धमतरी इतिहास के नए अध्याय में प्रवेश, जिला हुआ पूरी तरह नक्सल मुक्त
✍️ भागीरथी यादव धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले ने नक्सल हिंसा के लंबे और कठिन दौर को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया है। जिले को अब आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। माओवादी संगठन की सीतानदी एरिया कमेटी से जुड़े अंतिम बचे 9 इनामी नक्सलियों ने रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा के समक्ष हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे जिले में नक्सल गतिविधियों का पूर्णतः अंत हो गया। 47 लाख के इनामी 9 नक्सलियों का सरेंडर आत्मसमर्पण करने वालों में 7 महिलाएं और 2 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इन सभी पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। 2 नक्सलियों पर ₹8-8 लाख 6 नक्सलियों पर ₹5-5 लाख 1 नक्सली पर ₹1 लाख का इनाम लंबे समय से ये नक्सली सुरक्षाबलों के लिए गंभीर चुनौती बने हुए थे। हथियारों का जखीरा पुलिस के हवाले सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने बड़ी संख्या में अत्याधुनिक हथियार और संचार उपकरण सौंपे। इनमें— 5 ऑटोमेटिक राइफल 2 SLR, 2 INSAS, 1 कार्बाइन 1 भरमार बंदूक लगभग 50 जिंदा कारतूस वॉकी-टॉकी, रेडियो और टैबलेट शामिल हैं। यह बरामदगी नक्सली नेटवर्क के पूरी तरह बिखरने का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। शीर्ष और तकनीकी कैडर ने भी डाले हथियार आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के वरिष्ठ और तकनीकी कैडर के नक्सली शामिल हैं— डीवीसीएम ज्योति, डीवीसीएम (टेक्निकल) उषा, एलओएस कमांडर रामदास, सीतानदी एरिया कमेटी कमांडर रोनी उमा, एससीएम (टेक्निकल) निरंजन, एसीएम सिंधु, एसीएम रीना, एसीएम अमिला और लक्ष्मी (बॉडीगार्ड)। अब विकास और सामान्य पुलिसिंग पर जोर रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने इस मौके पर कहा कि धमतरी जिला अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है। आगे इन क्षेत्रों में सामान्य पुलिसिंग, विकास कार्यों और जनसुरक्षा पर विशेष फोकस किया जाएगा। उन्होंने इसे सुरक्षाबलों, पुलिस और शासन की संयुक्त रणनीति की बड़ी और निर्णायक सफलता बताया।
राजधानी रायपुर में पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल, 8 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों के तबादले
✍️ भागीरथी यादव रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस प्रशासन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का बड़ा तबादला आदेश जारी किया है। एक साथ 8 अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिससे पुलिस महकमे में व्यापक प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल रहा है। जारी आदेश के अनुसार, तारकेश पटेल को रायपुर एडिशनल डीसीपी (मध्य) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राहुल देव शर्मा को एडिशनल डीसीपी (पश्चिम) और आकाश मरकाम को एडिशनल डीसीपी (उत्तर) के पद पर पदस्थ किया गया है। ट्रैफिक और क्राइम विंग में भी बदलाव तबादला सूची में ट्रैफिक विभाग को भी शामिल किया गया है। विवेक शुक्ला और डी. आर. पोर्ते को एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे राजधानी की यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही अपराध और साइबर अपराध जैसे संवेदनशील विभागों में भी बदलाव किया गया है। गौरव मंडल और अनुज गुप्ता को एडिशनल डीसीपी क्राइम एवं साइबर नियुक्त किया गया है। हेडक्वार्टर की कमान अर्चना झा को प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के लिए अर्चना झा को एडिशनल डीसीपी हेडक्वार्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार के इस फैसले को पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। नए पदस्थापन के बाद राजधानी में कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण और साइबर अपराधों पर और सख्ती की उम्मीद की जा रही है।
एफआईआर दर्ज न होने से आक्रोश, तहसीलदार थाने के सामने धरने पर बैठे, कलेक्टर के गनमैन पर बेटे से मारपीट का आरोप
✍️ भागीरथी यादव सारंगढ़-बिलाईगढ़। बेटे के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने से नाराज़ कोरबा में पदस्थ तहसीलदार बंदे राम भगत थाने के सामने धरने पर बैठ गए। उन्होंने सीधे तौर पर जिले के कलेक्टर के गनमैन पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। जानकारी के अनुसार यह घटना 20 जनवरी की है, जो सारंगढ़ कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई। तहसीलदार का आरोप है कि उनका बेटा राहुल भगत स्कूटी से जा रहा था, तभी सड़क पर खड़े कलेक्टर के गनमैन से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर गनमैन ने राहुल भगत के साथ हाथापाई करते हुए उसकी पिटाई कर दी। घटना के बाद राहुल भगत ने कोतवाली थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। तहसीलदार का कहना है कि शिकायत में घटना से जुड़े सभी तथ्य स्पष्ट रूप से दर्ज कराए गए, इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसी से आहत होकर तहसीलदार बंदे राम भगत ने थाने के सामने धरना शुरू कर दिया। धरने पर बैठे तहसीलदार ने कहा कि जब एक राजपत्रित अधिकारी के बेटे की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही है, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा—यह गंभीर सवाल है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। वहीं, इस पूरे मामले पर एसपी आंजनेय वार्ष्णेय ने कहा है कि प्रकरण की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब इसे कानून के समान अनुपालन और पुलिस की कार्यप्रणाली से जोड़कर देखा जा रहा है।
कुसमुंडा खदान में ड्यूटी के दौरान मजदूर की मौत, मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर जीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन
✍️ भागीरथी यादव कोरबा। कुसमुंडा कोयला खदान में ड्यूटी के दौरान एक मजदूर की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और सहकर्मी मुआवजे व आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर शव के साथ जीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही। मृतक की पहचान जांजगीर-चांपा जिले के कठरा बुड़गहन निवासी कांशी दास महंत (34 वर्ष) के रूप में हुई है। वह कुसमुंडा थाना क्षेत्र के नरईबोध में पत्नी और बच्चों के साथ रहता था और ठेका कंपनी रवि एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (आरईपीएल) में कोल सैंपलिंग का कार्य करता था। बताया गया कि कांशी दास महंत बुधवार रात की पाली में ड्यूटी पर था। सुबह घर लौटने से पहले ही कार्यस्थल पर उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। सहकर्मियों ने तत्काल उसे विकासनगर स्थित एसईसीएल डिस्पेंसरी पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद उसे कोसाबाड़ी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजन और सहकर्मी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मॉर्च्युरी पहुंच गए और ठेका कंपनी के अधिकारियों से मुआवजा एवं नौकरी की मांग की। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आक्रोशित ग्रामीणों और मजदूरों ने शव को लेकर कुसमुंडा खदान स्थित जीएम कार्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान रवि एनर्जी कंपनी के कोऑर्डिनेटर अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन श्रमिक हितों से जुड़े सवालों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दे सके। गौरतलब है कि एसईसीएल की खदानों में कोल सैंपलिंग का कार्य कोयला मंत्रालय द्वारा QCPL कंपनी को ठेके पर दिया गया है, जिसने यह काम आगे पेटी ठेके पर गुजरात की कंपनी रवि एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया। कुसमुंडा खदान में यह कंपनी वर्ष 2023 से कार्यरत है, जहां लगभग 160 मजदूर काम कर रहे हैं। घटना के बाद खदान क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और ठेका मजदूरों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
छत्तीसगढ़ आबकारी नीति 2026-27 को कैबिनेट की मंजूरी
शराब सरकारी दुकानों से ही बिकेगी, फाइबर बोतलों में होगी पैकेजिंग मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट के इस निर्णय के साथ यह स्पष्ट कर दिया गया है कि राज्य में वर्तमान में लागू आबकारी नीति को बिना किसी बदलाव के अगले वित्तीय वर्ष में भी जारी रखा जाएगा। बैठक में नीति से जुड़ी सभी अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए आबकारी विभाग को अधिकृत किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि शराब बिक्री और संचालन की मौजूदा व्यवस्था उसी स्वरूप में बनी रहेगी। फाइबर बोतलों में मिलेगी शराब नई नीति की सबसे अहम विशेषता यह है कि छत्तीसगढ़ में अब शराब कांच की बोतलों के बजाय फाइबर बोतलों में बेची जाएगी। सरकार के अनुसार, देश के लगभग 10 राज्यों में पहले से ही फाइबर बोतलों में शराब की बिक्री हो रही है। इन राज्यों से बोतलों की गुणवत्ता, उपयोग और स्वास्थ्य प्रभाव से जुड़ी जानकारी मंगाई जाएगी। विस्तृत अध्ययन के बाद प्रदेश में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि उपयोग में लाई जाने वाली फाइबर बोतलें उच्च गुणवत्ता वाले मटेरियल से बनी होंगी, जिससे न तो शराब की गुणवत्ता प्रभावित होगी और न ही स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक असर पड़ेगा। ठेकेदारी व्यवस्था पर विराम बीते कुछ समय से शराब दुकानों को ठेका प्रथा के तहत संचालित किए जाने की अटकलें तेज थीं। हालांकि, कैबिनेट के फैसले के बाद इन चर्चाओं पर पूरी तरह विराम लग गया है। सरकार ने दो टूक कहा है कि राज्य में शराब दुकानों का संचालन सरकार ही करेगी। ठेकेदारी व्यवस्था को किसी भी सूरत में वापस नहीं लाया जाएगा। क्या रहेगा पहले जैसा शराब दुकानें सरकारी नियंत्रण में ही रहेंगी मौजूदा आबकारी नीति बिना बदलाव लागू रहेगी ठेकेदारी प्रथा की कोई वापसी नहीं होगी पर्यावरण और सुरक्षा की दिशा में कदम सरकार का मानना है कि फाइबर बोतलों की पहल पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा की दृष्टि से अहम साबित होगी। आने वाले समय में यह निर्णय राज्य की शराब बिक्री व्यवस्था में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
रायगढ़ में कबाड़ माफिया पर ऐतिहासिक प्रहार, एक साथ 24 ठिकानों पर छापेमारी
रायगढ़। जिले में अवैध कबाड़ कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए कबाड़ माफियाओं की कमर तोड़ दी है। सुनियोजित रणनीति के तहत एक साथ की गई इस बड़ी कार्रवाई में जिलेभर में 24 ठिकानों पर छापेमारी कर 17 अवैध कबाड़ कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है। 120 टन से ज्यादा अवैध कबाड़ जब्त, 4.90 करोड़ की संपत्ति सीज पुलिस ने कोतवाली, पूंजीपथरा, पुसौर, चक्रधरनगर और खरसिया थाना क्षेत्रों में एक साथ दबिश देकर 120 टन 331 किलो अवैध कबाड़ बरामद किया। कार्रवाई के दौरान ट्रक, हाईवा, माजदा और पिकअप सहित 14 वाहन भी जब्त किए गए। जब्त सामग्री और वाहनों की कुल अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ 90 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने सभी आरोपियों को रिमांड पर भेजते हुए अवैध कबाड़ नेटवर्क के पूरे सिंडिकेट की जांच शुरू कर दी है। द
1 करोड़ का इनामी अनल दा ढेर
झारखंड। नक्सल नेटवर्क को करारा झटका देते हुए सुरक्षाबलों ने गुरुवार तड़के सारंडा के घने जंगलों में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। नक्सल विरोधी अभियान के दौरान हुई भीषण मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) का शीर्ष कमांडर और एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली अनल दा उर्फ तूफान समेत 11 से अधिक नक्सली मारे गए हैं। हालांकि, अंतिम आंकड़ों और पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभियान के पूर्ण होने के बाद की जाएगी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई नक्सल संगठन की कमर तोड़ने वाली साबित हुई है। जंगल में अचानक हमला, जवानों ने की निर्णायक घेराबंदी झारखंड पुलिस, कोबरा बटालियन और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की संयुक्त टीम सारंडा के दुर्गम वन क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इसी दौरान जंगल में छिपे नक्सलियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने तत्परता दिखाते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी की और जवाबी कार्रवाई शुरू की। कई घंटों तक चली भीषण मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को चारों ओर से घेर लिया। अनल दा के दस्ते का हुआ सफाया सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ कुख्यात नक्सली अनल दा उर्फ तूफान के दस्ते से हुई, जिसमें 14 से अधिक हार्डकोर नक्सली शामिल थे। कार्रवाई में 11 से ज्यादा नक्सली ढेर किए गए, जिनमें अनल दा के मारे जाने की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा 50 लाख रुपये के इनामी एक अन्य बड़े नक्सली कमांडर के भी मारे जाने की खबर है। DIG ने की पुष्टि, ऑपरेशन अब भी जारी कोल्हान रेंज के DIG अनुरंजन किस्पोट्टा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है। पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। नक्सलियों का गढ़ रहा है सारंडा दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। यही कारण है कि सुरक्षाबल यहां लगातार बड़े स्तर पर नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं। ताजा मुठभेड़ के बाद इलाके में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। कौन था अनल दा उर्फ तूफान? अनल दा का असली नाम पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश बताया जाता है। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र का निवासी था और भाकपा (माओवादी) संगठन का सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) था। 1987 से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय अनल दा हत्या, आईईडी ब्लास्ट, हथियार लूट जैसे दर्जनों संगीन मामलों में वांछित था और संगठन का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। नक्सल नेटवर्क को सबसे बड़ा झटका पिछले कुछ महीनों में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है— पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस की गिरफ्तारी सेंट्रल कमेटी सदस्य सुधाकर का सरेंडर और अब यह बड़ी मुठभेड़ इन घटनाओं ने नक्सल नेटवर्क को गहरे संकट में डाल दिया है। सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई झारखंड समेत पूरे मध्य भारत में नक्सलवाद के अंत की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
एमसीबी में पुलिस की अभिनव पहल: बच्चों को बनाया गया ट्रैफिक वॉलिंटियर, सड़क सुरक्षा का दिया मजबूत संदेश
✍️ भागीरथी यादव एमसीबी | जिले में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह ने एक संवेदनशील और प्रेरक पहल की है। इस अनोखे अभियान के तहत बच्चों को स्पेशल ट्रैफिक वॉलिंटियर बनाकर सड़क सुरक्षा जागरूकता का दायित्व सौंपा गया है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बच्चों की मासूम अपील और परिवार के प्रति उनका स्नेह, ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए सबसे सशक्त माध्यम साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक दर्दनाक सड़क हादसे देखे हैं, जिनका मुख्य कारण हेलमेट न पहनना, शराब पीकर वाहन चलाना, तेज रफ्तार और बिना लाइसेंस वाहन चलाना रहा है। नियम नहीं मानेंगे तो नुकसान अपनों का होगा एसपी रत्ना सिंह ने कहा कि लोग अक्सर यह सोचकर नियमों की अनदेखी कर देते हैं कि “कुछ नहीं होगा”, जबकि यही लापरवाही कई परिवारों की खुशियां छीन लेती है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे अपने घर के बड़ों को— दोपहिया वाहन चलाते समय आईएसआई प्रमाणित हेलमेट पहनने नशे की हालत में वाहन न चलाने वैध ड्राइविंग लाइसेंस और नंबर प्लेट के साथ ही वाहन चलाने तेज रफ्तार और स्टंट से दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित करें। ‘हेलमेट डर से नहीं, परिवार की सलामती के लिए’ पुलिस अधीक्षक ने भावुक संदेश देते हुए कहा— “हेलमेट पुलिस के डर से नहीं, बल्कि अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पहनना चाहिए। जब बच्चे अपने माता-पिता से उनकी सलामती की बात करते हैं, तो यह संदेश सीधे दिल तक पहुंचता है और नियम बोझ नहीं, आदत बन जाते हैं।” ‘राह-वीर योजना’: मानवता को सम्मान एसपी रत्ना सिंह ने जानकारी दी कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले नागरिकों को पुलिस द्वारा परेशान नहीं किया जाता। केंद्र सरकार की ‘राह-वीर योजना’ के तहत घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये नकद पुरस्कार और सम्मान प्रदान किया जाता है, जिससे समाज में सहयोग और मानवता की भावना को बढ़ावा मिलता है। नन्हे वॉलिंटियर बनेंगे बदलाव के वाहक अंत में पुलिस अधीक्षक ने विश्वास जताया कि जिले के ये नन्हे सिपाही अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएंगे और सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन का रूप देंगे, जिससे आने वाले समय में जिले की सड़कों पर दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।
सारंगढ़–बिलाईगढ़ में अवैध धान भंडारण पर बड़ा प्रहार, 14 गोदाम सील, 2467 क्विंटल धान जब्त
✍️ भागीरथी यादव सारंगढ़–बिलाईगढ़ | 22 जनवरी 2026 जिले में अवैध धान भंडारण और गैरकानूनी व्यापार पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 व्यापारियों के गोदामों को सील कर 2467 क्विंटल धान जब्त किया है। यह कार्रवाई मंडी अधिनियम के तहत की गई है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे के निर्देश पर कृषि उपज मंडी, मार्कफेड, राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त जांच टीम ने बुधवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम दिया। संयुक्त जांच दल की सख्त कार्रवाई प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक किसानों का ही धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। इसी क्रम में जिले में अब तक 4622 किसानों का 326 हेक्टेयर रकबा समर्पित कराया जा चुका है। जिला प्रशासन द्वारा सभी धान उपार्जन केंद्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सारंगढ़ विकासखंड में जब्ती संयुक्त दल द्वारा विकासखंड सारंगढ़ में की गई जांच के दौरान— राज ट्रेडर्स से 162.80 क्विंटल लक्ष्मी भास्कर ट्रेडर्स, भंवरपुर से 60 क्विंटल राधाकृष्णन ट्रेडर्स से 110 क्विंटल धान जब्त कर संबंधित गोदामों को सील किया गया। बरमकेला क्षेत्र में सबसे अधिक कार्रवाई विकासखंड बरमकेला में कई व्यापारियों के गोदामों में अवैध भंडारण पाया गया, जहां— श्री राधेश्याम ट्रेडर्स – 112 क्विंटल रिद्धि सिद्धि ट्रेडिंग – 116 क्विंटल महेंद्र अग्रवाल, रिसोरा – 112 क्विंटल रमेश अग्रवाल, दर्राभाठा – 88 क्विंटल नरेश सिदार, सोनबला – 100 क्विंटल अमर विलास पटेल, कालाखूंटा – 88 क्विंटल चंदन ट्रेडिंग – 400 क्विंटल महिमा ट्रेडर्स, भठली – 70 क्विंटल श्री श्याम ट्रेडर्स, भिखमपुरा – 22.40 क्विंटल जय भिक्षु ट्रेडर्स, सरिया – 32 क्विंटल धान जब्त कर सभी गोदामों को सील किया गया। बिलाईगढ़ विकासखंड में भी बड़ी जब्ती विकासखंड बिलाईगढ़ में भी अवैध भंडारण पर कार्रवाई करते हुए— मेसर्स रोहित देवांगन के प्रतिष्ठान से 511 क्विंटल गोविंदवन स्थित श्याम ट्रेडर्स से 50 बोरा (20 क्विंटल) आशीष अग्रवाल से 50 बोरा (20 क्विंटल) जय ट्रेडर्स, पंड्रीपानी से 120 क्विंटल धान जब्त किया गया। प्रशासन की चेतावनी जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध धान भंडारण और बिचौलियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बुलडोजर नहीं, कानून चले: कांग्रेस प्रवक्ता पूनम सिंह का भाजपा सरकार पर तीखा हमला
✍️ भागीरथी यादव एमसीबी | नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पूनम सिंह ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इस कार्रवाई को सरकार की कानून-व्यवस्था में विफलता छिपाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि भाजपा शासन अब “न्याय” नहीं बल्कि “विध्वंस का तमाशा” दिखाकर जनता को गुमराह कर रहा है। पूनम सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ में अपराध बेलगाम हो चुके हैं, महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, और प्रशासन अपराध रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। ऐसे में बुलडोजर चलाकर सरकार अपनी असफलता पर पर्दा डालना चाहती है। प्रदेश में बढ़ते अपराध, प्रशासन बेबस कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रदेश के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्रतिदिन औसतन 8 बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही हैं। लूट, हत्या, चाकूबाजी और संगठित अपराध आम हो चुके हैं, लेकिन गृह विभाग और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कभी कमिश्नरी सिस्टम जैसे प्रयोगों की बात करती है, तो कभी बुलडोजर कार्रवाई कर असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाती है। अपराधी को फांसी मिले, लेकिन फैसला अदालत करे पूनम सिंह ने यह भी साफ किया कि नाबालिग से दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा – “दुष्कर्म करने वाले अपराधी को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर तत्काल फांसी की सजा दी जानी चाहिए, ताकि समाज में कानून का डर बने। लेकिन सजा देने का अधिकार अदालत का है, प्रशासन का नहीं।” सरकार से सीधे सवाल कांग्रेस प्रवक्ता ने बुलडोजर कार्रवाई की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा— यदि मकान अवैध था, तो प्रशासन अब तक क्यों सोया रहा? क्या आरोपी को पहले राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था? सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद क्या 15 दिन का नोटिस और पक्ष रखने का अवसर दिया गया? एक व्यक्ति के अपराध की सजा पूरे परिवार को क्यों? क्या निर्दोष परिजनों को बेघर करना ही भाजपा का “सुशासन” है? ‘विध्वंस न्याय नहीं’ पूनम सिंह ने कहा कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई और दुष्कर्म की सजा—दोनों अलग विषय हैं। इन्हें जोड़कर “मैसेज” देने की कोशिश करना केवल सरकारी अक्षमता और असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा— “भाजपा सरकार बुलडोजर की राजनीति छोड़कर बेटियों की वास्तविक सुरक्षा, मजबूत पुलिस व्यवस्था और त्वरित न्याय प्रणाली पर ध्यान दे। विध्वंस न्याय नहीं है, न्याय केवल कानून से होता है।”
















