
कोरिया। जिले के बचरा पोड़ी क्षेत्र के ग्राम जिल्दा में वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा कराए जा रहे फेंसिंग कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जंगलों के चारों ओर लगाए जा रहे सीमेंट के खंभों को तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं लगाया जा रहा है, जिससे पूरे कार्य की मजबूती पर संदेह पैदा हो गया है।
मौके पर बनाए गए एक वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि खंभे लगाने के लिए गड्ढे तो खोदे गए हैं, लेकिन उनमें डाले जा रहे सीमेंट, बालू और गिट्टी को सही तरीके से मिलाया नहीं जा रहा है। इतना ही नहीं, मिश्रण में पानी भी नहीं डाला जा रहा है। सूखे सीमेंट मिश्रण को सीधे गड्ढे में डालकर खंभों के आसपास भर दिया जा रहा है।
सामान्य तौर पर निर्माण कार्य में सीमेंट, बालू और गिट्टी को निर्धारित अनुपात में पानी के साथ मिलाकर कंक्रीट तैयार किया जाता है, ताकि खंभे मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ बने रहें। लेकिन जिल्दा क्षेत्र में जिस तरह से कार्य किया जा रहा है, उससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो खंभों को मजबूत बनाने के लिए “बरसात के भरोसे” तकनीक अपनाई जा रही हो। सूखा मिश्रण गड्ढे में डाल दिया गया है और उम्मीद की जा रही है कि बारिश होने पर पानी गिरने से यह अपने आप जम जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह से कार्य किया गया तो खंभे अधिक समय तक टिक नहीं पाएंगे, जिससे सरकारी धन की बर्बादी होने की आशंका है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है या फिर पूरा काम ठेकेदार और कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करें और कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करें, ताकि वनों की सुरक्षा के उद्देश्य से किया जा रहा यह कार्य सही तरीके से पूरा हो सके।






