
बाबूपारा सिरमिना में बिजली पोल गिरने से मकान तबाह, परिवार बाल-बाल बचा
बेमौसम बारिश और तूफान से कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त, पीड़ितों ने शासन से लगाई मदद की गुहार
सुशील जायसवाल
सिरमिना-कोरबी। जिले के अंतिम छोर एवं पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत छिंदिया के आश्रित ग्राम बाबूपारा में बीते दिनों आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। अचानक बदले मौसम ने गांव में ऐसा कहर बरपाया कि कई गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ गए। तेज हवा, बारिश और बिजली गिरने जैसी भयावह स्थिति से पूरे गांव में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार 13 मई की शाम अचानक मौसम ने करवट बदली और देखते ही देखते तेज रफ्तार आंधी-तूफान के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई। ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए घरों में दुबक गए, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह तूफान कई गरीब परिवारों की जिंदगी तबाह कर देगा।
ग्राम बाबूपारा निवासी गोरेलाल पनिका पिता प्रेमलाल पनिका उम्र लगभग 35 वर्ष, जो मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, इस प्राकृतिक आपदा के सबसे बड़े पीड़ितों में शामिल हैं। बताया जा रहा है कि तेज तूफान के दौरान बिजली का खंभा टूटकर सीधे उनके मकान पर गिर पड़ा, जिससे मकान की छत और टीन-सीट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
तूफान इतना भयावह था कि घर में रखा धान, चावल, राशन सामग्री, बर्तन, बिस्तर, खाट और अन्य घरेलू सामान बारिश में भीगकर खराब हो गया। तेज हवा के कारण खपरे उड़ गए और देखते ही देखते पूरा घर मलबे में तब्दील हो गया। गनीमत रही कि घटना के दौरान परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित बच गए, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
मोबाइल वीडियो के जरिए शासन तक पहुंचाई पीड़ा
घटना के बाद पीड़ित गोरेलाल पनिका ने अपनी टूटी झोपड़ी और बर्बाद हुए सामान का वीडियो बनाकर सोशल media के माध्यम से शासन-प्रशासन तक अपनी पीड़ा पहुंचाने का प्रयास किया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह तेज आंधी ने गरीब परिवार की वर्षों की मेहनत पलभर में बर्बाद कर दी।
ग्रामीणों के अनुसार गोरेलाल का परिवार बेहद गरीब है और रोज मजदूरी कर किसी तरह जीवन यापन करता है। ऐसे में अचानक आए इस प्राकृतिक संकट ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। वर्तमान में परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है तथा उन्हें तत्काल राहत और आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।
कई अन्य ग्रामीणों के मकानों को भी भारी नुकसान
सिर्फ गोरेलाल का ही नहीं, बल्कि गांव के कई अन्य परिवार भी इस तूफान की चपेट में आए हैं। जानकारी के अनुसार ग्रामीण बनवारी लाल मरकाम के मकान पर एक विशाल कोसम का पेड़ गिर गया, जिससे घर को भारी नुकसान पहुंचा। वहीं आधा दर्जन से अधिक ग्रामीणों के मकानों में लगे टीन-सीट, खपरे और डीटीएच एंटीना तेज आंधी में उड़ गए।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बारिश और आंधी के दौरान गरीब परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन अब तक स्थायी राहत की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस बार आए तूफान ने गांव के कई परिवारों को बेघर होने की स्थिति में पहुंचा दिया है।
प्रशासन से तत्काल राहत की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों का तत्काल सर्वे कराया जाए तथा शासन की ओर से राहत राशि, राशन सामग्री और आवास सहायता उपलब्ध कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो गरीब परिवारों के सामने भूख और रहने का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान कर राहत पहुंचाई जाए, ताकि वे दोबारा अपने जीवन को पटरी पर ला सकें।
