिले की कमान सौंपी गई है। प्रशासनिक रणनीति का संकेत राज्य सरकार का यह बड़ा कदम स्पष्ट करता है कि मैदानी प्रशासन को और अधिक सशक्त, सक्रिय और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में ठोस निर्णय लिए जा रहे हैं। बदली हुई प्रशासनिक टीम से अब संबंधित जिलों में विकास कार्यों और सुशासन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
















