
✍️ भागीरथी यादव
साजापहाड़ पुल निर्माण में गंभीर खामियां, घटिया निर्माण का खेल उजागर
एमसीबी / साजापहाड़।
मनेंद्रगढ़–चिरमिरी को जोड़ने वाली साजापहाड़–चैनपुर मुख्य सड़क और पुल निर्माण कार्य में सामने आई भारी अनियमितताओं ने जिले में हो रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। करीब 40.56 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस सड़क का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन पुल में दरारें पड़ना शुरू हो चुकी हैं।
यह वही सड़क है, जिससे हजारों लोग रोजाना सफर करते हैं। निर्माण की शुरुआती अवस्था में ही पुल की हालत देखकर स्थानीय नागरिकों में डर और आक्रोश दोनों हैं।
निर्माण अधूरा, भरोसा टूटा
17.40 किलोमीटर लंबी साजापहाड़–चैनपुर सड़क के चौड़ीकरण का कार्य जून 2025 में शुरू हुआ था। चैनपुर से लेकर चिरमिरी के पंडित दीनदयाल चौक तक सड़क और पुल निर्माण किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और तकनीकी जानकारों का आरोप है कि सड़क की बेस लेयर में मानकों को ताक पर रखकर जंगल और पहाड़ी मिट्टी सीधे भराई में इस्तेमाल की जा रही है, जिससे सड़क की नींव बेहद कमजोर हो गई है।
लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह काम चलता रहा तो बरसात में सड़क और पुल ध्वस्त होना तय है, जिससे बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
ठेकेदार की चुप्पी, सवालों की गूंज
स्थानीय नागरिकों के अनुसार इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सूरजपुर निवासी ठेकेदार अमित गोयल के पास है। जब उनसे इस विषय में संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
ठेकेदार की यह चुप्पी अपने आप में निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
पीएमजीएसवाई सड़क: 10 दिन में उखड़ गई 1.68 करोड़ की सड़क
इसी जिले के ग्राम पंचायत बौरीडांड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 1.68 करोड़ रुपये की लागत से बनी 3.50 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़क कुछ ही दिनों में बदहाल हो गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की जिम्मेदारी ठेकेदार बालमुकुंद खेड़िया के पास थी। शुरुआत से ही घटिया सामग्री और कमजोर बेस को लेकर शिकायतें होती रहीं, लेकिन न ठेकेदार ने ध्यान दिया और न ही विभाग ने समय रहते कार्रवाई की।
हैरानी की बात यह है कि मामला उजागर होने के 10 दिन बाद भी न मरम्मत शुरू हुई और न किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई हुई।
जनता के टैक्स की लूट किसके संरक्षण में?
यह मामला सिर्फ सड़क और पुल का नहीं, बल्कि जनता के टैक्स से जुटाई गई गाढ़ी कमाई के खुले दुरुपयोग का है।
ईमानदार शासन की छवि वाली विष्णु देव साय सरकार को ऐसे ठेकेदार और लापरवाह अधिकारी बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
अब सवाल सीधे और साफ हैं—
घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई जा रही?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
जनता की मांग
✔ सभी सड़क और पुल निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
✔ दोषी ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
✔ जनता के पैसे को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने से रोका जाए।
अब नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। विभागीय अधिकारियों से जल्द मुलाकात कर उनका पक्ष भी लिया जाएगा, जिसे आगामी समाचारों में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।






