नाम बदलकर दोस्ती, फिर बाइक लेकर फरार… कोरबी पुलिस ने घंटों में दबोचा शातिर आरोपी

 

शादी में बना मेहमान, भरोसा जीतकर उड़ाई मोटरसाइकिल

“सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” की मिसाल बनी कोरबी पुलिस

सुशील जायसवाल

कोरबी चोटिया। पसान थाना अंतर्गत कोरबी चौकी क्षेत्र के सीमावर्ती ग्राम सिमगा में शादी समारोह के दौरान एक युवक ने फर्जी नाम बताकर लोगों का विश्वास जीता और मौका मिलते ही मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गया। हालांकि कोरबी पुलिस की तत्परता से आरोपी को चंद घंटों में शिवरीनारायण से गिरफ्तार कर लिया गया।

जानकारी के अनुसार ग्राम हरदेवा निवासी बुधवार सिंह अगरिया अपने रिश्तेदार जगदीश अगरिया की शादी में शामिल होने परिवार सहित ग्राम सिमगा पहुंचे थे। शादी समारोह 6 मई से 8 मई 2026 तक आयोजित था। बुधवार सिंह अपनी मोटरसाइकिल स्प्लेंडर क्रमांक CG 12 BJ 4857 से वहां पहुंचे थे।

इसी दौरान ग्राम सिमगा निवासी गुमेश्वर अगरिया अपने साथ एक अनजान युवक को गांव लेकर आया था। युवक ने अपना नाम मनोज पटेल निवासी शिवरीनारायण बताया। गुमेश्वर ने ग्रामीणों को बताया कि उसकी मुलाकात बिलासपुर रेलवे स्टेशन के पास उक्त युवक से हुई थी, जहां उसने खुद को परेशान और पैसों की तंगी में बताया था। युवक ने गुमेश्वर को ₹3000 भी दिए थे, जिसके बाद वह उसे गांव लेकर आ गया।

करीब 10 से 12 दिनों तक युवक गांव में रहकर लोगों से घुलता-मिलता रहा और शादी समारोह में भी सक्रिय रूप से शामिल होता रहा। किसी को भी उसके असली इरादों की भनक नहीं लगी।

8 मई की सुबह युवक ने बुधवार सिंह से दुकान जाने के बहाने कुछ देर के लिए मोटरसाइकिल मांगी। परिचय और विश्वास के चलते बुधवार सिंह ने बिना संदेह के बाइक उसे दे दी, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर उसकी तलाश शुरू हुई। गांव और आसपास खोजबीन के बाद पता चला कि युवक मोटरसाइकिल लेकर फरार हो चुका है।

घटना की शिकायत मिलते ही कोरबी चौकी प्रभारी सुरेश कुमार जोगी ने तत्काल पुलिस टीम सक्रिय की। तकनीकी सहायता और मुखबिर तंत्र के जरिए पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। जांच में खुलासा हुआ कि युवक का असली नाम शत्रुघ्न है, जो फर्जी नाम मनोज पटेल बताकर गांव में रह रहा था।

कोरबी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को शिवरीनारायण स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से चोरी की गई मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली गई।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 024/2026, धारा 316(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर उसे कटघोरा न्यायालय में पेश किया, जहां से जमानत निरस्त होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

पूरे मामले में प्रधान आरक्षक सुधांशु शर्मा, आरक्षक संजय कुमार साहू सहित कोरबी चौकी स्टाफ की भूमिका सराहनीय रही। घटना ने जहां अनजान लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के खतरे को उजागर किया, वहीं कोरबी पुलिस की सक्रियता ने यह साबित कर दिया कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून से बच नहीं सकता।