
✍️ भागीरथी यादव
जशपुर (छत्तीसगढ़)।
प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक कथा और रोमांच का संगम यदि कहीं एक साथ देखने को मिले तो वह है रानीदाह जलप्रपात। जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 15 से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह जलप्रपात छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अपनी मनोहर हरियाली, विशाल चट्टानों से गिरती जलधारा और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
मानसून में खिल उठती है प्राकृतिक सुंदरता
रानीदाह का सबसे आकर्षक रूप मानसून के मौसम में देखने को मिलता है। इस दौरान झरने का जलप्रवाह अपने चरम पर होता है, चारों ओर की घाटियाँ और वन क्षेत्र हरे रंग से लिपटे हुए दिखाई देते हैं। एडवेंचर, फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान एक अद्भुत अनुभव प्रदान करता है। झरने की गूंज, ताज़ी हवा और फुहारों की ठंडक हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देती है।
रानीदाह से जुड़ी किंवदंती
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस स्थल से एक रोचक ऐतिहासिक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि उड़ीसा की रानी शिरोमणि अपने प्रेमी के साथ जशपुर आ गई थीं और अपने भाइयों से बचने के लिए यही पर आत्मसमर्पण कर दिया। इसी वजह से इस स्थल का नाम “रानीदाह” पड़ा। आज भी यहाँ रानी की समाधि और ‘पंचमैया’ नामक स्थल, जो उनके पाँच भाइयों का प्रतीक है, देखने को मिलता है। झरने के पास बना शिव मंदिर इस स्थान को धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।
पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक
यह जलप्रपात वर्षभर सक्रिय रहता है, विशेष रूप से जून से फरवरी के बीच यहाँ भारी संख्या में सैलानी पहुँचते हैं। जशपुर-आरा मार्ग से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर और मुख्य सड़क से 5 किमी अंदर यह स्थल स्थित है।
यहाँ तक पहुँचने के लिए सड़क, रेल और हवाई सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं —
रेलमार्ग: रांची और अंबिकापुर प्रमुख स्टेशन हैं।
हवाई मार्ग: रांची व रायपुर हवाई अड्डे से निकटतम पहुँच।
पर्यटकों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यू प्वाइंट, सीढ़ियाँ और पिकनिक स्थल विकसित किए गए हैं, जिससे यह स्थान और भी सुरक्षित व सुगम बन गया है।
प्रकृति और शांति का अद्भुत संगम
रानीदाह जलप्रपात न केवल छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र का प्रमुख आकर्षण है, बल्कि यह वह स्थान है जहाँ प्रकृति का शांत, पवित्र और रमणीय स्वरूप अपने पूरे सौंदर्य के साथ प्रकट होता है। यहाँ आकर हर व्यक्ति को प्रकृति के करीब होने का अनुभव और आत्मिक शांति मिलती है।






