
✍️ भागीरथी यादव
मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में सेवानिवृत्त लेखापाल दामोदर राजपूत की हत्या मामले में पुलिस ने बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस जघन्य हत्याकांड का मास्टरमाइंड मृतक का सगा भाई और परिजन ही निकले, जिन्होंने करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए सुनियोजित साजिश रचते हुए सुपारी देकर अपहरण के बाद हत्या करवा दी। मामले में 11 वयस्क और 4 नाबालिग सहित कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। घटना थाना लालपुर क्षेत्र की है।
तकनीक और 14 टीमों से खुला राज
मुंगेली पुलिस ने इस केस को सुलझाने के लिए 14 टीमों का गठन किया। “त्रिनयन एप”, सीसीटीवी फुटेज और साइबर जांच की मदद से संदिग्ध ईओन कार का पता लगाया गया, जिससे पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ। जांच में सामने आया कि कार संजय यादव ने किराए पर ली थी।
गुमशुदगी से हत्या तक की कहानी
22 मार्च 2026 को बलबीर सिंह ने अपने भाई दामोदर राजपूत के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एक दिन पहले उनकी मोटरसाइकिल मनोहरपुर के पास संदिग्ध हालत में मिली थी। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की, जो आगे चलकर हत्या के मामले में बदल गई।
10 लाख और जमीन के बदले हत्या
पूछताछ में आरोपी संजय यादव ने खुलासा किया कि मृतक के छोटे भाई रणजीत, उसके साले पालेश्वर और चचेरे भाई रामपाल ने दामोदर की हत्या के लिए 10 लाख रुपये और 50 डिसमिल जमीन की सुपारी दी थी। योजना के तहत 21 मार्च को झाफल बुलाकर सुनसान रास्ते में गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
जंगल में दफन किया शव
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को कार में ले जाकर कवर्धा जिले के पंडरिया थाना क्षेत्र के देवसरा गांव के जंगल में नदी किनारे गड्ढा खोदकर रेत में दफना दिया। आरोपी की निशानदेही पर 29 मार्च को शव बरामद किया गया।
प्रयागराज तक रची गई साजिश
साजिश को छुपाने के लिए मृतक का मोबाइल प्रयागराज ले जाकर गंगा में फेंक दिया गया, ताकि यह भ्रम फैले कि दामोदर साधु बनने के लिए वहां चले गए हैं।
पारिवारिक विवाद बना वजह
जांच में सामने आया कि संपत्ति को लेकर परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था। मृतक और उसके बेटे के बीच भी संबंध खराब थे, जिसका फायदा उठाकर भाइयों ने पूरी साजिश रची और संपत्ति अपने नाम कराने की कोशिश की।
पहले भी हुई थी हत्या की कोशिश
दिसंबर 2025 में दामोदर का एक संदिग्ध सड़क हादसा भी इसी साजिश का हिस्सा था। आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया कि उस समय भी उन्हें मारने की कोशिश की गई थी।
नकली वचनपत्र से रचा षड्यंत्र
मृतक के भाइयों ने एक संदिग्ध नोटरी वचनपत्र भी थाने में पेश किया था, जिसमें दामोदर द्वारा संपत्ति बेचने की बात लिखी गई थी। पुलिस को शुरू से ही इसमें साजिश की बू आ रही थी, जो जांच में सही साबित हुई।
आरोपियों ने कबूला अपराध
पुलिस ने सभी आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिसमें उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया। मामले में इस्तेमाल वाहन, नगदी और अन्य सामान भी जब्त किए गए हैं। सभी वयस्क आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिगों को बाल संप्रेषण गृह भेजा गया है।
गिरफ्तार आरोपी के नाम
रणजीत सिंह राजपूत पिता बारेलाल उम्र 55 वर्ष निवासी झाफल, थाना लोरमी (मृतक का भाई)
पालेश्वर राजपूत पिता स्व.रामधुन उम्र 50 वर्ष निवासी झाफल, थाना लोरमी (मृतक के भाई रणजीत का साला)
रामपाल सिंह राजपूत पिता आजुसिंह उम्र 53 वर्ष निवासी लोरमी, थाना लोरमी (मृतक का चचेरा भाई)
पराग सिंह राजपूत पिता बलवीर सिंह उम्र 49 वर्ष निवासी झाफल, थाना लोरमी (मृतक के भाई बलबीर का पुत्र)
हेमंत राजपूत पिता रणजीत उम्र 26 वर्ष निवासी झाफल, थाना लोरमी (मृतक के भाई रणजीत का पुत्र)
अजय राजपूत पिता भुनेश्वर सिंह उम्र 26 वर्ष निवासी सारधा (मृतक का भांजा)
संजय यादव पिता लल्लुराम उम्र 37 वर्ष निवासी झाफल थाना लोरमी
श्रवण उर्फ प्रिंस गोई पिता श्याम उम्र 18 वर्ष निवासी जवाहर वार्ड मुंगेली
योगेश गंधर्व उर्फ योगेश्वर पिता राधेश्याम उम्र 18 वर्ष 10 माह निवासी कालीमाईवार्ड मुंगेली
देवराज साहू उर्फ दद्दु उर्फ देवकुमार पिता रामसहाय उम्र 23 वर्ष निवासी झझपुरीकला लोरमी
आशीष कारीकांत उर्फ धर्मेन्द्र उर्फ बाबु पिता धन्नू उम्र 20 वर्ष निवासी बस स्टैण्ड लोरमी
एवं 04 विधि से संघर्षरत बालक
निष्कर्ष:
यह मामला बताता है कि संपत्ति के लालच में रिश्तों की भी हत्या हो सकती है। मुंगेली पुलिस ने तकनीक, रणनीति और कड़ी मेहनत से इस जघन्य अपराध का सफलतापूर्वक खुलासा किया है।
