25 टन चावल की खेप गटक गया ट्रक चालक, बेटी की शादी में उड़ा दिए 6 लाख

✍️ भागीरथी यादव

 

तखतपुर पुलिस ने अमानत में खयानत का बड़ा मामला किया उजागर

तखतपुर।

अमानत में खयानत के एक सनसनीखेज मामले में तखतपुर पुलिस ने ट्रक चालक को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। रायपुर की सत्यम रोड लाइंस ट्रांसपोर्ट से बिहार भेजे जाने वाले 25 टन चावल को रास्ते में ही बेचकर आरोपी ने न केवल ट्रांसपोर्टर के भरोसे को तोड़ा, बल्कि पूरी रकम अपनी बेटी की शादी में खर्च कर दी।

मामला 22 अक्टूबर 2024 का है, जब नवरंग राइस मिल, तखतपुर से बिहार भेजने के लिए 25 टन चावल सत्यम रोड लाइंस ट्रांसपोर्ट के माध्यम से बुक किया गया था। चावल परिवहन के लिए ट्रक क्रमांक BR 01 GM 7496 निर्धारित किया गया, जिसे चालक अमरनाथ चौधरी चला रहा था। ट्रांसपोर्टर द्वारा इसके एवज में ₹28,600 का भुगतान नगद और फोन-पे के माध्यम से किया गया।

गंतव्य तक नहीं पहुंचा चावल, शक गहराया

निर्धारित समय सीमा के बावजूद जब चावल बिहार नहीं पहुंचा, तो ट्रांसपोर्ट संचालक को संदेह हुआ। चालक से संपर्क करने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर थाना तखतपुर में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया कि चालक ने पूरे 25 टन चावल को रास्ते में ही बेच दिया। शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 316(3) (अमानत में खयानत) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की गई।

ट्रक जब्त, गोदाम निकला खाली

विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने ट्रक को सुरतजा पेट्रोल पंप, चकसिकंदर (बिहार) से जब्त किया। इसके बाद आरोपी के किराए के गोदाम हाजीपुर (बिहार) में दबिश दी गई, लेकिन वहां चावल नहीं मिला। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी टूट गया और अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

बेटी की शादी में खर्च की पूरी रकम

आरोपी अमरनाथ चौधरी ने पुलिस को बताया कि उसने चावल को बिहार की एक दुकान में करीब ₹6 लाख में बेच दिया। इसमें से ₹5,99,000 रुपये उसने अपनी बेटी की शादी में खर्च कर दिए, जबकि मात्र ₹1,000 रुपये शेष बचे थे।

गिरफ्तारी के बाद जेल भेजा गया

पर्याप्त साक्ष्य, बयान और दस्तावेजी प्रमाण मिलने के बाद पुलिस ने 30 दिसंबर 2025 को सुबह 11:45 बजे आरोपी अमरनाथ चौधरी (50 वर्ष), निवासी ग्राम धंधुआ, जिला वैशाली (बिहार) को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

विवेचना जारी, और भी खुलासों की संभावना

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि चावल की बिक्री में किसी अन्य व्यापारी या बिचौलिए की भूमिका तो नहीं रही, साथ ही आरोपी का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।

पुलिस की सख्त चेतावनी

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अमानत में खयानत जैसे अपराध समाज के भरोसे को तोड़ते हैं और ऐसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। इस पूरे मामले के खुलासे में एसआई डी.आर. मनहर एवं आरक्षक सत्यार्थ शर्मा की सराहनीय भूमिका रही।

 

  • Related Posts

    बिलासपुर से बड़ी खबर: मिड-डे मील में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, बच्चों की सेहत सर्वोपरि — वहीं बर्खास्त शिक्षक को अंतरिम राहत

    ✍️ भागीरथी यादव   बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अहम मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए एक ओर जहां बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है, वहीं दूसरी ओर एक शिक्षक के अधिकारों की रक्षा करते हुए न्यायिक संतुलन का स्पष्ट संदेश दिया है। मिड-डे मील मामला: दूषित भोजन पर हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान बिलासपुर में मिड-डे मील खाने से 25 बच्चों के बीमार पड़ने के गंभीर मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस घटना को बेहद संवेदनशील मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत जवाब तलब किया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बच्चों को दूषित भोजन परोसा गया था। इस लापरवाही के चलते तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। कोर्ट के निर्देश पर प्रभावित 25 बच्चों के परिजनों को प्रति बच्चा 5,000 रुपये मुआवजा दिया गया, जिसका वितरण 19 जनवरी 2026 को किया गया। इतना ही नहीं, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हाईकोर्ट ने सेंट्रल किचन सिस्टम लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी आदेश दिया गया कि मिड-डे मील वितरण स्थल को बच्चों के अनुकूल, स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता और प्रशासन की जवाबदेही तय की जाएगी। फर्जी दस्तावेज मामला: बर्खास्त शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत दूसरी ओर, बिलासपुर में ही फर्जी दस्तावेज पेश करने के आरोप में बर्खास्त किए गए शिक्षक ईश्वरी निर्मलकर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ईश्वरी निर्मलकर सहित छह याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने बर्खास्तगी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। ईश्वरी निर्मलकर की नियुक्ति वर्ष 2007 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के रूप में हुई थी। 2009 में सेवा नियमित 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में एब्जॉर्प्शन 2023 में प्राइमरी स्कूल हेडमास्टर के पद पर पदोन्नति हालांकि, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है, लेकिन उसका ट्रायल अभी लंबित है। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी, धमतरी द्वारा 6 जनवरी 2026 को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए यह संकेत दिया कि जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक कर्मचारी के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। न्यायालय का स्पष्ट संदेश इन दोनों मामलों में हाईकोर्ट का रुख यह दर्शाता है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है वहीं शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है किसी भी निर्णय में उचित प्रक्रिया और संवैधानिक संतुलन अनिवार्य है हाईकोर्ट की यह सक्रियता न केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि प्रशासन के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि लापरवाही और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    कोविड मृत्यु बीमा दावा खारिज करना पड़ा महंगा, मैक्स लाइफ को 1 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश

    ✍️ भागीरथी यादव   बिलासपुर। कोविड-19 से हुई मृत्यु के एक मामले में बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनियों के लिए नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को मृतका के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का निर्देश दिया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय के रूप में 2 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान का आदेश भी दिया गया है। उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना मानते हुए लगाया जुर्माना आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि बीमा दावा खारिज करना न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे पीड़ित परिवार को गहरी मानसिक पीड़ा भी पहुंची। आयोग ने माना कि कंपनी का यह रवैया बीमा नियमों के खिलाफ है और इसी आधार पर हर्जाना लगाया गया। पॉलिसी जारी होने से पहले पूरी तरह स्वस्थ थीं मृतका मामले के अनुसार बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक ने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस का ‘प्लैटिनम वेल्थ प्लान’ लिया था। पॉलिसी जारी करने से पहले बीमा कंपनी द्वारा कराई गई मेडिकल जांच में शैल कौशिक को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था। कोविड संक्रमण के बाद बिगड़ी हालत, इलाज के दौरान मौत सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हुईं। इलाज के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और 11 अक्टूबर 2020 को उनका निधन हो गया। इसके बाद पति द्वारा नियमानुसार बीमा दावा प्रस्तुत किया गया। ‘पहले से बीमारी’ का दावा आयोग ने किया खारिज बीमा कंपनी ने यह कहकर दावा अस्वीकार कर दिया था कि पॉलिसीधारक पहले से गंभीर बीमारी से ग्रस्त थीं। आयोग ने इस दलील को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि कंपनी की अपनी मेडिकल रिपोर्ट में महिला को स्वस्थ बताया गया था, ऐसे में दावा खारिज करना अनुचित है। तुरंत भुगतान करने के निर्देश उपभोक्ता आयोग ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को निर्देश दिए हैं कि मृतका के परिजनों को— 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि उस पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज 2 लाख रुपये मानसिक पीड़ा व वाद व्यय का भुगतान तत्काल किया जाए। आयोग के इस फैसले को कोविड से जुड़े बीमा दावों में उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है।

    अन्य खबरे

    स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कोरबी में सरस्वती पूजन हर्षोल्लास से संपन्न

    स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कोरबी में सरस्वती पूजन हर्षोल्लास से संपन्न

    उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़ी कार्रवाई, अवैध शिकार करते 3 आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

    उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़ी कार्रवाई, अवैध शिकार करते 3 आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

    धान खरीदी महापर्व में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, बालोद में दो अधिकारी निलंबित देखे आदेश

    धान खरीदी महापर्व में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, बालोद में दो अधिकारी निलंबित देखे आदेश

    छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कई जिलों में कर्मचारियों के तबादले

    छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कई जिलों में कर्मचारियों के तबादले

    खड़गवां पुलिस की अनूठी पहल, गांव-गांव पहुंचा सड़क सुरक्षा का संदेश

    खड़गवां पुलिस की अनूठी पहल, गांव-गांव पहुंचा सड़क सुरक्षा का संदेश

    चट्टानपारा बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे पीड़ित

    चट्टानपारा बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे पीड़ित