
✍️ भागीरथी यादव
पटना (बिहटा): राजधानी के बिहटा थाना क्षेत्र में बालू माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे पुलिस पर जानलेवा हमला करने से भी नहीं चूक रहे। मंगलवार को बिहटा रेलवे ओवरब्रिज पर एक बेलगाम बालू लदे ट्रक ने दानापुर DSP-2 अमरेंद्र कुमार झा की सरकारी गाड़ी को कुचलने की कोशिश की। इस भीषण टक्कर में DSP की गाड़ी के परखच्चे उड़ गए, लेकिन सौभाग्य से वे सुरक्षित बच गए।
मौत बनकर दौड़ा ट्रक: पहले युवक को कुचला, फिर पुलिस पर हमला
घटनाक्रम किसी फिल्मी सीन जैसा भयावह था। जानकारी के मुताबिक:
पहली वारदात: ओवरब्रिज पर तेज रफ्तार ट्रक ने सबसे पहले एक बाइक सवार युवक को बेरहमी से रौंद दिया।
फरार होने की कोशिश: युवक को कुचलने के बाद ड्राइवर ने ट्रक की रफ्तार और बढ़ा दी।
DSP पर हमला: इसी दौरान सामने से आ रही DSP अमरेंद्र कुमार झा की गाड़ी को देख ड्राइवर ने रुकने के बजाय ट्रक सीधा पुलिस की गाड़ी पर चढ़ा दिया।
तीन घंटे तक ‘फंसी’ रही सांसें, लगा मीलों लंबा जाम
टक्कर इतनी जोरदार थी कि पुलिस की गाड़ी ट्रक के अगले हिस्से में बुरी तरह फंस गई। क्रेन बुलाकर गाड़ी को निकालने में करीब 3 घंटे का समय लगा। इस दौरान बिहटा की मुख्य सड़क पर वाहनों का सैलाब उमड़ पड़ा और यातायात पूरी तरह ठप रहा। मौके पर पहुंची कई थानों की पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।
“10 लाख का खेल” और नो-एंट्री पर सवाल
इस हादसे ने प्रशासन की मिलीभगत पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासी विकास कुमार और अन्य चश्मदीदों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
“जब क्षेत्र में भारी वाहनों की नो-एंट्री लागू है, तो बालू लदे ट्रक धड़ल्ले से ओवरब्रिज पर कैसे पहुंच रहे हैं? यह ’10 लाख रुपए की अवैध वसूली’ का खेल है, जिसके कारण माफियाओं को खुली छूट मिली हुई है।”
जांच के घेरे में खाकी और खनन माफिया
पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और ड्राइवर से पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि नो-एंट्री जोन में ट्रक का प्रवेश किसकी लापरवाही या शह पर हुआ। क्या इसमें कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों की भी मिलीभगत है? दानापुर पुलिस इसकी गहनता से तफ्तीश कर रही है।








