
✍️ भागीरथी यादव
कोरबा, 30 मार्च 2025।
वनांचल क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों से निकलकर सफलता की मिसाल बनने वाली ग्राम कदमझेरिया (गढ़उपरोड़ा) की राजकुमारी आज पूरे पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। विशेष पिछड़ी जनजाति से आने वाली इस युवती ने अभाव, संघर्ष और सामाजिक तानों के बावजूद शिक्षा के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
राजकुमारी का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। परिवार के साथ मजदूरी करना और जंगलों से वनोपज एकत्र कर जीवन यापन करना उनकी दिनचर्या थी। आर्थिक तंगी इतनी अधिक थी कि दो वक्त का भोजन जुटाना भी चुनौती था। घास-फूस के कच्चे घर में पली-बढ़ी राजकुमारी के सामने पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था।
जिद और जुनून से बदली तकदीर
5वीं कक्षा के बाद परिवार ने आगे पढ़ाई के लिए दूसरे गांव भेजने से मना कर दिया, लेकिन राजकुमारी ने हार नहीं मानी। उन्होंने सतरेंगा स्थित आदिवासी कन्या आश्रम में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। 8वीं तक की शिक्षा वहीं पूरी करने के बाद उन्होंने घर पर रहकर स्वाध्यायी छात्रा के रूप में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं।
इस दौरान उन्हें समाज के तानों का भी सामना करना पड़ा—लड़कियों की पढ़ाई को लेकर नकारात्मक सोच उनके रास्ते में बाधा बनी, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
सरकारी नौकरी ने बदली जिंदगी
शिक्षा के प्रति उनकी लगन को देखते हुए आदिवासी विकास विभाग ने उन्हें कंप्यूटर प्रशिक्षण दिलाया। उनकी मेहनत रंग लाई और 1 जनवरी 2022 को जिला प्रशासन कोरबा के विशेष भर्ती अभियान के तहत उन्हें तहसील कार्यालय पोंड़ी-उपरोड़ा में सहायक ग्रेड-03 के पद पर नियुक्ति मिली।
आज राजकुमारी आर्थिक रूप से सशक्त हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। कार, मोटरसाइकिल, स्कूटी, टीवी, फ्रिज और अन्य सुविधाओं के साथ उनका जीवन पूरी तरह बदल चुका है। वे वर्तमान में शासकीय कॉलोनी पोंड़ी-उपरोड़ा में अपने परिवार के साथ रह रही हैं, जबकि ससुराल ग्राम कोनकोना में उनका पक्का मकान निर्माणाधीन है।
समाज के लिए बनीं बदलाव की मिसाल
जहां पहाड़ी कोरवा समुदाय आज भी शिक्षा के अभाव में पिछड़ा हुआ है, वहीं राजकुमारी की सफलता ने नई उम्मीद जगाई है। उनकी प्रेरणा से अब समुदाय के कई युवा और युवतियां शिक्षा की ओर अग्रसर हो रहे हैं और शासकीय संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं।
राजकुमारी की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए परिवर्तन, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की एक सशक्त मिसाल है।
